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बुधवार, अप्रैल 22, 2020

🌎 पृथ्वी दिवस यानी Earth Day पर 🌍 शुभकामनाएं 🌏

Dr. Varsha Singh

      आज Earth Day है  🌏
      ... और अपनी इस 'Earth' पर कोरोना वायरस के 'अनर्थ' के बादल छाए हुए हैं। तो आईए हम संकल्प लें कि लॉकडाउन के नियमों का पालन कर हम बचे रहेंगे और पर्यावरण संरक्षण नियमों का पालन कर बचाए रहेंगे अपनी धरती यानी Mother Earth को 😊
अर्थ डे यानी पृथ्वी दिवस एक वार्षिक इवेंट है जिसे दुनियाभर में आज यानी की 22 अप्रैल को पर्यावरण संरक्षण के लिए मनाया जाता है. इसे पहली बार साल 1970 में मनाया गया था. इस साल पृथ्वी दिवस के 50 साल पूरे हो रहे हैं जहां इसका थीम 'क्लाइमेट एक्शन' रखा गया है. पर्यावरण की सुरक्षा के लिए "पृथ्वी दिवस या अर्थ डे" मनाया जाता है. इस आंदोलन को यह नाम जुलियन कोनिग द्वारा सन् 1969 को दिया था. इसके साथ ही इसे सेलिब्रेट करने के लिए अप्रैल की 22 तारीख चुनी गई.
       इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को पृथ्वी और पर्यावरण के संरक्षण हेतु जागरूक करना है। आधुनिक काल में जिस तरह से मृदा अपरदन हो रहा है, ग्लेशियर पिघल रहे हैं, ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रहा है और प्रदूषण फ़ैल रहा है, इनसे पृथ्वी का ह्वास हो रहा है। ऐसी स्थति में पृथ्वी की गुणवत्ता, उर्वरकता और महत्ता को बनाए रखने के लिए हमें पर्यावरण और पृथ्वी को सुरक्षित रखने की जरूरत है। इन महत्वकांक्षी उद्देश्यों को पूरा करने हेतु हर साल 22 अप्रैल पृथ्वी दिवस मनाया जाता है।
 


Earth Day 22 April 2020


          इस वर्ष वर्तमान समय में कोरोना वायरस  के चलते पूरे देश में लॉकडाउन है। हम सभी जानते हैं कि लॉकडाउन का अर्थ है तालाबंदी । लॉकडाउन एक आपातकालीन व्यवस्था है जो किसी आपदा या महामारी के वक्त लागू की जाती है। जिस इलाके में लॉकडाउन किया गया है उस क्षेत्र के लोगों को घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती है। उन्हें सिर्फ दवा और खाने-पीने जैसी जरूरी चीजों की खरीदारी के लिए ही बाहर आने की इजाजत मिलती है, इस दौरान वे बैंक से पैसे निकालने भी जा सकते हैं.जिस तरह किसी संस्थान या फैक्ट्री को बंद किया जाता है और वहां तालाबंदी हो जाती है उसी तरह लॉक डाउन का अर्थ है कि आप अनावश्यक कार्य के लिए सड़कों पर ना निकलें। अगर लॉकडाउन की वजह से किसी तरह की परेशानी हो तो आप संबंधित पुलिस थाने, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक अथवा अन्य उच्च अधिकारी को फोन कर सकते हैं। लॉकडाउन जनता की सहूलियत और सुरक्षा के लिए किया जाता है.सभी प्राइवेट और कॉन्ट्रेक्ट वाले दफ्तर बंद रहते हैं, सरकारी दफ्तर जो जरूरी श्रेणी में नहीं आते, वो भी बंद रहते हैं।
       लॉकडाउन कोरोना की जंग से जीतने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी काफी अहम साबित हो रहा है। इन दिनों हवा एकदम साफ हो गई है, लॉकडाउन खुलने के बाद भी इस समय का अध्ययन भविष्य में प्रदूषण नियंत्रण की राह तैयार करेगा। करीब तीन सप्ताह से चल रहे लॉकडाउन से समूची पृथ्वी पर पर्यावरण में व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिला है। पेट्रोल और डीजल चालित वाहन बंद होने से हवा की गुणवत्ता ही नहीं सुधरी बल्कि औद्योगिक इकाइयां बंद होने से नदियों के पानी भी काफी साफ दिखाई दे रहा है। हर स्तर के आयोजन बंद होने और जनता के भी घरों में ही रहने के कारण ध्वनि प्रदूषण के स्तर तक में खासी गिरावट दर्ज की गई है। इस बदलाव पर तमाम अध्ययन भी किए जा रहे हैं।
    पृथ्वी दिवस पर यह तथ्य विचारणीय है कि भविष्य में हमें पृथ्वी पर प्रदूषण रोकने की दिशा में सार्थक कार्य करने होंगे।

