कवयित्री / शायरा डॉ. वर्षा सिंह
प्रिय मित्रों,
❤. मेरी ग़ज़ल के कुछ शेर भी देखें...।❤
नयन में उमड़ा जलद है नम व्यथा का भी वृहद है
वक्त की हर इक सभा में दर्द ही बस नामज़द है
नींद को कैसे मनाएं स्वप्न की खोई सनद है
त्रासदी 'वर्षा' कहें क्या शत्रु अब तो मेघ ख़ुद है