आषाढ़ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
आषाढ़ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, जून 11, 2017

पावस के दोहे - डॉ. वर्षा सिंह

डॉ. वर्षा सिंह

प्रियतम का संदेश ले, आया श्वेत कपोत ।
"वर्षा" होगी  नेह की, जागी मन में जोत ।।

एक बरस के बाद फिर, आया है आषाढ़ ।
प्रकृति-हृदय में आ गई, खुशहाली की बाढ़ ।।

जंगल होंगे  फिर हरे, नये  खिलेंगे फूल ।
अब ढूंढे से भी नहीं, कहीं दिखेगी धूल ।।

"वर्षा" की ऋतु आ गई, बरसन लागे मेह ।
धरती  हरियाने  लगी, भीगी  सूखी  देह।।

गीतों में फिर ढाल कर, कहना मन की बात।
रिमझिम का संगीत है, "वर्षा" के दिन- रात ।।

                              ❤  - डॉ वर्षा सिंह