Earth Day

शनिवार, मार्च 28, 2020

कोरोना के विरुद्ध ... डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

      दैनिक भास्कर, सागर संस्करण ने आज 28 मार्च 2020 के अंक में प्रश्न उठाया है कि.... "अपने शहर और देश के साथ कलम के सिपाही भी इन दिनों लॉकडाउन में हैं। लेकिन क्या उनकी कलम भी लॉक हो गई है?" और फिर उत्तर के रूप में प्रकाशित किए हैं सागर के प्रमुख साहित्यकारों की अभिव्यक्ति के अंश। जी हां, बहन डॉ. शरद सिंह की ग़ज़ल के शेर और मेरे भी दोहे को शामिल किया गया है इसमें....
हार्दिक आभार दैनिक भास्कर 🙏





#StayHome
#Corona
#Lockdown

शनिवार, मार्च 21, 2020

बारह दोहे कोरोना से जंग पर ..... "जनता कर्फ्यू" - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh
    हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर स्वयं, परिवार, समाज और देश के हित में आज हम सब भारतवासी कोरोना वायरस के विरुद्ध जंग में शामिल हो कर "जनता कर्फ्यू " का स्वेच्छा से पालन कर रहे हैं ... तो पढ़िए मेरे बारह दोहे जिन्हें web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 22 मार्च 2020 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏

बारह दोहे कोरोना से जंग पर

"जनता कर्फ्यू"
                    - डॉ. वर्षा सिंह

कोरोना समझे नहीं, रंग, धरम ना जात।
मिल कर लें संकल्प हम, देनी होगी मात।।1।।

कोरोना की आपदा, मनुज रहा है झेल ।
रहें एकजुट हम अगर, यह भी होगा फेल।।2।।

सार्स, इबोला से नहीं ,घबराया इंसान।
कोरोना के घात का, हमको है संज्ञान।।3।।

शहर, देश, दुनिया सभी पर संकट की छांव।
बच कर स्वयं, बचाइए, अपनी बस्ती-गांव।।4।।

बहुत बुरा यह संक्रमण, इतना लीजे जान।
टीका इसका है नहीं, जा सकती है जान ।।5।।

मानव हैं हम, ये सदा हमें रहेगा भान।
करना हमें सदैव है नए-नए संधान।।6।।

कोरोना का भी कभी निकलेगा कुछ तोड़।
वर्तमान में दीजिए सभी बुराई छोड़।।7।।

"जनता कर्फ्यू" में निहित, सबके हित की बात।
इसी तरह दे पायेंगे, कोरोना को मात ।।8।।

वहां सुरक्षित हैं सभी, जहां सतर्क इंसान।
दूर भ्रमों से रह करें सच्चाई का भान ।।9।।

दूरी रखिए आपसी, नहीं घूमने जाएं ।
पालन वह सब कीजिए, जो पी.एम. समझाएं।।10।।

भय मन में मत पालिए, किन्तु न निर्भय होंए ।
सैनेटाइजर से सदा हाथों को मल धोंए ।।11।।

"वर्षा" भारत भूमि पर दिन यह बाइस मार्च।
जग को पथ दिखला रहा, बन कर जलती टार्च ।।12।।
            ----------------
   
