Varsha Singh

कवयित्री / शायरा डॉ. वर्षा सिंह

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मंगलवार, अगस्त 25, 2020

मित्रता पर दोहे | डॉ. वर्षा सिंह

प्रिय ब्लॉग पाठकों,    
      मित्रता संंर्दभित मेरे दोहे आज web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 25.08.2020 में प्रकाशित हुए हैं।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं -https://yuvapravartak.com/?p=39863

मित्रता पर दोहे

      - डॉ. वर्षा सिंह


मुंहदेखी की  मित्रता, मुंहदेखी का साथ।

दुख में ऐसे व्यक्ति ही सदा छुड़ायें हाथ।।


कृष्ण-सुदामा की तरह, मित्र न मिलते आज।

चार पलों के कर्ज़ पर, मांगे सौ दिन ब्याज।।


सदा करे जो मित्र के हित में दिल से बात।

मित्र सही "वर्षा" वही, करे न भीतर घात।।


ऊंच-नीच, औकात का नहीं करे जो भेद।

मित्र वही जो मित्र के लिए बहाए स्वेद ।।


निर्भय होकर कर सकें, जिससे मन की बात।

मित्र बने सम्बल सदा दिन हो या हो रात।।


अपने से ज़्यादा रहे जिसे मित्र का ध्यान।

"वर्षा" ऐसे मित्र का करें सदा सम्मान।।

          -------


प्रस्तुतकर्ता Dr Varsha Singh पर 8:47 pm 2 टिप्‍पणियां:
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लेबल: दोहा, मित्रता, युवाप्रवर्तक

शुक्रवार, जून 05, 2020

विश्व पर्यावरण दिवस पर दस दोहे - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh
मेरे प्रिय ब्लॉग मित्रों, विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🌿🌳🌏💖💛🍀🌴
कृपया पढ़िए वेब मैगज़ीन "युवाप्रवर्तक" में आज दि. 05.06.2020 को प्रकाशित मेरे दस दोहे पर्यावरण पर ...
http://yuvapravartak.com/?p=34353

विश्व पर्यावरण दिवस पर दस दोहे
 
     -  डॉ. वर्षा सिंह

मत भूलो अनलॉक में, लॉकडाउन के लाभ।
स्वच्छ हुआ पर्यावरण, धरा हुई हरिताभ ।।

हम यदि रहें सचेत तो, रहे प्रदूषण दूर।
हमें सुनाई दे सदा, नदियों का संतूर।।

हर्रा, नीम, करंज में, औषधि है भरपूर।
इनके लाभों से सभी, अवगत रहें जरूर।।

पेड़ कटेंगे रोज़ तो, कहां बनेंगे नीड़।
कलरव ना सुन पाएगी, तब ये मानव भीड़।।

मौसम में बदलाव का, मानव जिम्मेदार।
जंगल को छोटा किया, किया शहर विस्तार।।

धुंआ, धूल और गंदगी के समझें नुकसान।
अच्छी आदत डाल के, करें सुरक्षित जान।।

निरा स्वार्थ में डूब कर, जग को रहे बिसार।
जब जग ही मिट जाएगा, व्यर्थ सकल व्यापार।।

धरती तपती जा रही, पिघल रहे हिम शैल।
यह संकट हम रोक लें, और न जाए फैल।।

समय अभी भी शेष है, जो हम जाएं चेत।
वरना कृत्रिम खाद से, सूने होंगे खेत ।।

पर्यावरण सुधार का, प्रण कर लें हम आज।
"वर्षा", जाड़ा, गर्मियां, बदलेंगी अंदाज़।।

             ---------------------

विश्व पर्यावरण दिवस ... दस दोहे - डॉ. वर्षा सिंह


#लॉकडाउन #अनलॉक #कोरोना #विश्व_पर्यावरण_दिवस #युवाप्रवर्तक #दोहा #दोहावर्षा #5जून2020 #WorldEnvironmentDay

