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सोमवार, फ़रवरी 12, 2018

फूल खिले तो

फूल खिले तो बिखरे ख़ुशबू
बिना किसी भी बंधन के,
रहे न दिल में कभी निराशा
उम्मीदों का डेरा हो ।
- डॉ वर्षा सिंह

मंगलवार, अगस्त 22, 2017

हमने देखा है ...

नहीं हों ग़म
तो ख़ुशी का भी
कुछ पता न चले.
सुबह मिलेगी तभी
जब कि लम्बी रात ढले.
हमने देखा है
उदासियों के पार जाने पर
ख़ुशी का प्यार मिले
और हंसी का फूल खिले.
- डॉ वर्षा सिंह