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मंगलवार, अगस्त 25, 2020

मित्रता पर दोहे | डॉ. वर्षा सिंह

प्रिय ब्लॉग पाठकों,    
      मित्रता संंर्दभित मेरे दोहे आज web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 25.08.2020 में प्रकाशित हुए हैं।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं -https://yuvapravartak.com/?p=39863

मित्रता पर दोहे

      - डॉ. वर्षा सिंह


मुंहदेखी की  मित्रता, मुंहदेखी का साथ।

दुख में ऐसे व्यक्ति ही सदा छुड़ायें हाथ।।


कृष्ण-सुदामा की तरह, मित्र न मिलते आज।

चार पलों के कर्ज़ पर, मांगे सौ दिन ब्याज।।


सदा करे जो मित्र के हित में दिल से बात।

मित्र सही "वर्षा" वही, करे न भीतर घात।।


ऊंच-नीच, औकात का नहीं करे जो भेद।

मित्र वही जो मित्र के लिए बहाए स्वेद ।।


निर्भय होकर कर सकें, जिससे मन की बात।

मित्र बने सम्बल सदा दिन हो या हो रात।।


अपने से ज़्यादा रहे जिसे मित्र का ध्यान।

"वर्षा" ऐसे मित्र का करें सदा सम्मान।।

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सोमवार, जून 15, 2020

गीत : अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का स्मरण करते हुए.... - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

प्रिय मित्रों, टेलीविजन और बॉलीवुड जगत में सफलता के झंडे गाड़ने वाले ख्यातिप्राप्त युवा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने मात्र 34 वर्ष की आयु में 14 जून 2020 रविवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आखिर क्यों ?????.... प्रश्न संभवतः अनुत्तरित ही रहें।
    अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का स्मरण करते हुए गीत के माध्यम से मेरी यह अभिव्यक्ति प्रस्तुत है, जिसे web magazine युवाप्रवर्तक ने आज 15 जून के अंक में प्रकाशित किया है।
http://yuvapravartak.com/?p=34968

गीत

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का स्मरण करते हुए....
             - डॉ. वर्षा सिंह

जीवन जीना कठिन बहुत है
सहज मृत्यु का आलिंगन।
हंसना मुश्किल काम नहीं है
मुश्किल दुख का अभिनंदनं।

जग में सबसे बड़ा सत्य यह
मृत्यु सुनिश्चित है सबकी,
आना होगा जब आएगी
उसे बुलाए क्यों अब ही,

सहन धैर्य रख करना होगा
अंतर्मन का हर क्रंदन।

संघर्षों के आगे झुकना
नहीं प्रशंसा योग्य कभी,
डटकर पांव जमाए रखना
समझाती है प्रकृति यही,

हार गया वह जिसने खोया
अपनी सांसों का चंदन।

समय उसी के साथ चला
जो चला समय के साथ सदा,
जो घबरा कर रुका राह में
जीवन उसका हुआ वृथा,

कितने भी हों कष्ट कभी तुम
करना मत जीवन भंजन।

लाखों जन्म बिताने पर ही
मिलता मानव जीवन है,
हंता इसका स्वयं बने तो
मुक्त न होता बंधन है,

त्याग निराशा, आशा के प्रति
करते रहो सदा चिंतन।
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       21 जनवरी 1986 को पटना में जन्में सुशांत सिंह राजपूत हिन्दी फिल्मों में अभिनेता होने के साथ -साथ थियेटर और टीवी अभिनेता भी थे। ज़ी टीवी पर प्रसारित  ‘पवित्र रिश्ता’ सीरियल की बदौलत राजपूत को काफी लोकप्रियता मिली थी।उन्‍‍‍‍‍‍‍‍होंने भारतीय किक्रेटर एम एस धोनी पर बनी बायोपिक में भी उनका किरदार निभाया था। काय पो चे, शुद्ध देसी रोमांस, छिछोरे, केदारनाथ आदि उनकी लोकप्रिय फिल्में हैं।