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=26946



मंगलवार, फ़रवरी 04, 2020

कुछ और दोहे वसंत के -डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

मौसम ने छेड़ा यहां, फिर वासंती राग।
फूलों का मेला लगा, झूम उठे हैं  बाग़ ।।1।।

मौसम ने जादू किया, ख़्वाब गए सब जाग।
हवा संदेशा ला रही, अब आएगा फाग ।।2।।

दिनदूना फिर से बढ़े, आपस में अनुराग।
प्रेमभाव फूले-फले, बैर-बुराई त्याग ।। 3।।

संगम के अवदान से, जो पवित्र भू-भाग।
वही इलाहाबाद है, बेशक वही प्रयाग ।।4 ।।

अमुआ बौराने लगा, भूल गया बैराग।
रातें छोटी हो चलीं, खुले दिवस के भाग ।।5।।

सरसों बांधे खेत को, सुख की पीली पाग
बिखरा ख़ुशियों से भरा, चारों ओर पराग ।।6।।

चढ़ ऊंची मुंडेर पर, बोल रहा है काग।
फागुन पाहुन आएगा, शीत जाएगी भाग।। 7।।

सबकी अपनी किस्मतें, सबके अपने भाग।
बाती की पीड़ा कहां समझे कभी चिराग़ ।।8।।

दिन दूना बढ़ने लगे, रंगों के अनुभाग ।
लेखे-जोखे के लिए, खोले नये विभाग ।।9।।

प्रेम-प्यार ऐसा बढ़े, बुझे द्वेष की आग ।
"वर्षा" की है ये दुआ, धुलें क्लेश के दाग़ ।। 10 ।।

                       -डॉ. वर्षा सिंह
         
     










     

बुधवार, नवंबर 06, 2019

"शख़्सियत" में मैं यानी डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

    जांजगीर, छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय एवं प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र "नवीन क़दम" में प्रकाशित होने वाले कॉलम "शख़्सियत" आज मेरे व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित है। आभारी हूं "नवीन क़दम"की।

"नवीन क़दम", दिनांक 06.11.2019 का अंक


इसे वेबसाइट  https://navinkadam.com/?p=6992 पर भी पढ़ा जा सकता है.....







शख्सियत : डॉ. वर्षा सिंह, देश की प्रतिष्ठित कवयित्री एवं गज़लकार


देश की प्रतिष्ठित कवयित्री एवं ग़ज़लकार डॉ. वर्षा सिंह कोई परिचय की मोहताज नहीं हैं। इन्होंने एमएससी (वनस्पति शास्त्र), बीएड तथा डॉक्टर ऑफ होम्योपैथी एण्ड मेडिसिन की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में ये मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड में अतिरिक्त कार्यालय सहायक श्रेणी-एक के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. वर्षा सिंह के अब तक 5 ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, जिनके नाम ‘सर्वहारा के लिए’, ‘वक़्त पढ़ रहा है’, ‘हम जहां पर हैं’, ‘सच तो ये है’  और ‘दिल बंजारा’ है। इनकी एक आलोचना पुस्तक – ‘हिन्दी ग़ज़ल : ‘दशा और दिशा’ तथा नवसाक्षरों के लिए दो पुस्तकें- ‘पानी है अनमोल’ तथा ‘कामकाजी महिलाओं के सुरक्षा अधिकार’ प्रकाशित हो चुकी है। साथ ही पचास से अधिक समवेत ग़ज़ल संकलनों में ग़ज़लें संकलित हैं।
दैनिक नवीन कदम से विशेष बातचीत के दौरान डॉ. वर्षा सिंह ने बताया कि इन दिनों इनका कॉलम ‘सागर : साहित्य एवं चिंतन’ दैनिक ‘आचरण’ में तथा ‘साहित्य वर्षा’ साप्ताहिक सागर झील में प्रकाशित हो रहा है। आगे बताया कि वे जबलपुर से प्रकाशित अनियतकालीन साहित्यिक पत्रिका ‘परिवर्तन‘ का कार्यकारी संपादन कर चुकी हैं तथा मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल हिन्दी परिषद् (बीना इकाई) की पत्रिका ‘विद्युत पुष्प’ का अतिथि संपादक रह चुकी हैं। इनकी रचनाओं का दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के भोपाल, छतरपुर, सागर केन्द्रों से नियमित प्रसारण होता रहता है तथा वे अनेक अकादमिक साहित्यिक मंचों एवं कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ करती रहती हैं।