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लेबल: अनलॉक, दोहा, युवाप्रवर्तक, लॉकडाउन, विश्व पर्यावरण दिवस, स्वच्छता

शुक्रवार, मई 01, 2020

दस दोहे... अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस 01 मई पर विशेष... पूजनीय श्रम है सदा - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh
     प्रिय मित्रों, आज 01 मई है यानी अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस... तो श्रमिक दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं 🌹❤🌹
      आज web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 01.05.2020 में श्रमिक दिवस के अवसर पर मेरे 10 दोहे. प्रकाशित हुए हैं। कृपया आप भी पढ़ें 🙏
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=31012

01मई अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर दुनिया भर के समस्त श्रमिकों को समर्पित दस दोहे

पूजनीय श्रम है सदा
      -डॉ. वर्षा सिंह

श्रमिक वही जिनकी सदा, श्रम ही है पहचान।
स्वेदकणों से जो सदा, लिखते श्रम का गान।।

हंस कर सह जाते श्रमिक, हर मौसम की मार।
श्रम की ही आराधना, श्रम ही है त्यौहार ।।

ऊंची बिल्डिंग- राजपथ, बड़े-बड़े निर्माण।
श्रमिकों ने हरदम दिए, श्रम के कई प्रमाण ।।

खनिज उत्खनन क्षेत्र हो या विद्युत - संधान।
हर इक गाथा में लिखा, श्रमिकों का अवदान।।

कोई भी उद्योग हो, श्रमिक बिना बेकार।
अपने श्रम से जोड़ता, श्रमिक तार से तार।।

श्रम सेवा का रास्ता, श्रम पूंजी का द्वार।
श्रम में ही उन्नति निहित, श्रम विकास का सार।।

श्रमिक उठें जब एक हो, गूंजे श्रम का गान।
हिले सिंहासन, डूबते सत्ता के अभिमान।।

तन, मन, सेवा-भाव से, किया गया श्रमदान।
मोल न आंका जा सके, श्रम है सदा महान।।

श्रम के बिना अपूर्ण है, मानवता का गान।
श्रम के जरिए मनुज ने, गढ़े कई प्रतिमान।।

पूजनीय श्रम है सदा, वंदित श्रमिक समाज।
"वर्षा" अभिनंदन करे, श्रमिक दिवस पर आज।।

                  ------------------
श्रमिक दिवस पर शुभकामनाएं


#LaboursDay #श्रमिक_दिवस #अंतर्राष्ट्रीय_मज़दूर_दिवस #युवाप्रवर्तक #MayDay #MayDay2020
प्रस्तुतकर्ता Dr Varsha Singh पर 3:24 pm कोई टिप्पणी नहीं:
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लेबल: अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, दोहा, मज़दूर दिवस, श्रम

दस दोहे... फिल्म अभिनेता ऋषि कपूर को श्रद्धांजलि.... युवा हृदयसम्राट ऋषि - डॉ. वर्षा सिंह

   
Dr. Varsha Singh
        परसों अल्विदा कहा फिल्म  अभिनेता इरफ़ान ख़ान ने और कल अंतिम विदाई ले ली ऋषि कपूर ने... स्व. ऋषि कपूर को कल मैंने अपने इन दस दोहों के माध्यम से श्रद्धांजलि समर्पित की थी....जिसे युवाप्रवर्तक ने प्रकाशित किया था दिनांक 30.04.2020 के अंक में।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=30902

युवा हृदयसम्राट ऋषि
        - डॉ. वर्षा सिंह

युवा हृदयसम्राट ऋषि, किया दिलों पर राज।
'बॉबी' में 'राजा' बने, जीता सकल समाज।।

तरह-तरह के रोल के, साथ किया था न्याय।
आज काल ने कर दिया, कैसा ये अन्याय।।

खानदान फिल्मी मगर, प्रतिभा थी भरपूर।
फेम मिला लेकिन रहे, ऋषि घमंड से दूर ।।

नई-नई अभिनेत्रियों को दी हिम्मत ख़ूब ।
अभिनय के जरिए बने वे सबके महबूब ।।

बाल अभिनेता से युवा और युवा से वृद्ध।
ढेरों फिल्मों से किया, प्रतिभा अपनी सिद्ध।।

