दस दोहे वसंत पर :
फिर वसंत है ट्रेंड में, हैशटैग में प्रेम
- डॉ. वर्षा सिंह
सबकी अपनी चाहतें, सबके अपने फ्रेम।
फिर वसंत है ट्रेंड में, हैशटैग में प्रेम।।
युवा नहीं पहचानते, सेमल और पलाश।
नेट-चैट पर है टिकी, उनकी सकल तलाश।।
अर्थहीन सम्वाद पर, होता डाटा खर्च।
यूनिक मैसेज के लिए, गूगल करते सर्च।।
कुहरे के संजाल में, धरती थी बेहाल।
शीतलहर भी पूछती, हंस कर पूरा हाल।।
कोरोना के त्रास में, गुज़रा पूरा साल ।
वैक्सीन ले आ गई, आशा भरा गुलाल।।
जंगल हरियाले हुए, बाग हुए रंगीन।
सरसों फूली खेत में, शहर स्वयं में लीन।।
धीरे-धीरे बढ़ रहा, सूरज वाला ताप ।
कानों में पड़ने लगी, फागुन की पदचाप।।
मुक्ति रजाई से मिली, हुई कुनकुनी धूप।
निखरा-निखरा लग रहा, मौसम का यह रूप।।
माघ शुक्ल की पंचमी, प्रकृति करे श्रृंगार ।
वर देती वागीश्वरी, विद्या का उपहार।।
"वर्षा" की शुभकामना, रहें सभी ख़ुशहाल।
अपनेपन का, प्रेम का, मौसम रहे बहाल।।
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