डॉ. (सुश्री) शरद सिंह लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
डॉ. (सुश्री) शरद सिंह लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, नवंबर 29, 2020

जन्मदिन की शुभकामनाएं | डॉ. (सुश्री) शरद सिंह | डॉ. वर्षा सिंह

Dr. (Miss) Sharad Singh & Dr. Varsha Singh

प्रिय ब्लॉग पाठकों,
     आज 29 नवम्बर को मेरी अनुजा डॉ. (सुश्री) शरद सिंह का जन्मदिन है। उन्हें मेरी अनंत हार्दिक शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद 🎂💐🌹💐🔶🌿☘️🌷🥀🌾🌿🌺🌹💐🆚

Happy Birthday To Dr. (Miss) Sharad Singh

 एक वाकया आप सबसे साझा कर रही हूं .... मुझे याद है कि जब मैं कक्षा 06 में पढ़ती थी तब विद्यालय में एक कविता लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इसमें प्रतियोगियों के लिए कक्षावार तीन वर्ग निर्धारित किए गए थे- प्रायमरी, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक। मैंने माध्यमिक वर्ग में अपना नाम लिखा दिया। अब समस्या थी कविता लिखने की। मैंने इस संबंध में नानाजी ठाकुर श्यामचरण सिंह जी से मदद मांगी, तो उन्होंने कहा - तुम प्रतिभागी हो इसलिए स्वयं कविता लिखो। तब मैंने पूछा कि मैं कैसे लिखूं। नानाजी ने कहा अपनी छोटी बहन पर कविता लिख डालो। और फिर क्या था, मैंने फटाफट अपनी छोटी बहन शरद पर कविता लिख डाली। मुझे उस कविता पर प्रथम पुरस्कार भी मिला। मेरी वह कविता थी -
मेरी बहना, मेरी बहना
सदा मानती मेरा कहना
खेल कूद से अधिक सुहाता
हरदम उसको लिखना-पढ़ना ।

Dear Friends,
    Today HAPPY BIRTHDAY of my sister Dr Sharad Singh. Please blessing to her. Thanks.

Dr. (Miss) Sharad Singh

डॉ. (सुश्री) शरद सिंह 


संक्षिप्त परिचय


भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के पं. बालकृष्ण शर्मा "नवीन" पुरस्कार सहित राज्य स्तरीय रामेश्वर गुरू पत्रकारिता सम्मान पुरस्कार,  प्रादेशिक वागीश्वरी सम्मान, नई धारा कथा सम्मान, कस्तूरी देवी चतुर्वेदी लोकभाषा सम्मान, रामानंद तिवारी स्मृति प्रतिष्ठा सम्मान, विजय वर्मा कथा सम्मान आदि अनेक सम्मानों से सम्मानित वरिष्ठ लेखिका डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह द्वारा  लिखित विभिन्न विषयों पर लगभग पचास से अधिक पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने शोषित, पीड़ित स्त्रियों के पक्ष में अपने लेखन के द्वारा हमेशा आवाज़ उठाई है।  बुन्देलखण्ड की महिला बीड़ी श्रमिकों पर केन्द्रित ‘पत्तों में कैद औरतें’ तथा स्त्री विमर्श पुस्तक ‘औरत तीन तस्वीरें’ मनोरमा ईयर बुक में शामिल की जा चुकी हैं। बेड़िया स्त्रियों पर केन्द्रित ‘पिछले पन्ने की औरतें’ तथा लिव इन रिलेशन पर 'कस्बाई सिमोन' नामक उनके उपन्यासों को राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक स्तर के अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनका एक और उपन्यास "पचकौड़ी" राजनैतिक और पत्रकारिता जगत की पर्तों का बारीकी से विश्लेषण करने वाला पठनीय एवं लोकप्रिय उपन्यास है। हाल ही में डॉ. शरद सिंह का नया उपन्यास "शिखण्डी… स्त्री देह से परे" प्रकाशित हुआ है जो महाभारत के एक प्रमुख पात्र शिखण्डी के जीवन को नए नज़रिए से व्याख्यायित करता है।
29 नवम्बर को पन्ना, मध्यप्रदेश में जन्मीं खजुराहो की मूर्तिकला विषय में पीएचडी , सागर की प्रतिष्ठित साहित्यकार, कथालेखिका, उपन्यासकार, स्तम्भकार एवं  कवयित्री और मेरी अनुजा डॉ शरद सिंह वर्तमान में मध्यप्रदेश के सागर नगर में निवास करते हुए स्वतंत्र लेखन के कार्य के साथ नई दिल्ली से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका "सामयिक सरस्वती" में कार्यकारी सम्पादक का दायित्व निभा रहीं हैं एवं पत्र-पत्रिकाओं सहित सोशल मीडिया पर वे लगातार अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं। वे मानती हैं कि अधिकारों का ज्ञान और साहस ही स्त्रियों को शोषण-मुक्त जीवन दे सकता है। सागर से प्रकाशित होने वाले दैनिक समाचार पत्र "सागर दिनकर" में उनका नियमित कॉलम "चर्चा प्लस" अनेक समसामयिक मुद्दों पर विश्लेषणात्मक लेखन के लिए प्रबुद्ध पाठकों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। इससे पूर्व डॉ. शरद सिंह सागर से ही प्रकाशित होने वाले दैनिक समाचार पत्र "आचरण" में अनेक वर्षों तक "बतकाव" शीर्षक का नियमित कॉलम लेखन कर चुकी हैं। 