चर्चा में आगे बताया कि साहित्य सेवा के लिए इन्हें देश के अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया है, जिनमें मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन सागर द्वारा ‘सुधारानी डालचंद जैन’ सम्मान, बुंदेली लोककला संस्थान झांसी (उत्तरप्रदेश) द्वारा ‘गुरदी देवी स्मृति सम्मान’, केन्द्रीय हिन्दी परिषद् मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल जबलपुर द्वारा ‘विशिष्ट हिन्दी सेवी सम्मान’,  केन्द्रीय हिन्दी परिषद् पाथेय संस्था जबलपुर द्वारा ‘हिन्दी सेवी सम्मान’, प्रगतिशील लेखक संध, पन्ना द्वारा ‘सृजनधर्मी सम्मान’, हिन्दी परिषद् (बीना शाखा) मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल बीना द्वारा ‘हिन्दी शिरोमणि’ सम्मान’,  राजभाषा परिषद् भारतीय स्टेट बैंक सागर शाखा द्वारा  ‘उत्कृष्ट साहित्य सृजनकर्ता सम्मान’, जनपरिषद् भोपाल द्वारा ‘लीडिंग लेडी ऑफ मध्यप्रदेश’ सम्मान, सागर नगर विधायक शैलेन्द्र जैन द्वारा  ‘शक्ति सम्मान’, पत्रिका समाचारपत्र एवं सेंट्रल हीरो सागर द्वारा ‘नारी सशक्तिकरण सम्मान’, हिन्दी लेखिका संघ दमोह द्वारा ‘विशिष्ट हिन्दी सेवी सम्मान’, हिन्दी लेखिका संघ सागर द्वारा ‘विशिष्ट हिन्दी सेवी सम्मान’, दैनिक भास्कर एवं राहगीरी सोशल ग्रुप सागर द्वारा ‘विशिष्ट अतिथि सम्मान’, सागर साहित्य एवं सामाजिक सम्मान समारोह 2013  सागर द्वारा  ‘विशिष्ट हिन्दी सेवी सम्मान’, रोटरी क्लब सागर सेंट्रल सागर द्वारा ‘क्षमावाणी महापर्व सौजन्य सम्मान’, क्षत्रिय समाज सागर द्वारा ‘विशिष्ट सम्मान’,  श्रीमंत सेठ दादा डालचंद जैन की स्मृति में ‘प्रतिभा सम्मान 2018’ एवं सागर टीवी न्यूज द्वारा ‘एक्सीलेंस अवार्ड फॉर क्रिएटर्स 2018’ प्रमुख हैं।
डॉ. वर्षा सिंह ने आगे बताया कि वे गीत, ग़ज़ल, दोहा, अतुकांत कविता साथ ही आलोचना एवं समीक्षा लेख, चिंतन आलेख, ललित  निबंध आदि भी लिखती हैं। इन्होंने बुंदेली में भी पद्य रचनाएं लिखी हैं। उन्होंने कहा कि यूं तो पिछले अनेक वर्ष से मैं हिंदी गजल लिख रही हूं। अभी तक मेरे 5 हिंदी गजल संग्रह प्रकाशित भी हो चुके हैं, किंतु आजीविका की व्यस्तता के चलते नये संग्रह के प्रकाशन में व्यवधान आया, लेकिन लेखन ज़ारी रहा। सोशल मीडिया पर भी सतत रूप से मैं अपनी गजलों देती रही हूं। मेरी ग़ज़लें पर ख्यातनाम समीक्षकों ने समय-समय पर टिप्पणियां की हैं। 

