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मंगलवार, जनवरी 12, 2021

बर्ड फ्लू | एक प्रार्थना | रोगमुक्त हों जीव | दस दोहे | डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

प्रिय ब्लॉग पाठकों,

कोरोना से अभी हम मनुष्यों को निज़ात नहीं मिल पाई है और बर्ड फ्लू यानी पक्षियों में इन्फ्लूएंजा वायरस से होने वाली बीमारी के समाचार लगातार आने लगे हैं। प्रस्तुत हैं इसी संदर्भ में प्रार्थना स्वरूप मेरे दस दोहे -


रोगमुक्त हों जीव

- डॉ. वर्षा सिंह


रोग - संक्रमण से भरा, आया कैसा दौर ।

पक्षी बिन सूना लगे, वन, उपवन, हर ठौर ।।1।।


चिन्तन, सोच-विचार कर, करें इस तरह यत्न।

संकट से हों मुक्त सब, जग के पक्षी- रत्न ।।2।।


हम मानव इस हेतु यदि, मिल-जुल कर हों एक।

कर पाएंगे हम तभी, नवयुग का अभिषेक ।।3।।


काक, गरुड़, शुक, क्रौंच की, कथा सुनाते ग्रंथ।

पक्षी हो कर भी हमें, दिखलाते ये पंथ ।।4।।


कोयल का सुन स्वर मधुर, मन आनंदित होए ।

"पियू" पपीहा जब रटे, विरही मन में रोए।।5।।


मैना, गौरया जहां, बुलबुल गीत सुनाए ।

छांह सुखों की हो वहां, पास नहीं दुख आए ।।6।।


नीलकंठ-दर्शन मिलें, दिवस सार्थक होए ।

मिले स्वाति-जल, तृप्ति से, चातक खुशियां बोए ।।7।।


पिंजरे में रखना नहीं, पक्षी को कर बंद ।

छिन्न- भिन्न हो जाएगा, जीवन का हर छंद ।।8।।


लुप्त न हों संसार से, पक्षी चहकें डाल ।

उड़ें गगन में पंख ले, नीले, पीले, लाल ।।9।।


"वर्षा" की यह प्रार्थना, रोगमुक्त हों जीव ।

मानव के शुभकर्म सब, हों साकार, सजीव ।।10।।

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शनिवार, मार्च 21, 2020

बारह दोहे कोरोना से जंग पर ..... "जनता कर्फ्यू" - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh
    हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर स्वयं, परिवार, समाज और देश के हित में आज हम सब भारतवासी कोरोना वायरस के विरुद्ध जंग में शामिल हो कर "जनता कर्फ्यू " का स्वेच्छा से पालन कर रहे हैं ... तो पढ़िए मेरे बारह दोहे जिन्हें web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 22 मार्च 2020 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏

बारह दोहे कोरोना से जंग पर

"जनता कर्फ्यू"
                    - डॉ. वर्षा सिंह

कोरोना समझे नहीं, रंग, धरम ना जात।
मिल कर लें संकल्प हम, देनी होगी मात।।1।।

कोरोना की आपदा, मनुज रहा है झेल ।
रहें एकजुट हम अगर, यह भी होगा फेल।।2।।

सार्स, इबोला से नहीं ,घबराया इंसान।
कोरोना के घात का, हमको है संज्ञान।।3।।

शहर, देश, दुनिया सभी पर संकट की छांव।
बच कर स्वयं, बचाइए, अपनी बस्ती-गांव।।4।।

बहुत बुरा यह संक्रमण, इतना लीजे जान।
टीका इसका है नहीं, जा सकती है जान ।।5।।

मानव हैं हम, ये सदा हमें रहेगा भान।
करना हमें सदैव है नए-नए संधान।।6।।

कोरोना का भी कभी निकलेगा कुछ तोड़।
वर्तमान में दीजिए सभी बुराई छोड़।।7।।

"जनता कर्फ्यू" में निहित, सबके हित की बात।
इसी तरह दे पायेंगे, कोरोना को मात ।।8।।

वहां सुरक्षित हैं सभी, जहां सतर्क इंसान।
दूर भ्रमों से रह करें सच्चाई का भान ।।9।।

दूरी रखिए आपसी, नहीं घूमने जाएं ।
पालन वह सब कीजिए, जो पी.एम. समझाएं।।10।।

भय मन में मत पालिए, किन्तु न निर्भय होंए ।
सैनेटाइजर से सदा हाथों को मल धोंए ।।11।।

"वर्षा" भारत भूमि पर दिन यह बाइस मार्च।
जग को पथ दिखला रहा, बन कर जलती टार्च ।।12।।
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मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=26946