          –--------------

मंगलवार, अगस्त 25, 2020

शरद सिंह कृत 'कस्बाई सीमोन' में स्त्री विमर्श | उपन्यास | शोधकर्ता माली गीता | डॉ. वर्षा सिंह

प्रिय बहन डॉ. (सुश्री) शरद सिंह को साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के प्रादेशिक "पं. बालकृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार " मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रतिष्ठित "वागीश्वरी सम्मान" और हेमंत फाउण्डेशन, मुंबई के राष्ट्रीय "विजय वर्मा कथा सम्मान"  से सम्मानित उनकी पुस्तक 'कस्बाई सिमोन' (उपन्यास) पर शोधात्मक पुस्तक के प्रकाशन पर बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं 💐❤💐

#डॉ_सुश्री_शरद_सिंह  #कस्बाई_सीमोन #उपन्यास #सामयिक_प्रकाशन  #वान्या_प्रकाशन #माली_गीता 

शुक्रवार, अगस्त 21, 2020

मित्रता पर दोहे | दोहों में मित्रता का आख्यान | डॉ. वर्षा सिंह

         मित्रता से भला कौन परिचित नहीं ? बचपन से लेकर वृद्धावस्था तक मित्रता कभी भी किसी से भी हो सकती है। मित्रता या दोस्ती दो या अधिक व्यक्तियों के बीच पारस्परिक लगाव का संबंध है। जब दो दिल एक-दूसरे के प्रति सच्ची आत्मीयता से भरे होते हैं, तब उस सम्बन्ध को मित्रता कहते हैं। यह संगठन की तुलना में अधिक सशक्त अंतर्वैयक्तिक बंधन है। मित्रता के अनेक उदाहरण हमारे ग्रंथों में उपलब्ध हैं। यथा - कृष्ण-सुदामा की मित्रता, कृष्ण-द्रौपदी की मित्रता, राम-सुग्रीव की मित्रता, दुर्योधन-कर्ण की मित्रता छत्रपति शिवाजी-महाबली छत्रसाल. की मित्रता आदि। 
    कवियों ने समय-समय पर मित्रता पर काव्यसृजन किया है। आज यहां मैं चर्चा करूंगी मित्रता संदर्भित कुछ नये- पुराने चर्चित दोहों की।

