जीवन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
जीवन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, नवंबर 07, 2020

जीवन | गीत | डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

गीत
      जीवन
          - डॉ. वर्षा सिंह

हंसी-खुशी, दुख-आंसू तब तक
जब तक भी यह जीवन है ।।
फिर अनंत तक का सफर अनवरत
टूटा हर एक बंधन है ।।

तिरस्कार, उपहास, मान के
सारे किस्से बेमानी
गागर सागर में डूबी तो
मिलता पानी से पानी

भुला हक़ीक़त मानव का मन 
करता रहता नर्तन है ।।

साथ समय के नाम-ख्याति सब 
भुला दिए जाते हैं 
नई-नई घटनाएं लेकर 
दिवस-वर्ष आते हैं

इस दुनिया की फ़ितरत सबको 
भाता जो भी नूतन है ।।

आपस में संग्राम किस लिए 
राग-द्वेष सब व्यर्थ यहां 
हर पल धुंधले होते दर्पण 
खो देते हैं अर्थ है यहां 

जब तक "वर्षा" की रिमझिम है 
तब तक भादों,सावन है ।।
       --------
#गीतवर्षा #गीत #जीवन #सावन #सागर #रिमझिम #दर्पण

मंगलवार, मार्च 12, 2019

ग़ज़ल .... जीवन - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

प्रिय मित्रों,
       मेरी ग़ज़ल को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 12 मार्च 2019 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏

yuvapravartak.com/?p=11692

कृपया पत्रिका में मेरी ग़ज़ल पढ़ने हेतु इस Link पर जायें....

जीवन  इतना  भी  नहीं  दहे।
जितना हम जलता समझ रहे।

उच्छ्वास भरो उत्साहित हो,
क्यों अंतरतम हर घुटन गहे।

सूरज न रुका है इसीलिये,
जग व्यर्थ न ज़्यादा तिमिर सहे।

दरिया सदैव गतिमान बना,
जलधार निरन्तर यहां बहे।

जीवन इतना भी कठिन नहीं,
"वर्षा" हर पल मन यही कहे
            - डॉ. वर्षा सिंह
yuvapravartak.com/?p=11692


बुधवार, अक्टूबर 24, 2018

गीत ... सृजन - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

जीवन का जब छंद नया बन जाएगा
प्राणवान हो अमृत रस छलकायेगा
सृजन हमारा तभी रंग ला पायेगा

भाषा केवल संप्रेषण तक रह नहीं रहे
भावों की सरिता बनकर निर्बाध बहे
रूप, बिंब, संदर्भ, अर्थ सब नूतन हों
शब्द-शब्द विस्तारित हो आल्हाद गहे
विषय वस्तु और कथ्य नया ले आएगा
सृजन हमारा तभी रंग ला पायेगा

सिर्फ कल्पना ही हावी ना हो पाए
सच के नव आयामों से भी सज जाए
स्वयं बढ़े दृढ़ता से मुश्किल राहों पर
विचलन से बचने का गुर भी सिखलाए
प्रासंगिकता लेकर सबको भायेगा
सृजन हमारा तभी रंग ला पाएगा

मनोराग के साथ बुद्धि का संगम हो
प्रगतिशीलता की भी उसमें सरगम हो
अनुभव से वैचारिकता को पुष्टि मिले
लेखन मावस नहीं, वरन् वह पूनम हो
जीवन में नव दृष्टि, नयापन लाएगा
सृजन हमारा तभी रंग ला पाएगा

जीवन का जब छंद नया बन जाएगा
प्राणवान हो अमृत रस छलकायेगा
सृजन हमारा तभी रंग ला पायेगा