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बुधवार, नवंबर 11, 2020

अमावस पूनम सी उजियार | गीत | डॉ. वर्षा सिंह

प्रिय ब्लॉग पाठकों, आज प्रस्तुत है मेरा यह गीत जिसके माध्यम से मैंने दीपावली पर बुंदेलखंड की सुहागिन स्त्री का चित्रण किया है....

गीत....
अमावस पूनम सी उजियार
            - डॉ. वर्षा सिंह

रोशनी बिखरी आंगन द्वार
   अमावस पूनम सी उजियार
    नए गोरी के साज-सिंगार
    रोशनी बिखरी आंगन द्वार

लक्ष्मी मैया सब सुख देना
मन की भोली चाह कहे
रात दिवाली रहे बरस भर
जगमग कातिक मास रहे

     चढ़ा कर श्रद्धा से फिर फूल
     सुहागिन मांगे सुख-संसार
     रोशनी बिखरी आंगन द्वार

सिर-माथे पर आंचल डाले
हाथों पूजा-थाल लिए
तुलसी चौरे झुक कर रखती
माटी के अनमोल दिए

      आंखों बसा सजन का रूप
      अब तो सांस-सांस त्यौहार
      रोशनी बिखरी आंगन द्वार
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