     संत कवि कबीर ने बोलचाल की भाषा का प्रयोग कर लोककल्याण हेतु अनेक दोहे कहे हैं। जो बाद में उनके शिष्यों द्वारा "बीजक" नामक ग्रंथ में संग्रहीत किए गए हैं। अंधविश्वास, जाति-धर्म, अमीरी-ग़रीबी जैसी सामाजिक विषमताओं एवं कुरीतियों के विरोध में कबीर ने जो दोहे कहे, वे आज भी प्रासंगिक हैं। मित्रता के प्रति भी उनका नज़रिया एकदम स्पष्ट है -

कबीर दुनिया से दोस्ती, होेये भक्ति में भंग।
एंका ऐकी राम सो, कै साधुन के संग।।
अर्थात् कबीर का कहना है की दुनिया के लोगों से मित्रता करने पर भक्ति में बाधा होती है।
या तो अकेले में प्रभु का सुमिरन करो या संतो की संगति करो।

कबीर चुनता कन फिरा, हीरा पाया बाट। ताको मरम ना जानिए, ले खलि खाई हाट।।
अर्थात् कबीर चावल का दाना चुनते चल रहे हैं और उन्हें रास्ते में हीरा मिल गया। किंतु उसका महत्व नहीं जानने के कारण वे बाजार में चूना लेकर खा रहे है। सत्संग के बिना ज्ञान नहीं हैं।

गिरिये पर्वत शिखर ते, परिए धरनी मंझार।
मूरख मित्र न कीजिए, बुड़ो काली धार।।

अर्थात् कबीर कहते हैं, कि पर्वत से गिर जाओ या शिखर से गिर पड़ों। चाहो कोई भी परेशानी आ जाए किंतु मूर्ख मित्र से मित्रता मत करो। मूर्ख से मित्रता बहुत भारी पड़ती है और हमें कभी भी मूर्ख मित्रता नहीं करनी चाहिए।

कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय।
खीर खीड भोजन मिलै, साकट संग न जाय।।
अर्थात् साधु की संगत में अगर भूसी भी मिलै तो वह भी श्रेयस्कर है। खीर तथा तमाम तरह के व्यंजन मिलने की संभावना हो तब भी दुष्ट व्यक्ति की संगत न करें।

कबीर संगत साधु की, कभी न निष्फल जाय।
जो पै बोवै भूनिके, फूलै फलै अघाय।। अर्थात् साधुओं की संगति कभी भी व्यर्थ नहीं जाती और उसका समय पर अवश्य लाभ मिलता है। जैसे बीज भूनकर भी बौऐं तो खेती लहलहाती है।

रामचरित मानस के रचयिता तुलसीदास ने मित्रता संदर्भित बहुत ही सुंदर और शिक्षामूलक दोहों की रचना की है। यहां प्रस्तुत हैं उनके कुछ दोहे -

तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक। 
साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक।।
अर्थात् जीवन में हर स्थिति का सामना मजबूती से करने की सीख देते हुए तुलसीदास जी कहते हैं, परिस्थिति कितनी ही विपरीत क्यों न हो, मनुष्य के ये 7 गुण उसकी रक्षा करते हैं। आपका ज्ञान और शिक्षा, आपकी विनम्रता, आपकी बुद्धि, आपके भीतर का साहस, आपके अच्छे कर्म, सच बोलने की आदत और राम यानी ईश्वर में विश्वास।

आवत ही हरषै नहीं नैनं नहीं सनेह।
तुलसी तहां न जाइये कंचन बरसे मेह।।
अर्थात् अपने सम्मान के प्रति सजग रहने की सीख देते हुए तुलसीदास जी कहते हैं, जिस जगह आपके जाने से लोग प्रसन्न नहीं होते हों, जहां लोगों की आंखों में आपके लिए स्नेह या मित्रता का भाव नहीं हो, वहां हमें कभी नहीं जाना चाहिए। फिर चाहे वहां धन की बारिश ही क्यों न हो रही हो।

अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ानां जो रहीम के नाम से विख्यात हैं, ने लौकिक जीवनव्यवहार पक्ष पर अवधी और ब्रजभाषा, दोनों में ही कविता की है जो सरल, स्वाभाविक और प्रवाहपूर्ण है। उनके काव्य में श्रृंगार, शांत तथा हास्य रस मिलते हैं। दोहा, सोरठा, बरवै, कवित्त और सवैया उनके प्रिय छंद हैं। रहीम की भाषा अत्यंत सरल है, उनके काव्य में भक्ति, नीति, प्रेम और श्रृंगार का सुन्दर समावेश मिलता है। उन्होंने दोहों का प्रयोग करते हुए मित्रता संदर्भित काव्यसृजन किया है -

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥

अर्थात् प्रेम के धागे को कभी तोड़ना नहीं चाहिए क्योंकि यह यदि एक बार टूट जाता है तो फिर दुबारा नहीं जुड़ता है और यदि जुड़ता भी है तो गांठ तो पड़ ही जाती है।

मथत मथत माखन रहै, दही मही बिलगाय।
रहिमन सोई मीत है भीर परे ठहराय।।

अर्थात् दही को बार बार मथने से दही और मक्खन अलग हो जाते हैं। रहीम कहते हैं कि सच्चा मित्र दुख आने पर तुरंत सहायता के लिये पहुंच जाता है। मित्रता की पहचान दुख में ही होती है।

टूटे सुजन मनाइये जो टूटे सौ बार।
रहिमन फिरि-फिरि पोहिये, टूटे मुक्ताहार।।

अर्थात् अच्छे व्यक्तियों अर्थात् मित्रों को रूठने पर उसे अनेक प्रकार से मना लेना चाहिये। मूल्यवान मोतियों का हार टूटने पर उसके मोतियों को पुनः पिरो लिया जाता है। 

जलहिं मिलाई रहीम ज्यों, कियो आपु सग छीर।
अगबहिं आपुहि आप त्यों, सकल आंच की भीर ।

अर्थात् दूध पानी को अपने में पूर्णतः मिला लेता है पर दूध को आग पर चढ़ाने से पानी ऊपर आ जाता है और अन्त तक सहता रहता है। सच्चे दोस्त की यही पहचान है। 

कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
विपति कसौटी जे कसे तेई सांचे मीत।।

अर्थात् संपत्ति रहने पर लोग अपने सगे संबंधी अनेक प्रकार से खोज कर बन जाते हैं। लेकिन विपत्ति संकट के समय जो साथ देता है वही सच्चा मित्र संबंधी है।

ये रहीम दर -दर फिरहि, मांगि मधुकरी खाहिं।
यारो-यारी छोड़िये, वे रहीम अब नाहिं ।।

अर्थात् अब रहीम दर-दर फिर रहा है और भीख मांगकर खा रहा है। अब दोस्तों ने भी दोस्ती छोड़ दिया है और अब वे पुराने रहीम नहीं रहे। गरीब रहीम अब मित्रता नहीं निबाह सकता है।

रहिमन तुम हमसों करी, करी-करी जो तीर।
बाढ़े दिन के मीत हो, गाढ़े दिन रघुबीर ।।

अर्थात् कठिनाई के दिनों में मित्र गायब हो जाते हैं और अच्छे दिन आने पर हाजिर हो जाते हैं। केवल प्रभु ही अच्छे और बुरे दिनों के मित्र रहते हैं। मैं अब अच्छे और बुरे दिनों के मित्रों को पहचान गया हूं।

रीतिकालीन कवि बिहारी ने ब्रज भाषा में दोहों का सृजन किया। उनके काव्य में शांत, हास्य, करुण आदि रसों के भी उदाहरण मिल जाते हैं, किंतु मुख्य रस श्रृंगार ही है। उनके दोहों में मित्रता की सुंदर व्याख्या मिलती है -

