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शनिवार, अगस्त 19, 2017

ज़िन्दगी में.....

ज़िन्दगी में
बेवज़ह
कभी कुछ नहीं होता है.

कोई नफ़रतों के बाग में
इश्क़ बोता है.

कोई मुस्कुराहटों के बीच
आंसुओं से दुपट्टा भिगोता है.

ज़िन्दगी में
बेवज़ह
कभी कुछ नहीं होता है.

मंगलवार, जुलाई 18, 2017

भूल गये गांव.....

शहरी  हंगामें  में भूल  गये  गांव।
पनघट, चौबारे और पीपल की छांव।
बात-बात बिछती शतरंजी बिसात,
क़दम-क़दम चालें है, क़दम- क़दम दांव ।
         🍀 - डॉ वर्षा सिंह

मंगलवार, जून 16, 2015

माटी मेरेे सागर की .... Mati mere Sagar ki ....

Dr Varsha Singh

 पावस के दोहे
               - डाॅ. वर्षा सिंह

मां के आंचल जैसी प्यारी ,  माटी मेरेे सागर की ।
सारे जग से अद्भुत न्यारी,  माटी मेरेे सागर की ।।

भूमि यही वो जहां ‘’गौर’’ ने, दान दिया था शिक्षा का
पाठ पढ़ाया  था  हम सबको,  संस्कार की  कक्षा का
विद्या की यह है फुलवारी , माटी मेरेे सागर की ।।
मां के आंचल जैसी प्यारी.................................

विद्यासागर जैसे  ऋषि-मुनि की   पावनता  पाती है
धर्म, ज्ञान की, स्वाभिमान की अनुपम उज्जवल थाती है
श्रद्धा, क्षमा, त्याग की क्यारी,  माटी मेरेे सागर की ।।
मां के आंचल जैसी प्यारी.................................

‘वर्णी जी’  की तपो भूमि यह, यही भूमि ‘पद्माकर’ की
‘कालीचरण’ शहीद यशस्वी, महिमा  अद्भुत सागर की
सारा जग इस पर बलिहारी, माटी मेरेे सागर की ।।
मां के आंचल जैसी प्यारी.................................

नौरादेही   में   संरक्षित   वन   जीवों  का डेरा है
मैया  हरसिद्धी  का  मंदिर, रानगिरी  का  फेरा  है
आबचंद की गुफा दुलारी,  माटी मेरेे  सागर  की ।।
मां के आंचल जैसी प्यारी.................................

राहतगढ़  की छटा अनूठी ,झर-झर झरती जलधारा
गढ़पहरा,  धामौनी  बिखरा ,  बुंदेली   वैभव  सारा
राजघाट, रमना चितहारी, माटी मेरेे सागर की ।।
मां के आंचल जैसी प्यारी.................................


एरण पुराधाम विष्णु का , सूर्यदेव हैं रहली में
देव बिहारी जी के हाथों सारा जग है मुरली में
पीली कोठी अजब सवारी , माटी मेरेे सागर की ।।
मां के आंचल जैसी प्यारी.................................

मेरा सागर मुझको प्यारा, यहीं हुए लाखा बंजारा
श्रम से अपने झील बना कर, संचित कर दी जल की धारा
‘वर्षा’-बूंदों की किलकारी , माटी मेरेे सागर की ।।
मां के आंचल जैसी प्यारी.................................



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मंगलवार, अक्टूबर 14, 2014

मन तुम्हारी याद में....

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दिल बंजारा....

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‘वर्षा’ हो ज़रा बरसो.....

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नया इक आसमां होगा....

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शायराना हो गई है......

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सोचती हूं.....


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तेरे मेरे बीच में.....

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उसकी यादें....

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हाल क्या है ????......

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राज़ वो ही बता ये पाएगाा......

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न जाने कौन सा....

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चलो अच्छा हुआ.....

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