कवयित्री / शायरा डॉ. वर्षा सिंह
अब तक तो बिताई थी तन्हाई में बारिश। अब की दफा है बरसी शहनाई में बारिश । साजन हैं पास मेरे, दिल भी है ख़ुश मेरा, बीतेगी अब की बार तो पुरवाई में बारिश । 🍁 - डॉ वर्षा सिंह