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मंगलवार, दिसंबर 10, 2019

नादानी दिल की 😊 .... डॉ. वर्षा सिंह

सिर्फ़ एक नादानी दिल की
बैठे-ठाले चोर हुआ
राह इश्क़ की चल निकला तो
दानाओं में शोर हुआ

       - डॉ. वर्षा सिंह

बुधवार, मार्च 27, 2019

ग़ज़ल... कह दिया मौसम ने - डॉ. वर्षा सिंह

Ghazal by Dr. Varsha Singh

कह दिया मौसम ने सब कुछ, किन्तु वो समझा नहीं
क्या पता समझा भी हो तो, कुछ कभी कहता नहीं

ज़िंदगी में यूं भी पहले उलझनें कुछ कम न थीं
की जो सुलझाने की कोशिश, कुछ मगर सुलझा नहीं

भीड़ में, एकांत में, गुलज़ार में, वीरान में
कौन जाने क्या हुआ है, मन कहीं लगता नहीं

इस क़दर बदले हुए हैं, बंधनों के मायने
है खुला पिंजरा, परिंदा अब मगर उड़ता नहीं

लाख कोशिश कीजिये, "वर्षा" यकीनन जानिये
लग कभी सकता किसी की, सोच पर पहरा नहीं

- डॉ. वर्षा सिंह





शनिवार, अप्रैल 21, 2018

वो दिल बेहतर है

सुकून से जो गुज़र जाए
वो दिन बेहतर है
कभी किसी पे ठहर जाए
वो दिल बेहतर है
❤ - डॉ. वर्षा सिंह

बुधवार, अप्रैल 11, 2018

तब न था मालूम ....

तब न था मालूम , ऐसे फ़ासले हो जाएंगे।💔
ज़ख़्म बीते दिन के सारे फिर हरे हो जाएंगे।❣
शाम आयेगी ज़ख़ीरा याद का लेकर यहां
ख़्वाब बुनने के नये फिर सिलसिले हो जाएंगे।💝
❤- डॉ. वर्षा सिंह

शुक्रवार, मई 12, 2017

फूल खिले तो ..।।.

फूल ख़िले तो ख़ुशबू आई
साथ   पुरानी   यादें   लाई
मिल जुल कर नापा करते थे
इश्क़ में  है कितनी गहराई
             - डॉ वर्षा सिंह

मंगलवार, अक्टूबर 14, 2014

मन तुम्हारी याद में....

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दिल बंजारा....

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‘वर्षा’ हो ज़रा बरसो.....

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नया इक आसमां होगा....

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शायराना हो गई है......

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सोचती हूं.....


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तेरे मेरे बीच में.....

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उसकी यादें....

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हाल क्या है ????......

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राज़ वो ही बता ये पाएगाा......

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न जाने कौन सा....

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चलो अच्छा हुआ.....

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