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सोमवार, जून 15, 2015

दस दोहे धूल पर .....Poetry on dust

Dr Varsha Singh


माथे सदा लगाइये, जन्मभूमि की धूल।
तन-मन के भीतर खिले, देशभक्ति का फूल।। 1।।

जीवन की है आस्था मिट्टी, पानी, धूल।
इन्हें त्यागने की कभी करना मत तुम भूल।। 2 ।।

अंतर मिट्टी-धूल में करना सहज समान
जैसे मानव की बने रंग, रूप, पहचान।। 3 ।।

धूलि गांव की स्वर्ण-सी, सदा लगाओ माथ।
 मां के आशीर्वाद-सी, देती हरदम साथ  ।। 4 ।।

श्रद्धा, भक्ति, सनेह की देती है जो सीख।
मूल्यवान है धूल ये कहीं न मिलती भीख ।। 5 ।।

धूल सरीखी जि़न्दगी, जिसे संवारे धूल । 
माथे इसे लगाइये, यह जीवन की मूल ।। 6 ।।

 मिट्टी काली, लाल है, लेकिन धूल सफेद ।
श्रम तब तक यूं कीजिए, देह गिरे जब स्वेद।। 7।।

पंचतत्व में एक है, मिट्टी प्राण समान।
यही कराती है हमें, देशभक्ति का ज्ञान।। 8 ।।

धूल हमें देती सदा, देश प्रेम की चाह।
बैर न करना धूल से, तभी मिलेगी राह।। 9 ।।

 "वर्षा" ने हरदम किया, महिमा धूलि बखान।
धूल सदा निज देश की, लगती हमें महान।। 10।।

                                       - डॉ. वर्षा सिंह