रविवार, जनवरी 13, 2019

कवि सम्मेलन - मुशायरे में डॉ. वर्षा सिंह का ग़ज़लपाठ


Dr. Varsha Singh
   सागर नगर की अग्रणी साहित्यिक संस्था हिन्दी-उर्दू मजलिस द्वारा आज दिनांक 13.01.2019 को आयोजित कवि सम्मेलन - मुशायरे में मैंने यानी डॉ. वर्षा सिंह ने अपनी ग़ज़ल पढ़ी.... Please Listen & Share .


बुधवार, जनवरी 02, 2019

कथाओं के पंख होते हैं ... डॉ. वर्षा सिंह


कथाओं के पंख होते हैं
उड़ती फिरती हैं
ध्रुवों से भूमध्य रेखा तक
उत्तरी से दक्षिणी गोलार्ध तक ...
पूरी पृथ्वी पर
समयबंधन मुक्त
आदिकाल से अनादिकाल तक
उड़ती फिरती हैं कथायें.

ईश्वर ने बनाया हमें नश्वर
लेकिन हमने बनायी कथायें अनश्वर
जीव, मनुष्य, वनस्पति, पृथ्वी, अंतरिक्ष
और तो और
ईश्वर की कथायें अनश्वर
... और लगा दिये उनमें पंख

तभी तो
समयबंधन मुक्त
आदिकाल से अनादिकाल तक
उड़ती फिरती हैं कथायें
कथाओं के पंख होते हैं.
      - डॉ. वर्षा सिंह


शुक्रवार, दिसंबर 28, 2018

नए साल में - डॉ. वर्षा सिंह


मेरी चाहत है
कि नए साल में नया भारत
मेरा अपना भारत हो

इंडिया नहीं, भारत और सिर्फ़ भारत

जहां बिखरी हो सुगन्ध स्वदेशी की
जहां बिखरी हो मिठास भारतीय संस्कृति की
और बिखरा हो उजाला भारतीयता का

जहां प्रति पल आरती हो लोकतंत्र की
जनतंत्र की
गणतंत्र की


यूं ही - डॉ. वर्षा सिंह


कभी- कभी
यूं ही
शब्द बुन देते हैं
कविताएं

और
बह निकलती हैं
भावनाएं
कभी-कभी
यूं ही