मेरी ग़ज़ल पर टिप्पणी करते हुए कवि एवं साहित्यकार अनिल प्रभाकर कहते हैं कि जनपक्षधरता वर्षा सिंह की खास पहचान है। शायरा का अनुभवसंसार भी व्यापक है, इसलिए इनकी ग़ज़लें सिर्फ आधी आबादी तक ही सीमित नहीं है बल्कि, पूरा समाज है इनकी ग़ज़लों में, पूरी दुनिया और पूरा आसमान है इनकी ग़ज़लों में। नरेंद्र कुमार सिंह ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि  वर्षा सिंह हिंदी गजल विधा की एक चर्चित हस्ताक्षर है और इन दिनों काफी अच्छी हिंदी ग़ज़लें लिख ही नहीं रही हैं। बल्कि, पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से छप भी रही हैं। वर्षा सिंह की प्रत्येक गजल आज की परिस्थिति को यथार्थवादिता के साथ प्रदर्शित करने में सक्षम है। इसी क्रम में ऋषभ देव शर्मा ने अपनी टिप्पणी करते हुए कहा है कि वर्षा सिंह समकालीन हिंदी गजल के क्षेत्र में तेजी से उभरा हुआ हस्ताक्षर हैं। उन्होंने वस्तु और शैली दोनों ही स्तरों पर गजल को समृद्ध बनाया है तथा दुष्यंत कुमार की परंपरा में नई ग़ज़ल भाषा इजाद करने वाली कवयित्री के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त की है। डॉ. वर्षा सिंह का कहना है कि अपने ग़ज़ल लेखन पर उनके खुद के विचार भी हैं, जिसके मुताबिक, हिंदी पद्य साहित्य की एक अनन्यतम मनोहारी छवि वाली विधा बन कर उभरी। इस हिंदी गजल की विधा को अपनाकर मुझे बेहद आत्मसंतोष मिला और लगातार संघर्षरत जीवन जीते हुए चिंतन एवं संवेदनाओं के गहरे तालमेल से जन्मे अपने विचारों को मैंने हिंदी ग़ज़ल के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। इनका मानना है कि पूरी निष्ठा और शिद्दत से कोई भी काम करें तो निश्चित तौर पर कामयाबी मिलती है।
https://navinkadam.com/?p=6992


गुरुवार, अगस्त 08, 2019

गीत... सृजन हमारा - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

       मेरे गीत को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 08 अगस्त 2019 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=17357

गीत

सृजन हमारा ....

                 - डॉ. वर्षा सिंह

जीवन का जब छंद नया बन जाएगा
सृजन हमारा तभी रंग ला पायेगा

भाषा केवल संप्रेषण तक ही नहीं रहे
भावों की सरिता बनकर निर्बाध बहे
रूप, बिंब, संदर्भ, अर्थ सब नूतन हों
शब्द-शब्द विस्तारित हो आल्हाद गहे
 विषय वस्तु और कथ्य नया ले आएगा
सृजन हमारा तभी रंग ला पायेगा

सिर्फ कल्पना ही हावी ना हो पाए
सच के नव आयामों से भी सज जाए
स्वयं बढ़े दृढ़ता से मुश्किल राहों पर
विचलन से बचने का गुर भी सिखलाए
प्रासंगिकता लेकर सबको भायेगा
सृजन हमारा तभी रंग ला पाएगा

मनोराग के साथ बुद्धि का संगम हो प्रगतिशीलता का भी उसमें सरगम हो
अनुभव से वैचारिकता को पुष्टि मिले
लेखन मावस नहीं, वरन् वह पूनम हो
जीवन में नव दृष्टि, नयापन लाएगा
सृजन हमारा तभी रंग ला पाएगा