पात्र बने हर धर्म के, किया कभी ना भेद।
कलाकार बन श्रम किया,  सदा बहाया स्वेद।।

कटु सच्चाई से भरे, करते ट्वीट ज़रूर।
किन्तु न मन में था कभी, उनके ज़रा गुरूर।।

रजतपटल पर राज कर, लिया सभी को जीत।
सबने चाहा इस क़दर, जैसे हों निज मीत।।

कभी न भूलेंगे उन्हें, हैं जो उनके फैन।
फिल्मों में डूबे रहे, उनकी जो दिन- रैन।।

ऋषि को हमसे है लिया, क्रूर काल ने छीन।
आज अल्विदा कह उन्हें, "वर्षा" है ग़मगीन।।
         --------------



    दैनिक "सागर दिनकर", सागर ने भी मेरी इस दोहेरूपी श्रद्धांजलि को आज दिनांक 01 मई 2020 के अंक में प्रकाशित किया है। हार्दिक आभार "सागर दिनकर" 🙏
दैनिक सागर दिनकर

#ऋषि_कपूर #RishiKapoor #श्रद्धांजलि #दोहा #युवाप्रवर्तक #Varsha_Singh
प्रस्तुतकर्ता Dr Varsha Singh पर 3:11 pm कोई टिप्पणी नहीं:
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लेबल: ऋषि कपूर, दोहा, फिल्म अभिनेता, श्रद्धांजलि

गुरुवार, अप्रैल 30, 2020

दस दोहे... अभिनेता इरफ़ान ख़ान को श्रद्धांजलि स्वरूप... बॉलीवुड की शान थे, अभिनेता इरफान - डॉ वर्षा सिंह

 
Dr. Varsha Singh
बॉलीवुड के मशहूर एक्टर इरफान खान (Irrfan Khan) ने कल 29.04 2020 को 53 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया।
     इरफान खान भारतीय फिल्‍म अभिनेता थे और वे बॉलीवुड में अपने दमदार अभिनय के लिए जाने जाते थे । वे अपने हॉलीवुड फिल्‍मों में किए गए कामों की वजह से भी जाने जाते थे। उन्‍हें तीन बार फिल्‍मफेयर पुरस्‍कार और सर्वश्रेष्‍ठ अभिनेता के तौर पर फिल्‍म 'पान सिंह तोमर' के लिए राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार भी मिल चुका था ।उन्‍हें पद्मश्री सम्‍मान से भी नवाजा गया था। दर्शक ऐसा मानते हैं कि वे अपनी आंखों से ही पूरा अभिनय कर देते थे और यही उनकी विशेषता भी थी वे लीक से हटकर फिल्‍में करने की वजह से मशहूर थे।

    
       आज web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 30.04.2020 में प्रकाशित हुए हैं ... अपने अभिनय से दर्शकों का हृदय जीतने वाले अभिनेता स्व. इरफान खान, ( जिन्होंने कल दि. 29.04.2020 को अपनी अंतिम सांस ली) को समर्पित मेरे दस दोहे।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=30867

