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रविवार, मई 03, 2020

लॉकडाउन 3.0 संदर्भित बुंदेली गीत... कोरोना को नाग बिषैलो - डॉ. वर्षा सिंह


 
Dr. Varsha Singh

     लॉकडाउन 3.0 कल यानी 04 मई से दो सप्ताह के लिए शुरू हो रहा है... तो लॉकडाउन के इस तीसरे चरण के संदर्भ में प्रस्तुत है मेरा यह बुंदेली गीत...

कोरोना को नाग बिषैलो
        - डॉ. वर्षा सिंह

इकनी, दुकनी, तिरका तीन।
लॉकडाउन की बज रई बीन।

कोरोना को नाग बिषैलो,
ईको फन ऐसो है फैलो,
कोऊ निकट ने आ-जा पा रऔ
दूरई से सब बोलत 'हैलो',

तारा डार घरे सब बैठे,
घुम-घुमाई लई सब छीन।
लॉकडाउन की बज रई बीन...

सूनी गलियां, सूनी बस्ती
एकई जैसे सांझ-सकारे,
कुल्ल दिना होबे खों आए
घर के भीतर पलका पारे,

टीवी, पेपर, मोबाईल पे
कोरोना के मुदके सीन।
लॉकडाउन की बज रई बीन...

जैसोे बखत कटो है अब लौं
ऊंसई आंगे कट जैैहे जो,
धीरज धरने परहे भारी
कब लौं लॉकडाउन रैहे जो,

"वर्षा" सोस-फिकर नई करने,
रहियो राम - नाम में लीन।
लॉकडाउन की बज रई बीन...

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     इसे आज दिनांक 03.05.2020 के अंक में प्रकाशित करने हेतु युवाप्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=31267








रविवार, अप्रैल 12, 2020

लॉकडाउन संदर्भित बुंदेली गीत ... समझो भैया, कछू तो समझो - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

           21 दिन वाले लॉकडाउन के 19 वें दिन आज यह कयास लगाया जा रहा है कि लॉकडाउन की अवधि आगे बढ़ाई जा सकती है... इसके कारण की पड़ताल करते हुए मेरी यह बुंदेली रचना पर भी कृपया गौर फरमाएं....

समझो भैया, कछू तो समझो
       - डॉ. वर्षा सिंह

ई परमेसुर घुमाघुमाई
लाकडाउन ईने बढ़वाई
खूबई सबने भीड़ लगाई
तनकउ बात समझ ने आई

हमने कई थी घरई में रहियो
कहूं बाहरे अबै ने जइयो
काज उपद्री कछु ने करियो
दूरी बना-बना के रखियो
तनक ने छोड़ी ढीठ-ढिठाई
तनकउ बात समझ ने आई

मास्क पहरबे में सरमाये
खुद बहके सबको बहकाये
अब देखो, जो भओ नतीजो
कोरोना के फेर में आये
अब काहे खों देत दुहाई
तनकउ बात समझ ने आई

मोदी जी की बात ने मानी
कर लई खूबई जे मनमानी
मम्मा जू शिवराज की बतियां
हंसी-ठिठोली में बिसरानी
मरघट खों अब भई बिदाई
तनकउ बात समझ ने आई

"वर्षा" ने भी समझा लओ है
हाथ जोड़ सबरो कै दओ है
समझो भैया, कछू तो समझो
जी खों टंटा, रोग नओ है
तुमे समझ में काए ने आई
तनकउ बात समझ ने आई

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मेरी यह ताज़ा बुंदेली रचना आज web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 12.04.2020 में  प्रकाशित हुई है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=28886



रविवार, जुलाई 14, 2019

मेहा में भींजे चुनरिया - डॉ. वर्षा सिंह


Dr. Varsha Singh
   
      यह है मेरे द्वारा ली गई फोटो ... और एक प्यारा सा बुंदेली लोकगीत...रविवार की इस दोपहरी में आप सबके लिए.... 😊

गोरी धना, मेहा में भींजे चुनरिया
मेहा में भींजे चुनरिया...
उड़त -घुमड़त आई बदरिया
चमचम चमकी बिजुरिया
गोरी धना, मेहा में भींजे चुनरिया...
पातन लागे बेला-चमेली
पातन लागी चंदनिया
गोरी धना, मेहा में भींजे चुनरिया...
फूलन लागे बेला-चमेली
फूलन लागी चंदनिया
गोरी धना, मेहा में भींजे चुनरिया...
रिमझिम-रिमझिम बुंदियां बरसें
मनवा पे छाए संवरिया
गोरी धना, मेहा में भींजे चुनरिया...
गोरी की सज गई सूनी अटरिया
दूर कहुं बाजे बंसुरिया
गोरी धना, मेघा में भींजे चुनरिया...

#बुंदेलीवर्षा

Photo by Dr. Varsha Singh

Photo by Dr. Varsha Singh

Photo by Dr. Varsha Singh

Photo by Dr. Varsha Singh