जौ चाहत, चटकन घटे, मैलौ होइ न मित्त।
रज राजसु न छुवाइ तौ, नेह-चीकन चित्त ॥ 

अर्थात् यदि आप चाहते हैं कि मित्रता की चटक अर्थात् चमक समाप्त न हो तथा मित्रता स्थायी बनी रहे और उसमें दोष उत्पन्न न हों, तो धन-वैभव का इससे सम्बन्ध न होने दें। धन अथवा किसी अन्य वस्तु का लोभ मित्रता को मलिन कर देता है। मित्र के स्नेह से चिकना मन धनरूपी धूल के स्पर्श से मैला हो जाता है; अत: स्नेह में धन का स्पर्श न होने दें। जिस प्रकार तेल से चिकनी वस्तु धूल के स्पर्श से मैली हो जाती है और उसकी चमक घट जाती है, उसी प्रकार प्रेम से कोमल चित्त; धनरूपी धूल के स्पर्श से दोषयुक्त हो जाता है और मित्रता में कमी आ जाती है।

बुरी बुराई जौ तजे, तौ चितु खरौ डरातु ।
ज्यौं निकलंकु मयंकु लखि, गनैं लोग उतपातु ॥

अर्थात् यदि दुष्ट व्यक्ति सहसा अपनी दुष्टता छोड़कर मित्रवत् अच्छा व्यवहार करने लगे तो उससे चित्त अधिक भयभीत होने लगता है। जैसे चन्द्रमा को कलंकरहित देखकर लोग अमंगलसूचक मानने लगते हैं। तात्पर्य यह है कि जिस प्रकार चन्द्रमा का कलंकरहित होना असम्भव है, उसी प्रकार दुष्ट व्यक्ति का एकाएक दुष्टता त्यागना भी असम्भव है।
वर्तमान समय में जहां अतुकांत कविताएं ख़ूब लिखी जा रही हैं, वहीं अनेक सृजनधर्मी गीत, ग़ज़ल और छंदबद्ध रचनाओं का सृजन कर रहे हैं। ऐसी ही एक बहुआयामी सृजनधर्मी हैं डॉ. (सुश्री) शरद सिंह, जो गद्य के साथ ही पद्य में भी क़लम चला रही हैं। उनके उपन्यास पाठकों को प्रिय हैं तो उनका काव्य भी पसन्द किया जाता है। शरद सिंह के मित्रता संदर्भित कुछ दोहे यहां प्रस्तुत हैं -

सखियां करती थीं सदा, दुख-सुख साझा रोज़।
अब वो सखियां ग़ुम हुईं, मन करता है खोज।।

व्यस्त ज़िंदगी ले गई, सखियों से भी दूर।
इंस्टा पर या फेसबुक, मिलना हुआ ज़रूर।।

गुड्डे-गुड़िया ब्याहना, अब तक हमको याद।
हंसती हम सखियां सभी, होता जब संवाद।।

गूगल पर या ज़ूम पर, होती तो है बात।
लगे अधूरा किन्तु ज्यों, दूल्हा बिना बरात।।

कहते सब हैं - दोस्ती, जोड़े रखती तार।
दशकों गुज़रें या सदी, आती नहीं दरार।।

"शरद"  दोस्त हो या सखी, कभी न छूटे साथ।
भले दूर से ही सही, मिलें दिलों के हाथ।।

दोहों में अपनी अभिव्यक्ति देने में डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' को महारत हासिल है। मित्रता पर उनके कुछ दोहे देखें -

जिस पग पर काँटे चुभें, वहाँ न रखना पैर।
जहाँ एक दिन मित्रता, बाकी दिन हो बैर।।

मतलब की है दोस्ती, मतलब का सब प्यार।
मतलब के ही वास्ते, होती है मनुहार।।

उनसे कैसी मित्रता, जो करते हैं घात।
ऐसे लोगों से बचो, जो करते उत्पात।।

सौ-सौ बार विचारिए, क्या होता है मित्र।
खूब जाँचिए-परखिए, उसका चित्त-चरित्र।।

हँसी-खेल मत समझिए, दुनिया बड़ी विचित्र।
जीवन में है मित्रता, पावन और पवित्र।।

जिसको अपना कह दिया, वो जीवनभर मीत।
सच्ची होनी चाहिए, दिल में उपजी प्रीत।।


     कवि सुशील शर्मा के मित्रता संदर्भित ये चर्चित दोहे भी मित्रता को पारिभाषित करने में सक्षम हैं -

