एक बरस के बाद फिर, आया है आषाढ़ ।
प्रकृति-हृदय में आ गई, खुशहाली की बाढ़ ।।
प्रकृति-हृदय में आ गई, खुशहाली की बाढ़ ।।
जंगल होंगे फिर हरे, नये खिलेंगे फूल ।
अब ढूंढे से भी नहीं, कहीं दिखेगी धूल ।।
अब ढूंढे से भी नहीं, कहीं दिखेगी धूल ।।
"वर्षा" की ऋतु आ गई, बरसन लागे मेह ।
धरती हरियाने लगी, भीगी सूखी देह।।
धरती हरियाने लगी, भीगी सूखी देह।।
गीतों में फिर ढाल कर, कहना मन की बात।
रिमझिम का संगीत है, "वर्षा" के दिन- रात ।।
रिमझिम का संगीत है, "वर्षा" के दिन- रात ।।
❤ - डॉ वर्षा सिंह
