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सोमवार, मई 13, 2019

ग़ज़ल ... वह मेरी छोटी सी मेज - डॉ. वर्षा सिंह


Dr. Varsha Singh


कितने राज़ छुपाये रहती, वह मेरी छोटी सी मेज।
मुझको सखी-सहेली लगती, वह मेरी छोटी सी मेज।

उसके भीतर आजू-बाजू, चार दराज़ें सिमटी थीं
जिनमें मेरा गोपन रखती, वह मेरी छोटी सी मेज।

वर्षों बीत गए जब मां ने इक दिन मुझको डांटा था
मेरे सारे आंसू गिनती, वह मेरी छोटी सी मेज।

पहला प्रेम पत्र जब लिख्खा, लिख- लिख फाड़ा कितनी बार
मेरे पशोपेश सब सहती, वह मेरी छोटी सी मेज।

अब पीछे वाले कमरे में, इक कोने में रहती है
स्मृतियों का हिस्सा बनती, वह मेरी छोटी सी मेज।

"वर्षा" मोबाइल ने छीना, "मसि-कागद'' पर लेखन को,
कुछ भी नहीं किसी से कहती, वह मेरी छोटी सी मेज।

                                 - डॉ. वर्षा सिंह

ग़ज़ल - डॉ. वर्षा सिंह # ग़ज़लयात्रा

सोमवार, फ़रवरी 05, 2018

बाबूराव पिंपलापुरे स्मृति व्याख्यानमाला 2018

बाबूराव पिंपलापुरे स्मृति व्याख्यानमाला के बारहवें आयोजन में  "भारतीय विचार और हम" विषय पर सांसद एवं पूर्व राजदूत श्री पवन वर्मा ने अपने विचार साझा किए। जिसमें मैं डॉ. वर्षा सिंह एवं डॉ. (सुश्री) शरद सिंह शामिल हुए। व्याख्यान माला में भारतीय कला संस्कृति से जुड़े प्रख्यात विद्वानों को आमंत्रित कर उनके विचार रखे गए और उनसे संवाद भी हुआ। 

स्थान था रवींद्र भवन, सागर, म.प्र.
तस्वीरें उसी अवसर की...

#PavanK_Varma
#Baburao_Pimplapure