                ------------
#गीतवर्षा

http://yuvapravartak.com/?p=17357

रविवार, जुलाई 14, 2019

मेहा में भींजे चुनरिया - डॉ. वर्षा सिंह


Dr. Varsha Singh
   
      यह है मेरे द्वारा ली गई फोटो ... और एक प्यारा सा बुंदेली लोकगीत...रविवार की इस दोपहरी में आप सबके लिए.... 😊

गोरी धना, मेहा में भींजे चुनरिया
मेहा में भींजे चुनरिया...
उड़त -घुमड़त आई बदरिया
चमचम चमकी बिजुरिया
गोरी धना, मेहा में भींजे चुनरिया...
पातन लागे बेला-चमेली
पातन लागी चंदनिया
गोरी धना, मेहा में भींजे चुनरिया...
फूलन लागे बेला-चमेली
फूलन लागी चंदनिया
गोरी धना, मेहा में भींजे चुनरिया...
रिमझिम-रिमझिम बुंदियां बरसें
मनवा पे छाए संवरिया
गोरी धना, मेहा में भींजे चुनरिया...
गोरी की सज गई सूनी अटरिया
दूर कहुं बाजे बंसुरिया
गोरी धना, मेघा में भींजे चुनरिया...

#बुंदेलीवर्षा

Photo by Dr. Varsha Singh

Photo by Dr. Varsha Singh

Photo by Dr. Varsha Singh

Photo by Dr. Varsha Singh

शनिवार, जून 15, 2019

पितृ दिवस ( फादर्स डे, रविवार, 16 जून 2019) पर विशेष गीत .... पिता यहीं हैं पास - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh
यह सिर्फ़ एक गीत ही नहीं, वरन् मेरा आत्मकथ्य भी है....

पिता यहीं हैं पास ...

            - डॉ. वर्षा सिंह

हरदम इक अहसास बना सा रहता है।
पिता यहीं हैं पास, हमेशा लगता है ।।

पिता हुए स्वर्गीय, समय प्रतिकूल हुआ,
निपट अकेली मां ने है पाला-पोसा,
बचपन मेरा था कितना संत्रास घिरा,
बिना पिता की छाया के संघर्ष भरा,
किन्तु पिता की छवि ताज़ा हो जाती है
जब तूफान कहीं कोई भी उठता है।
पिता यहीं हैं पास, हमेशा लगता है ।।

कभी -कभी मन किन्तु ये सोचा करता है,
याद पिता को अक्सर करता रहता है,
पिता अगर जीवित होते तो क्या होता !
जैसा अब है, जीवन वैसा ना रहता,
मेरी अपनी दुनिया भी रोशन होती
अंधियारों में एक दिया - सा जलता है।
पिता यहीं हैं पास, हमेशा लगता है ।।

रक्त उन्हीं का रग में मेरी दौड़ रहा,
जिनका तेजस्वी स्वरूप है मुझे मिला,
ईश्वर को मंजूर यही तो बेशक़ ही,
मुझे नियति से कभी न कोई रहा गिला,
किन्तु न उनका होना भी तो खलता है
बन कर जैसे फांस हृदय में चुभता है।
पिता यहीं हैं पास, हमेशा लगता है ।।
      --------------------

मेरे इस गीत को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 16 जून 2019 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...


पितृ दिवस पर गीत - डॉ. वर्षा सिंह


Happy Father's Day

शुक्रवार, जून 07, 2019

😥 क्या हुआ है आज मेरे देश को ... ! 😔


लग रहा संवेदनाएं मर चुकीं
क्या हुआ है आज मेरे देश को।

क्या कहें काली हुई क्यों ये ज़मीं
क्या हुआ है आज मेरे देश को।

बच्चियां भी अब सुरक्षित हैं नहीं
क्या हुआ है आज मेरे देश को।
        - डॉ. वर्षा सिंह


शुक्रवार, मई 31, 2019

ग़ज़ल - कुछ बोल पाते हैं नहीं - डॉ. वर्षा सिंह


Dr.Varsha Singh

        मेरी ग़ज़ल को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 28 मई 2019 में स्थान मिला है। 

युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏

ग़ज़ल
        - डॉ. वर्षा सिंह


सोचते तो हैं मगर, कुछ बोल पाते हैं नहीं।
बंद दरवाज़े हृदय के खोल पाते हैं नहीं।

सच को परदे में रखें, हम ये नहीं कर पायेंगे
झूठ को हम चाशनी में घोल पाते हैं नहीं।

जी-हज़ूरी से रहे हैं दूर कोसों उम्र भर
चाटुकारी के लिए हम डोल पाते हैं नहीं।

हर तरफ बिक्री-खरीदी, हर तरफ मक्कारियां,
कोई भी शै हम यहां, अनमोल पाते हैं नहीं।

कै़द जिनको कर लिया हो ज़िन्दगी ने बेवज़ह,
आखिरी दम तक कभी पैरोल पाते हैं नहीं।

जो न "वर्षा" कर सके अभिनय किसी भी मंच पर,
वक़्त के नाटक में इच्छित रोल पाते हैं नहीं।
                ----------------

यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...



ग़ज़ल- डॉ. वर्षा सिंह


सोमवार, मई 13, 2019

ग़ज़ल ... वह मेरी छोटी सी मेज - डॉ. वर्षा सिंह


Dr. Varsha Singh


कितने राज़ छुपाये रहती, वह मेरी छोटी सी मेज।
मुझको सखी-सहेली लगती, वह मेरी छोटी सी मेज।

उसके भीतर आजू-बाजू, चार दराज़ें सिमटी थीं
जिनमें मेरा गोपन रखती, वह मेरी छोटी सी मेज।

वर्षों बीत गए जब मां ने इक दिन मुझको डांटा था
मेरे सारे आंसू गिनती, वह मेरी छोटी सी मेज।

पहला प्रेम पत्र जब लिख्खा, लिख- लिख फाड़ा कितनी बार
मेरे पशोपेश सब सहती, वह मेरी छोटी सी मेज।

अब पीछे वाले कमरे में, इक कोने में रहती है
स्मृतियों का हिस्सा बनती, वह मेरी छोटी सी मेज।

"वर्षा" मोबाइल ने छीना, "मसि-कागद'' पर लेखन को,
कुछ भी नहीं किसी से कहती, वह मेरी छोटी सी मेज।

                                 - डॉ. वर्षा सिंह

ग़ज़ल - डॉ. वर्षा सिंह # ग़ज़लयात्रा

रविवार, मई 12, 2019

लोकसभा चुनाव.... मैंने भी मतदान किया - डॉ. वर्षा सिंह

डॉ. (सुश्री) शरद सिंह एवं डॉ. वर्षा सिंह

    आज दिनांक 12 मई 2019 को मैंने भी मतदान किया.... सागर लोकसभा क्षेत्र से अपना प्रतिनिधि चुनने और लोकतंत्र के इस महात्यौहार को मनाने के लिए 😊

शनिवार, मई 11, 2019

Happy Mother's Day 2019 मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh


मां से बढ़ कर कौन जगत में !
                     - डॉ. वर्षा सिंह

जब -जब मन बेचैन हुआ है।
तब -तब मां को याद किया है।

मां ने सबको अमृत बांटा,
खुद चुपके से ज़हर पिया है।

जीवन की दुर्गम राहों में,
मां की हरदम मिली दुआ है।

मां से बढ़ कर कौन जगत में !
ईश्वर मां से नहीं बड़ा है।

ममता की  "वर्षा" करती मां,
मां का आंचल सदा भरा है।  

                    --------------   

मंगलवार, मई 07, 2019

बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता केन्द्रित बुंदेली गीत... बचपन न छीनो- छिनाओ - डॉ. वर्षा सिंह


Dr. Varsha Singh

अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
     
   आज अक्षय तृतीया के अवसर पर  बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता केन्द्रित मेरे बुंदेली गीत को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 07 मई 2019 में स्थान मिला है।

युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏

http://yuvapravartak.com/?p=14485

मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...

