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| Dr. Varsha Singh with her mother Dr. Vidyawati 'Malvika' |
दस दोहे वृद्धजन पर
- डॉ वर्षा सिंह
वृद्धों की सेवा करें, वृद्धों का सम्मान ।
उनके आशीर्वाद से, मिलता हमको मान ।।
बड़े-बुज़ुर्गों के लिए, रखिए निर्मल भाव ।
जीवन के हर मोड़ पर, दिखता सुखद प्रभाव ।।
ऐसे भी हैं वृद्धजन, जग में जो असहाय ।
उनसे नाता जोड़ कर, उनके बनें सहाय ।।
याद रखें जो हैं युवा, आयुवृद्धि अनिवार्य ।
कर पाएंगे वृद्ध हो, तिरस्कार स्वीकार्य ?
दर्पण को रख सामने, देखें ख़ुद का अक़्स ।
जो भीतर है क्या वही, बाहर भी है शख़्स ?
बड़े-बुज़ुर्गों के लिए, मन में श्रद्धाभाव ।
कभी न उनसे कीजिए, जीवनभर अलगाव ।।
वृद्धावस्था रुग्णता, कर देती लाचार।
किन्तु नम्र व्यवहार से, दें उनको उपहार।।
सहज न कलियुग में मिलें, ऐसे श्रवणकुमार ।
मातु-पिता हित हेतु जो, त्यागें सुख-संसार ।।
करुणा, मानवता, दया, आदर औ' सत्कार ।
पाई मानव देह तो, मुक्तहस्त उपकार ।।
अपने हों या ग़ैर हों, करिए सदा प्रणाम ।
मातु-पिता-चरणों तले, "वर्षा" चारों धाम ।।
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