स्वर्गीय माता जी डॉ. विद्यावती "मालविका" की स्मृतियों को हृदय की गहराइयों से नमन
😥😥😥😥
छोड़ गईं मां हमें अकेला...
दीपक जल कर फैलाता है
यादों का उजियाला
मां ने किस ममता से हमको
संघर्षों में पाला
लगा हुआ है जग का मेला
छोड़ गईं मां हमें अकेला
पल-पल भारी सी लगती है
आज कठिन यह दुख की बेला
भूख-प्यास सब गायब जैसे
भाता नहीं निवाला
माना यह दुनिया है फानी
सबकी लगभग एक कहानी
किन्तु ये मन है नहीं मानता
सुनना चाहे मां की बानी
आएं कितनी "वर्षा" ऋतुएं
बुझे न मन की ज्वाला
🙏 😥 डॉ. वर्षा सिंह