बचपन न छीनो- छिनाओ
           - डॉ. वर्षा सिंह

बचपन न छीनो- छिनाओ मोरी बिन्ना !
अक्षय तीजा खूबई मनइयो
पुतरा-पुतरियन को ब्याओ रचइयो
नबालिग को ब्याओ न कराओ मोरी बिन्ना!
बचपन न छीनो- छिनाओ मोरी बिन्ना !

खेलत- पढ़त की जोई उमरिया
मूड़े न धरियो भारी गगरिया
अबई से दुलैया न बनाओ मोरी बिन्ना!
बचपन न छीनो - छिनाओ मोरी बिन्ना !

अठरा बरस की मोड़ी हो जैहे
इक्किस को मोड़ा जब मिल जैहे
माथे पे सेहरा बंधाओ मोरी बिन्ना
बचपन न छीनो- छिनाओ मोरी बिन्ना !

बच्चन की शिक्छा-दिक्छा कराओ
जिम्मेदारी को पाठ पढ़ाओ
मड़वा तबई गड़ाओ  मोरी बिन्ना !
बचपन न छीनो - छिनाओ मोरी बिन्ना !

छोटी उमर को ब्याव बुरो है
जिनगी भर को कष्ट बनो है
समझो जा बात समझाओ मोरी बिन्ना!
बचपन न छीनो- छिनाओ मोरी बिन्ना !
            -------------
#बुंदेली वर्षा

http://yuvapravartak.com/?p=14485

सोमवार, अप्रैल 29, 2019

अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस (29.04.2019 ) के अवसर पर विशेष गीत .... नृत्य बिना सूना रहता है - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

सदा सृष्टि में चलता रहता है, ऋतुओं का नर्तन।
नृत्य बिना सूना रहता है प्राणी मात्र का जीवन।

नृत्य सदा परिभाषित करता सुख-दुख के अनुभव को,
अपने सम्मोहन में रखता देव और दानव को,

धरा गगन को बांधे रहता, यह अदृश्य इक बंधन ।
नृत्य बिना सूना रहता है प्राणी मात्र का जीवन।

जड़-चेतन के बीच सेतु की भांति व्यापत रहता है,
नृत्य, जगत के दृश्य-पटल पर इक हलचल रखता है,

मुद्राओं के ताल मेल से खुलते सारे गोपन।
नृत्य बिना सूना रहता है प्राणी मात्र का जीवन।

नृत्य व्यक्त करता है मन की सारी मनोदशा को,
सूर्य, चन्द्रमा से संचालित करता दिवस, निशा को,

शिव का प्रिय, रसिया कान्हा का, नृत्य मर्म का दरपन।
नृत्य बिना सूना रहता है प्राणी मात्र का जीवन।
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       मेरे इस गीत को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 30 अप्रैल 2019 में स्थान मिला है। जो कि अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस (International Dance Day दि. 29.04.2019) पर लिखा गया था।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏

यदि आप चाहें तो पत्रिका में मेरी ग़ज़ल इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...

http://yuvapravartak.com/?p=14174

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मंगलवार, अप्रैल 23, 2019

📚📗📚 Happy World Book Day विश्व पुस्तक दिवस ....📚📖📚

Dr. Varsha Singh


विश्व पुस्तक दिवस (23 अप्रैल 2019) पर विशेष ग़ज़ल
किताबें
                 - डॉ. वर्षा सिंह

दुख- सुख की हैं सखी किताबें।
लगती कितनी  सगी  किताबें।    

जब-जब उभरे घाव हृदय के,
मरहम जैसी लगी किताबें।

असमंजस की स्थितियों में
सदा रहनुमा बनी किताबें।

जीवन की दुर्गम राहों में,
फूलों वाली गली किताबें।

मैं, तुम, सारी दुनिया सोये,
हरदम रहती जगी किताबें।

फ़ुरसत हो तो तुम पढ़ लेना
मैंने भी कुछ लिखी किताबें ।

"वर्षा" की हमसफ़र हमेशा
ख़्वाबों में भी बसी किताबें।

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