बॉलीवुड की शान थे, अभिनेता इरफान

- डॉ वर्षा सिंह

बॉलीवुड की शान थे, अभिनेता इरफान। तरह-तरह के रोल में, डाली हरदम जान।।

जयपुर में जन्में मगर, मुबंई पकड़ी राह।
दुख-सुख जो भी मिल गया, उससे किया निबाह।।

ड्रामा के स्कूल से, अभिनय सीखा खूब।
अभिनय-सागर में गए, तन,मन से वे डूब।।

सुतपा-सी अर्द्धांगिनी, बाबिल और अयान
अपने इस परिवार का, रखा सदा ही ध्यान।।

चाहे हो 'मकबूल' या 'नेमसेक' या 'रोग'।
धारावाहिक से रहा, फिल्मों तक का योग।।
         
हिंदी, अंग्रेजी सभी, फिल्में की भरपूर।
असमय ही इरफान पर, समय हो गया क्रूर।।

मां के अंतिम दरस भी, मिल ना पाए हाय।
पीड़ा ऐसी थी बड़ी, जो ना हृदय समाय।।

बीमारी हंस कर सही, सह न सके वियोग।
मां जन्नत को जो गईं, बेटे को था सोग।।

सिने जगत स्तब्ध है, बिलख उठे हैं फैन।
स्मृतियां जब कौंधतीं,भर-भर आते नैन।।

 "वर्षा" "इरफू" ने किया, सदा दिलों पर  राज।
याद रखेगा "खान" को, दर्शक सकल समाज।।
             ------------


#इरफ़ान_खान #IrfaanKhan #श्रद्धांजलि #दोहा #युवाप्रवर्तक #Varsha_Singh
प्रस्तुतकर्ता Dr Varsha Singh पर 1:21 pm कोई टिप्पणी नहीं:
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लेबल: अभिनेता, इरफ़ान ख़ान, दोहा, श्रद्धांजलि

बुधवार, जनवरी 29, 2020

❣💛🌹 दस दोहे वसंत के 🌹💛❣ - डॉ. वर्षा सिंह

   
Dr. Varsha Singh
❣💛 वसंत के दोहे 💛❣
                  - डॉ. वर्षा सिंह
आख़िर अब तो हो गया, इंतज़ार का अंत।
माघ पंचमी आ गई, ले कर साथ  वसंत ।।1।।

कितने दिन से जोहती थी वसंत की बाट।
आज प्रकृति के खुल गए सारे बंद कपाट।।2।।

कल तक लगता था भला जिसका हर इक रूप।
तीखी- सी लगने लगी वही कुनकुनी धूप।।3।।

जबसे मौसम ने यहां बदली अपनी चाल।
बदले- बदले लग रहे आम, नीम के हाल।।4।।

टेसू अब करते नहीं, हरे पात की बात।
फूल, फूल, बस फूल की बातें हैं दिन रात।।5।।

समझ  गए  नादान भी , वासंती संकेत ।
पीले फूलों से भरे, सरसों वाले खेत ।।6।।

बाग़-बग़ीचों में चला फिर उत्सव का दौर।
हवा कह रही -''चाहिए ख़ुशबू थोड़ी और" ।।7।।

देह नदी की छरहरी, लुभा रही वनप्रांत।
जाएगी फिर से लिखी, बेशक कथा सुखांत ।।8।।

यहां शहर में है वही, हर दिन एक समान।
वही एक-सी बांसुरी, वही एक-सी तान ।।9।।

कौन करेगा अब यहां, "वर्षा" ऋतु की याद।
वासंती पुरवाइयां,  करतीं  मन आबाद ।।10।।
                ----------------


प्रिय मित्रों,
      ❣💛 वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं 💛❣
      मेरे वासंती दोहों को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 30 जनवरी 2020 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=24737


दस दोहे वसंत के - डॉ. वर्षा सिंह

प्रस्तुतकर्ता Dr Varsha Singh पर 7:56 pm 2 टिप्‍पणियां:
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लेबल: टेसू, डॉ. वर्षा सिंह, दोहा, प्रकृति, माघ पंचमी, वसंत

मंगलवार, अप्रैल 16, 2019

बुंदेली दोहे... बुंदेली माटी कहे - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh


कोनउ को परवा नईं, सूखे नदिया- ताल।
हो रइ कैसी दुरदसा, फैलो स्वारथ जाल।।

अपनो घर भरबे मगन, जो सक्छम कहलाय।
औरन पे लातें धरे, अपनो पेट भराय।।

बातन के सबरे धनी, छूछे सब बतकाव।
इते बतासा घोर के, उते दे रये घाव।।

मोड़ा- मोड़ी हींड़ रय, रोजगार की बाट।
बब्बा जू सोये परे, उल्टी हो रयी खाट ।।

छुटभैया नेता फिरैं, ऊंसइ  से बेभाव ।
उते मुड़ावें मूंछ बे, इते दिखा रय ताव ।।

उनके एंगर आज लों, बातन को है जाल।
देत फंकाई घर भरैं, उनको जेई कमाल ।।

बिड़ी फूंकबे बैठ के, भूले सबरे काज।
जुआ खेल पकरे गये, सट्टा खेलत आज।।

सबकी उलझी है इते, को की को सुलझाय।
जिनगी बा डोरी भई, छोर न पकरो जाय।।

गौ माता भूखी फिरै, ज्यों आवारा ढोर।
सुध कोऊ ना लेत है, जो कलजुग को जोर।।

बुन्देली माटी कहे- "जो का कर रय, लाल !
उल्टे- सूधे काज कर, काय करत बेहाल ।।"

"वर्षा" का को से कहें, सबइ इते मक्कार।
पेड़ काट, धूरा उड़ा,  मिटा रये संसार ।।

                    ---------

- डॉ. वर्षा सिंह

मेरे इन बुंदेली दोहों को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 18 अप्रैल 2019 में स्थान मिला है।
 Please see the following link 🙏
http://yuvapravartak.com/?p=13672

प्रस्तुतकर्ता Dr Varsha Singh पर 3:01 pm कोई टिप्पणी नहीं:
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लेबल: डॉ. वर्षा सिंह, दोहा, बुंदेली दोहे

मंगलवार, फ़रवरी 27, 2018

होली की दस्तक

होली दस्तक दे रही,
वन, आंगन, घर, द्वार ।
मन फगुनाया जोहता
रंगों का त्यौहार ।।

मौसम से करने लगी
चाहत नये सवाल ।
उड़ने को आतुर हुआ
सपनों भरा गुलाल ।

- डॉ. वर्षा सिंह


प्रस्तुतकर्ता Dr Varsha Singh पर 12:21 am कोई टिप्पणी नहीं:
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लेबल: डॉ. वर्षा सिंह, दोहा, हार्दिक शुभकामनाएं, होली, Dr Varsha Singh

रविवार, जून 11, 2017

पावस के दोहे - डॉ. वर्षा सिंह

डॉ. वर्षा सिंह

प्रियतम का संदेश ले, आया श्वेत कपोत ।
"वर्षा" होगी  नेह की, जागी मन में जोत ।।

एक बरस के बाद फिर, आया है आषाढ़ ।
प्रकृति-हृदय में आ गई, खुशहाली की बाढ़ ।।

जंगल होंगे  फिर हरे, नये  खिलेंगे फूल ।
अब ढूंढे से भी नहीं, कहीं दिखेगी धूल ।।

"वर्षा" की ऋतु आ गई, बरसन लागे मेह ।
धरती  हरियाने  लगी, भीगी  सूखी  देह।।

गीतों में फिर ढाल कर, कहना मन की बात।
रिमझिम का संगीत है, "वर्षा" के दिन- रात ।।

                              ❤  - डॉ वर्षा सिंह

प्रस्तुतकर्ता Dr Varsha Singh पर 6:47 pm 10 टिप्‍पणियां:
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लेबल: आषाढ़, दोहा, पावस के दोहे, वर्षा सिंह

सोमवार, जून 15, 2015

दस दोहे धूल पर .....Poetry on dust

Dr Varsha Singh


माथे सदा लगाइये, जन्मभूमि की धूल।
तन-मन के भीतर खिले, देशभक्ति का फूल।। 1।।

जीवन की है आस्था मिट्टी, पानी, धूल।
इन्हें त्यागने की कभी करना मत तुम भूल।। 2 ।।

अंतर मिट्टी-धूल में करना सहज समान
जैसे मानव की बने रंग, रूप, पहचान।। 3 ।।

धूलि गांव की स्वर्ण-सी, सदा लगाओ माथ।
 मां के आशीर्वाद-सी, देती हरदम साथ  ।। 4 ।।