सुख दुख के साथी रहें, बचपन के वो यार।
छिपा छिपाई खेलना, वो गेंदों की मार।

नहीं धर्म अरु जात का, दिखा कभी संयोग।
मित्र सदा मन में बसें, मन से मन का योग।

मित्र कभी लेता नहीं, बस देने की बात।
जिसमें स्वारथ है बसा, मित्र नहीं वह घात।

खुश्बू जैसे दोस्त हैं, महकें चारों ओर।
रिश्तों की इस रात में, मित्र ऊगती भोर।

शब्दों में गाली भरी, मन में बसता प्यार।
मित्र जहाँ भी मिल गए, मन होता गुलजार।

मित्र स्वर्ग की देन हैं , मित्र धरा के रंग।
मित्र सदा मन में बसें, बन जीवन के ढंग।

कृष्ण सुदामा मित्रता ,देती है सन्देश।
ऊँच नीच से दूर हैं, मित्रों के परिवेश।

और अंत में मेरे यानी इस ब्लॉग की लेखिका डॉ. वर्षा सिंह के मित्रता संदर्भित कुछ दोहे यहां प्रस्तुत हैं -

मुंहदेखी की  मित्रता, मुंहदेखी का साथ।
दुख में ऐसे व्यक्ति ही सदा छुड़ायें हाथ।।

कृष्ण-सुदामा की तरह, मित्र न मिलते आज।
चार पलों के कर्ज़ पर, मांगे सौ दिन ब्याज।।

सदा करे जो मित्र के हित में दिल से बात।
मित्र सही "वर्षा" वही, करे न भीतर घात।।

ऊंच-नीच, औकात का नहीं करे जो भेद।
मित्र वही जो मित्र के लिए बहाए स्वेद ।।

निर्भय होकर कर सकें, जिससे मन की बात।
मित्र बने सम्बल सदा दिन हो या हो रात।।

अपने से ज़्यादा रहे जिसे मित्र का ध्यान।
"वर्षा" ऐसे मित्र का करें सदा सम्मान।।

             ------------

#मित्रता #दोहे #दोहाछंद #कबीर #रहीम #तुलसीदास #बिहारी #सुशीलकुमार #शरदसिंह #मयंक #वर्षासिंह #हिन्दीसाहित्य

गुरुवार, जुलाई 16, 2020

डॉ. विद्यावती "मालविका" के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर यूट्यूब वीडियो - डॉ. वर्षा सिंह

डॉ. विद्यावती "मालविका"
प्रिय ब्लॉग पाठकों,
             हिन्दी की वरिष्ठ साहित्यकार, कवयित्री मेरी माताजी डॉ. विद्यावती "मालविका" के व्यक्तित्व, कृतित्व एवं साहित्यिक अवदान पर केंद्रित वीडियो यूट्यूब चैनल "साहित्य सागर" पर कल दिनांक 15.07.2020 को रिलीज़ किया गया है। जिसकी link निम्नलिखित है....
https://youtu.be/CNeoV6EM9Rw

Pinterest पर इस video को निम्नलिखित link पर देखा जा सकता है।
https://pin.it/2VEb9ym

यूट्यूब पर डॉ. विद्यावती "मालविका"

मित्रों, मैं आपको यहां यह भी बताना चाहूंगी कि मेरी माता जी 92 वर्ष की आयु में भी पठन, पाठन, अध्ययन, मनन में सक्रिय हैं। इस वीडियो में उन्होंने अपनी काव्य रचनाओं का सस्वर पाठ भी किया है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि इस वीडियो में माता जी के कृतित्व, व्यक्तित्व पर मेरी अनुजा डॉ. (सुश्री) शरद सिंह ने चर्चा की है।


रविवार, मई 12, 2019

लोकसभा चुनाव.... मैंने भी मतदान किया - डॉ. वर्षा सिंह

डॉ. (सुश्री) शरद सिंह एवं डॉ. वर्षा सिंह

    आज दिनांक 12 मई 2019 को मैंने भी मतदान किया.... सागर लोकसभा क्षेत्र से अपना प्रतिनिधि चुनने और लोकतंत्र के इस महात्यौहार को मनाने के लिए 😊

