आ गए फिर बारिशों के दिन
गगन में
दूर तक बादल
हवायें कर रहीं हलचल
उमड़ती ख़्वाहिशों के दिन
धरा पर
बूंद की रिमझिम
नयी फिर छेड़ती सरगम
गए अब गर्दिशों के दिन
हुए इक
ताल और पोखर
गले मिलते परस्पर
भुला कर रंज़िशों के दिन
🌺 - डॉ. वर्षा सिंह
आ गए फिर बारिशों के दिन
गगन में
दूर तक बादल
हवायें कर रहीं हलचल
उमड़ती ख़्वाहिशों के दिन
धरा पर
बूंद की रिमझिम
नयी फिर छेड़ती सरगम
गए अब गर्दिशों के दिन
हुए इक
ताल और पोखर
गले मिलते परस्पर
भुला कर रंज़िशों के दिन
🌺 - डॉ. वर्षा सिंह
अब तक तो बिताई थी तन्हाई में बारिश।
अब की दफा है बरसी शहनाई में बारिश ।
साजन हैं पास मेरे, दिल भी है ख़ुश मेरा,
बीतेगी अब की बार तो पुरवाई में बारिश ।
🍁 - डॉ वर्षा सिंह