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रविवार, मार्च 28, 2021

होली का त्यौहार | दस दोहे होली के | डाॅ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

दस दोहे होली के 


होली का त्यौहार
                  - डाॅ. वर्षा सिंह

चढ़ कर यदि उतरे नहीं, होली वाला रंग ।
समझो इसमें है छुपा, बेशक़ प्रेम प्रसंग।। 1।।


सखी न पूछो - क्या हुआ ? क्यों चुनरी है लाल ?
अब कैसे तुमसे कहूं , अपने दिल का हाल ।। 2।।


ख़त कोई लिखता नहीं , मैसेज चलते आज।
मोबाइल पर खुल रहे, मन के सारे राज़ ।। 3।।


सूखी होली खेलना, पानी है अनमोल ।
व्यर्थ गंवाना ना इसे, समझो जल का मोल।। 4।।


टेसू, सेमल खोजना, रहा नहीं आसान।
ऊंची बनी इमारतें, हैं शहरों की शान ।। 5।।


दादी- नानी की कथा, अब सुनता है कौन !
क्यों जलती है होलिका ? बच्चे हैं सब मौन ।। 6।।


सबको अपना जानिए, छोड़ मान-अभिमान।
मुक्त हस्त करिये सदा, हंसी-ख़ुशी का दान ।। 7।।


मास्क लगाएं याद से, दूरी रखें ज़रूर।

गर्व कोरोना का हमें, करना होगा चूर ।। 8।।


माथे पर टीका लगे, गालों लाल गुलाल।
होंठों पर मुस्कान हो,मन का मिटे मलाल।। 9।।


‘‘वर्षा’’ हो सद्भाव की, बहे ख़ुशी की धा
तभी सार्थक हो सके, होली का त्यौहार।। 10।।