मंगलवार, अप्रैल 16, 2019

सुधा सावित्री तिवारी स्मृति सम्मान .... डॉ. वर्षा सिंह एवं डॉ. (सुश्री) शरद सिंह सम्मानित



           विगत रविवार दिनांक 14.04.2019 को नौ दिवसीय "श्रीमती सुधा सावित्री तिवारी स्मृति सांस्कृतिक पर्व 2019" के समापन अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में मुझे यानी इस ब्लॉग की लेखिका डॉ. वर्षा सिंह को साहित्य में काव्यात्मक योगदान के लिए "श्रीमती सुधा सावित्री तिवारी स्मृति कवयित्री सम्मान" एवं बहन डॉ. (सुश्री) शरद सिंह को सृजनात्मक गद्य साहित्य सृजन हेतु  "श्रीमती सुधा सावित्री तिवारी स्मृति लेखिका सम्मान" से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर  विधायक सागर नगर माननीय शैलेन्द्र जैन, समाजसेवी श्रीमती अनु शैलेन्द्र जैन, पूर्व विधायक देवरी श्री सुनील जैन, श्रीमती मधु अभय दरे, डॉ. अलका जैन, डॉ. अशोक कुमार तिवारी, डॉ. मुन्ना शुक्ला, डॉ. कविता शुक्ला,भाई उमाकांत मिश्र श्यामलम् सहित नगर के अनेक विद्वतजन उपस्थित थे।



http://yuvapravartak.com/?p=13589

https://www.bhaskar.com/mp/sagar/news/mp-news-all-the-unique-events-organized-in-the-program-focused-on-women-women-working-in-9-different-areas-were-honored-on-the-last-day-090032-4348349.html


बुधवार, नवंबर 28, 2018

I'm voted for Madhya Pradesh Legislative Election 2018


Dr. Varsha Singh

प्रिय मित्रों,
   आज 28 नवम्बर है यानी हमारे मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव मतदान दिवस। मध्यप्रदेश में विधानसभा की 230 सीटों के लिए प्रदेश के 52 जिलों में वोटिंग हो रही है। लोकतंत्र के इस महापर्व में मैंने और बहन डॉ. (सुश्री) शरद सिंह ने भी अपना बहुमूल्य वोट डाल कर प्रदेश के सतत् विकास की कामना की।
प्रस्तुत है मतदाता जागरूकता हेतु लिखी गई मेरी एक रचना ...

चलिये हम मतदान करें
लोकतंत्र का मान करें

चुनने को प्रतिनिधि अपना
जनजागृति का गान करें

कितनी ताकत एक वोट में
हम इसकी  पहचान करें

बहकावे से दूरी रख कर
स्वविवेक का ध्यान करें

हम भारत के वासी "वर्षा"
भारत पर अभिमान करें

         - डॉ. वर्षा सिंह

#ग़ज़लवर्षा

Dr. (Miss) Sharad Singh

Dr. (Miss) Sharad Singh & Dr. Varsha Singh

Dr. (Miss) Sharad Singh

Dr. Varsha Singh

Dr. (Miss) Sharad Singh & Dr. Varsha Singh

रविवार, सितंबर 23, 2018

Congratulations My Sister Dr. (Sushri) Sharad Singh 🌹

सागर गौरव सम्मान डॉ.(सुश्री) शरद सिंह को
 
 विगत  दिनांक 21.09.2018 को सागर शहर की अग्रणी सामाजिक संस्था " विचार " द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय सागर नगर की  प्रतिभाओं के एक भव्य सम्मान समारोह में मेरी बहन डॉ. (सुश्री) शरद सिंह को इस वर्ष से प्रारम्भ किए गए प्रथम " सागर गौरव सम्मान " से सम्मानित किया गया।