श्रद्धा, भक्ति, सनेह की देती है जो सीख।
मूल्यवान है धूल ये कहीं न मिलती भीख ।। 5 ।।

धूल सरीखी जि़न्दगी, जिसे संवारे धूल । 
माथे इसे लगाइये, यह जीवन की मूल ।। 6 ।।

 मिट्टी काली, लाल है, लेकिन धूल सफेद ।
श्रम तब तक यूं कीजिए, देह गिरे जब स्वेद।। 7।।

पंचतत्व में एक है, मिट्टी प्राण समान।
यही कराती है हमें, देशभक्ति का ज्ञान।। 8 ।।

धूल हमें देती सदा, देश प्रेम की चाह।
बैर न करना धूल से, तभी मिलेगी राह।। 9 ।।

 "वर्षा" ने हरदम किया, महिमा धूलि बखान।
धूल सदा निज देश की, लगती हमें महान।। 10।।

                                       - डॉ. वर्षा सिंह
प्रस्तुतकर्ता Dr Varsha Singh पर 6:58 pm 2 टिप्‍पणियां:
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    • ►  दिसंबर (4)
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    • ►  जनवरी (2)
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    • ►  दिसंबर (2)
    • ►  नवंबर (2)
    • ►  अक्टूबर (1)
    • ►  सितंबर (9)
    • ►  अगस्त (1)