#युवाप्रवर्तक
#SushantNoMore
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शुक्रवार, जून 05, 2020

विश्व पर्यावरण दिवस पर दस दोहे - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh
मेरे प्रिय ब्लॉग मित्रों, विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🌿🌳🌏💖💛🍀🌴
कृपया पढ़िए वेब मैगज़ीन "युवाप्रवर्तक" में आज दि. 05.06.2020 को प्रकाशित मेरे दस दोहे पर्यावरण पर ...
http://yuvapravartak.com/?p=34353

विश्व पर्यावरण दिवस पर दस दोहे
 
     -  डॉ. वर्षा सिंह

मत भूलो अनलॉक में, लॉकडाउन के लाभ।
स्वच्छ हुआ पर्यावरण, धरा हुई हरिताभ ।।

हम यदि रहें सचेत तो, रहे प्रदूषण दूर।
हमें सुनाई दे सदा, नदियों का संतूर।।

हर्रा, नीम, करंज में, औषधि है भरपूर।
इनके लाभों से सभी, अवगत रहें जरूर।।

पेड़ कटेंगे रोज़ तो, कहां बनेंगे नीड़।
कलरव ना सुन पाएगी, तब ये मानव भीड़।।

मौसम में बदलाव का, मानव जिम्मेदार।
जंगल को छोटा किया, किया शहर विस्तार।।

धुंआ, धूल और गंदगी के समझें नुकसान।
अच्छी आदत डाल के, करें सुरक्षित जान।।

निरा स्वार्थ में डूब कर, जग को रहे बिसार।
जब जग ही मिट जाएगा, व्यर्थ सकल व्यापार।।

धरती तपती जा रही, पिघल रहे हिम शैल।
यह संकट हम रोक लें, और न जाए फैल।।

समय अभी भी शेष है, जो हम जाएं चेत।
वरना कृत्रिम खाद से, सूने होंगे खेत ।।

पर्यावरण सुधार का, प्रण कर लें हम आज।
"वर्षा", जाड़ा, गर्मियां, बदलेंगी अंदाज़।।

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विश्व पर्यावरण दिवस ... दस दोहे - डॉ. वर्षा सिंह


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शनिवार, अप्रैल 11, 2020

लॉकडाउन संदर्भित बुंदेली गीत ... बाहर कहूं ने जइयो - डॉ. वर्षा सिंह

 
Dr. Varsha Singh

  टोटल लॉकडाउन के दौरान सागर नगर  में भी कल दिनांक 10.04.2020 को कोरोना वायरस संक्रमण का पहला पॉज़ीटिव केस मिलने संदर्भित समाचार पर बुंदेली बोली में मेरी गीतात्मक अभिव्यक्ति ...

बाहर कहूं ने जइयो
        - डॉ. वर्षा सिंह

घर के भीतर रहियो
बाहर कहूं ने जइयो
कोरोना बैरी हत्यारो
औरन को समझइयो

इते सागरे आओ करोना
कृष्णगंज थो अड्डा
शनीचरी भई क्वारैंटाइन
लगे बजरिया तिगड्डा
हिम्मत राखे रहियो
बाहर कहूं ने जइयो

डिस्टेंसिंग ने राखी देखो
जो परिणाम भओ है
सागर पूरो लॉकडाउन है
मुस्किल में पर गओ है
सम्हर तनक तो जइयो
बाहर कहूं ने जइयो

लॉकडाउन को मतलब समझो
नांय, मांय की छोड़ो
दूरई-दूर निभाओ रिस्ता
जी से नाता जोड़ो
भागमभाग ने करियो
बाहर कहूं ने जइयो

अपनो सागर न्यारो सागर
काज नियम से करियो
दूर राखने हमें करोना
गांठ बांध जा लइयो
"वर्षा"- बिनती सुनियो
बाहर कहूं ने जइयो

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जी हां, मेरी यह ताज़ा बुंदेली रचना आज web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 11.04.2020 में  प्रकाशित हुई है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=28791