 स्थान था मैजेस्टिक प्लाजा, सागर का सभागार .... और शरद को यह सम्मान प्रदान करने वाले सागर शहर की हस्तियों में प्रमुख व्यक्ति थे...  कला गुरु विष्णु पाठक, योग गुरु विष्णु आर्य, पर्यावरणविद आशारानी मलैया, एकता समिति के संस्थापक रशीद भाई और   समाजसेवी, " विचार " संस्था के संस्थापक एवं बिजनेसमैन कपिल मलैया।

Sagar Gourav Samman 2018


केन्द्र शासन के पंडित गोविंद वल्लभ पुरस्कार ,राज्य स्तरीय रामेश्वर गुरू पत्रकारिता सम्मान पुरस्कार, प्रादेशिक वागीश्वरी सम्मान , विजय वर्मा कथा सम्मान आदि अनेक सम्मानों से सम्मानित वरिष्ठ लेखिका डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह द्वारा  लिखित विभिन्न विषयों पर लगभग पचास पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने शोषित, पीड़ित स्त्रियों के पक्ष में अपने लेखन के द्वारा हमेशा आवाज़ उठाई है। बुन्देलखण्ड की बेड़िया स्त्रियों पर केन्द्रित उनकी पुस्तक ‘पिछले पन्ने की औरतें’, महिला बीड़ी श्रमिकों पर केन्द्रित ‘पत्तों में कैद औरतें’ तथा स्त्री विमर्श पुस्तक ‘औरत तीन तस्वीरें’ मनोरमा ईयर बुक में शामिल की जा चुकी हैं। लिव इन रिलेशन पर उनके उपन्यास 'कस्बाई सिमोन' को राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक स्तर के अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनका एक और उपन्यास "पचकौड़ी" राजनैतिक और पत्रकारिता जगत की पर्तों का बारीकी से विश्लेषण करने वाला पठनीय एवं लोकप्रिय उपन्यास है।



   खजुराहो की मूर्तिकला विषय में पीएचडी , सागर की प्रतिष्ठित साहित्यकार, कथालेखिका एवं उपन्यासकार डॉ शरद सिंह वर्तमान में मध्यप्रदेश के सागर नगर में निवास करते हुए स्वतंत्र लेखन के कार्य के साथ नई दिल्ली से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका "सामयिक सरस्वती" में कार्यकारी सम्पादक का दायित्व निभा रहीं हैं एवं पत्र-पत्रिकाओं सहित सोशल मीडिया पर वे लगातार अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं।
Dr. (Sushri) Sharad Singh

वे मानती हैं कि अधिकारों का ज्ञान और साहस ही स्त्रियों को शोषण-मुक्त जीवन दे सकता है। सागर से प्रकाशित होने वाले दैनिक समाचार पत्र "सागर दिनकर" में उनका नियमित कॉलम "चर्चा प्लस" अनेक समसामयिक मुद्दों पर विश्लेषणात्मक लेखन के लिए प्रबुद्ध पाठकों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। इससे पूर्व डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह सागर से ही प्रकाशित होने वाले दैनिक समाचार पत्र "आचरण" में अनेक वर्षों तक "बतकाव" शीर्षक का नियमित कॉलम लेखन कर चुकी हैं।


सोमवार, फ़रवरी 05, 2018

बाबूराव पिंपलापुरे स्मृति व्याख्यानमाला 2018

बाबूराव पिंपलापुरे स्मृति व्याख्यानमाला के बारहवें आयोजन में  "भारतीय विचार और हम" विषय पर सांसद एवं पूर्व राजदूत श्री पवन वर्मा ने अपने विचार साझा किए। जिसमें मैं डॉ. वर्षा सिंह एवं डॉ. (सुश्री) शरद सिंह शामिल हुए। व्याख्यान माला में भारतीय कला संस्कृति से जुड़े प्रख्यात विद्वानों को आमंत्रित कर उनके विचार रखे गए और उनसे संवाद भी हुआ। 

स्थान था रवींद्र भवन, सागर, म.प्र.
तस्वीरें उसी अवसर की...

#PavanK_Varma
#Baburao_Pimplapure