अनुक्रम

  •   #सफ़र #शायरी #त्रासदी #वर्षा #मेघ #स्वप्न #दर्द ##HindiShayari (1)
  • . अमेजन (1)
  • .कान्हा (1)
  • ‘वर्षा’ हो ज़रा बरसो (1)
  • "श्यामची आई " (1)
  • #नींद (1)
  • #महाकवि_कालिदास #मेघदूतम् #वर्षासिंह #यक्ष #हिमालय #कथावस्तु (1)
  • ❤ दिल तो बच्चा है जी 😊 (1)
  • 02 अक्टूबर (1)
  • 08 मार्च (2)
  • 10 मई (1)
  • 14 नवम्बर (1)
  • 15 अप्रैल से 3 मई (1)
  • 2018 (1)
  • 2019 (1)
  • 22 मार्च (1)
  • 23 March (1)
  • 29 अगस्त (1)
  • 29 नवम्बर (1)
  • 29 August (3)
  • 5 अप्रैल (1)
  • ॐ गं गणपतये (1)
  • अंगना में ठाड़े बड्डे (1)
  • अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस (1)
  • अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (2)
  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (1)
  • अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (1)
  • अक्षय तृतीया (1)
  • अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (1)
  • अजनबी शहर है (1)
  • अज्ञेय (1)
  • अनलॉक (1)
  • अनिल जैन अनिल (1)
  • अनुभव (1)
  • अपनी बुंदेली धरती (1)
  • अपने अपने अजनबी (1)
  • अब न रोको (1)
  • अभिनेता (2)
  • अमावस्या (1)
  • अशोक मिज़ाज (1)
  • अष्टविनायक (1)
  • आंखें (1)
  • आंखें बोलती हैं (1)
  • आई है होली (1)
  • आग सी क्यों है (1)
  • आज मावस की निशा (1)
  • आजकल (1)
  • आज़ादी (1)
  • आपदा का समय (1)
  • आलेख (1)
  • आषाढ़ (1)
  • आहटें (1)
  • इन दिनों (2)
  • इन दिनों तनहाइयां.. (1)
  • इमारत (1)
  • इरफ़ान ख़ान (1)
  • इश्क़ के फ़लसफे (1)
  • उजाला (1)
  • उनके क़दमों की आहट में (1)
  • उपन्यास (3)
  • उपहार (1)
  • उमा (1)
  • उम्मीद (1)
  • उसकी यादें (1)
  • ऋषि कपूर (1)
  • एकजुटता (1)
  • ओ बड्डे (1)
  • ओढ़नी (1)
  • और इश्क़ (1)
  • और कितने इम्तिहां (1)
  • औरत (2)
  • कथाओं के पंख होते हैं (1)
  • कथापात्र (1)
  • कथासम्राट (1)
  • कपिल बैसाखिया (1)
  • कबीर (1)
  • कभी (1)
  • करवा चौथ (1)
  • करें जब दुश्मनी बेशक़ (1)
  • कवि (2)
  • कवि जयशंकर प्रसाद (2)
  • कवि रुद्र (1)
  • कवि सम्मेलन (1)
  • कविता (17)
  • कविताएं (2)
  • कस्बाई सीमोन (1)
  • कह दिया (1)
  • कहानी (1)
  • कहावतें (1)
  • काय फिरत भैराने (1)
  • कालिदास (1)
  • काश (1)
  • किससे क्या कहें (1)
  • किस्से ग़मों के सुनाना नहीं (1)
  • कुंआ (1)
  • कुछ और दोहे वसंत के (1)
  • कुछ बोल पाते हैं नहीं (1)
  • केदारनाथ (1)
  • कैनवास (1)
  • कैमरा (1)
  • कोरोना (9)
  • कोरोना वायरस (2)
  • कौन जाने (1)
  • क्या कीजे (2)
  • क्या हुआ है आज मेरे देश को (1)
  • क्योंकि फ़र्क होता है (1)
  • क्षत्रिय नव चेतना मंच (1)
  • खनकी हैं हाथों की चूड़ियां (1)
  • ख़ामोशियां (1)
  • खुद समझ लो (1)
  • ख़ुशबू फूल (1)
  • ख़ुशी (1)
  • ख़्वाब वही था नेहरू का (1)
  • ग़जल (2)
  • ग़ज़ल (32)
  • ग़ज़ल जब बात करती है (1)
  • ग़ज़ल पाठ (1)
  • ग़ज़ल संग्रह (2)
  • ग़ज़लपाठ (1)
  • ग़ज़लवर्षा (2)
  • ग़ज़लसंग्रह (1)
  • ग़ज़लें (2)
  • गजाधर सागर (1)
  • गणतंत्र दिवस (3)
  • गणपति बाप्पा मोरया (1)
  • गणेश चतुर्थी (1)
  • ग़म (1)
  • गांधी जयंती (1)
  • गांव के रास्ते (1)
  • गीत (57)
  • गीतों के संग (1)
  • गुरदी देवी सम्मान (1)
  • गुरु नानक जयन्ती (1)
  • गूगल प्लस (1)
  • घर (1)
  • घरई में होरी मनाओ (1)
  • घुमक्कड़ (1)
  • चंद्रगुप्त नाटक (1)
  • चलो अच्छा हुआ (1)
  • चांद (2)
  • चाहत (1)
  • चाहत में (1)
  • चुपके से आया मधुमास है (1)
  • छंद (1)
  • छवियां (2)
  • छोटी सी (1)
  • जनता कर्फ्यू (1)
  • जननायक (1)
  • जन्मदिन (1)
  • जन्मदिन की शुभकामनाएं (1)
  • जब याद करता है (1)
  • जब से कोई दिल में (1)
  • ज़रूरतें (1)
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  • ज़िन्दगी की बातें (1)
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  • शाम (1)
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  • शिकायत (1)
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  • शिव आराधना (1)
  • शिव तांडव स्त्रोत (1)
  • शुभ शिवरात्रि (1)
  • शुभकामना (1)
  • शुभकामनाएं (21)
  • शून्य होती जा रही संवेदना (1)
  • श्याम की मां (1)
  • श्याम मनोहर सीरोठिया (1)
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  • श्रावण शुक्ला सप्तमी (1)
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  • श्री राम दरबार (1)
  • श्री सूक्त (1)
  • श्रृद्धांजलि (1)
  • संक्रमण (1)
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  • संध्या पेडणेकर (1)
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Dr Varsha Singh’s Ghazal by Ahamad Hussain Mohammad Hussain at Sanjay Gandhi PGI, Lucknow. Dec 2011

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