बुधवार, नवंबर 07, 2018

Happy Diwali शुभ दीपावली

Dr. Varsha Singh

आज मावस की निशा


रोशनी के छंद गढ़ती आज मावस की निशा
दीप से श्रृंगार करती आज मावस की निशा

भीतियों पर सातियों की पांत, मंगल कामना
द्वार पर शुभ-लाभ लिखती आज मावस की निशा

पान, श्रीफल में, बताशे- खील, अक्षत फूल में
रूप नूतन गंध भरती आज मावस की निशा

फुलझड़ी झरती बनाती अल्पनाएं अग्नि की
अग्निपुंजों से संवरती आज मावस की निशा

शंख की ध्वनि में निनादित सामवेदी स्वर मधुर अर्चना के श्लोक पढ़ती आज मावस की निशा

कंचनी वातावरण में कार्तिक स्वर्णिम हुआ
स्वर्ण का भंडार लगती आज मावस की निशा

श्री रमा-आराधना में व्यस्त “वर्षा” नभ-धरा
भक्ति- गीतों से निखरती आज मावस की निशा
                             -डॉ. वर्षा सिंह







द्वार पर पूरित रांगोली यानी मांडना



मंगलवार, नवंबर 06, 2018

Happy Roop Chaturdashi ... शुभ रूप चतुर्दशी 2018

Dr. Varsha Singh

     🍁💥 शुभ रूप चतुर्दशी 💥🍁
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसंपदाम् ।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते ॥
दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः ।
दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते ॥
                💥🍁🌹🍁💥


ज्योति के त्योहार में

रश्मि की मंजुल कलाएं ज्योति के त्योहार में जगमगाती तारिकाएं ज्योति के त्योहार में

धरा का श्रृंगार, स्वर्णिम हार, नख-शिख आभरण
मुग्ध बेसुध व्यंजनाएं ज्योति के त्योहार में

हासमय उल्लास, कातिक मास, मंगल कामना नेहा-सिंचित भावनाएं ज्योति के त्योहार में

धूप-अक्षत-पान, सुख का गान, आंगन द्वार पर इंद्रधनुषी अल्पनाएं ज्योति के त्योहार में

फूल बिजली के खिले, दीपक जले अमावस निशा
गूंजती पावन ऋचाएं ज्योति के त्योहार में

अर्चना-आराधना श्री लक्ष्मी की वंदना
आरती करती दिशाएं ज्योति के त्योहार में

रूप की “वर्षा” नई आशा नए संकल्प से
झूमती नव वर्तिकाएं ज्योति के त्योहार में
- डॉ. वर्षा सिंह


सोमवार, नवंबर 05, 2018

Happy Dhanteras .... धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं



स्वास्थ्य और आरोग्य के देवता  भगवान धन्वंतरि और धनसम्पदा के देवता कुबेर के पूजन दिवस धनतेरस अर्थात धनत्रयोदशी के अवसर पर आप सभी को सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🌺🙏

      स्वास्थ्य. संपदा मिले सभी को
      शुभ आशीषें फले सभी को
      रहे भाग्य दिनकर सा तेजस
      सबको शुभ हो, शुभ धनतेरस
             

रविवार, नवंबर 04, 2018

ग़ज़ल ... मिल के दीपावली मनानी है - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

दीपावली की आहट सुनाई दे रही है.... रोशनी का त्योहार दीपावली अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व है। तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात् तम से ज्योति की ओर अर्थात अंधेरे से प्रकाश की ओर जाने का संदेश देने वाले इस पर्व पर अनेक शुभ संकल्प लिए जाते हैं, जिन्हें पूर्ण करने का प्रयास किया जाता है। तो कुछ ऐसी ही भावना को व्यक्त करती मेरी ये ग़ज़ल प्रस्तुत है।

हमने दिल में ये आज ठानी है
एक दुनिया नयी बसानी है

जिनके हाथों में क़ैद है क़िस्मत
हर ख़ुशी उनसे छीन लानी है

दिल के सोये हुए चिरागों में
इक नयी रोशनी जगानी है

जंगजूओं की महफ़िलों में हमें
प्यार की इक ग़ज़ल सुनानी है

लाख जौरे- सितम किये जायें
अम्न की आरती सजानी है

हिन्द की सर ज़मीन जन्नत है
इस पे क़ुरबान हर जवानी है

ईद का जश्न हम मनायेंगे
मिल के दीपावली मनानी है

दहशतों से भरा हुआ है चमन
एकता की कली खिलानी है

तआरुफ़ पूछिए न “वर्षा” का
बादलों- बूंद की कहानी है

गुरुवार, नवंबर 01, 2018

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh
आज 1 नवम्बर यानी मध्यप्रदेश की स्थापना का दिवस है।
प्रदेश एवं देशवासियों को इस अवसर पर हमारे मध्यप्रदेश गान के साथ हार्दिक शुभकामनाएं


मध्यप्रदेश गान

सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है।
माँ की गोद, पिता का आश्रय मेरा मध्यप्रदेश है।

विंध्याचल सा भाल नर्मदा का जल जिसके पास है,
यहां ज्ञान विज्ञान कला का लिखा गया इतिहास है,

उर्वर भूमि, सघन वन, रत्न, सम्पदा जहां अशेष है,
स्वर-सौरभ-सुषमा से मंडित मेरा मध्यप्रदेश है।

सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है,
माँ की गोद, पिता का आश्रय मेरा मध्यप्रदेश है।

चंबल की कल-कल से गुंजित कथा तान, बलिदान की,
खजुराहो में कथा कला की, चित्रकूट में राम की,

भीमबैठका आदिकला का पत्थर पर अभिषेक है,
अमृत कुंड अमरकंटक में, ऐसा मध्यप्रदेश है।

क्षिप्रा में अमृत घट छलका मिला कृष्ण को ज्ञान यहां,
महाकाल को तिलक लगाने मिला हमें वरदान यहां,

कविता, न्याय, वीरता, गायन, सब कुछ यहां विशेष है,
ह्रदय देश का है यह, मैं इसका, मेरा मध्यप्रदेश है।

सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है,
माँ की गोद, पिता का आश्रय मेरा मध्यप्रदेश है।


(रचयिता - महेश श्रीवास्तव )

सोमवार, अक्तूबर 29, 2018

वर्षा का गीत - डॉ. वर्षा सिंह


Dr. Varsha Singh

गरमी के झुलसाते दिन तो गए बीत
मौसम ने  गाया है वर्षा का गीत
       वर्षा का गीत, वर्षा का गीत।

कितना भी सूखे ने  कहर यहां ढाया
अब तो है कजरारे  बादल की छाया
रिमझिम से सजती है पौधों की काया
इसको ही कहते हैं ऋतुओं की माया
दुनिया ये न्यारी है
परिवर्तन जारी है
दुख के हज़ार दंश
एक खुशी भारी है
रहती हर  हार में छुपी हुई जीत
मौसम ने  गाया है वर्षा का गीत
     वर्षा का गीत, वर्षा का गीत।

गूंथ रहा मनवा भी सपनों की माला
पुरवा ने लहरा कर  जादू ये डाला
भीगी-सी रागिनी, स्वर में मधुशाला
हृदय के  भावों को छंदों में ढाला
बारिश की लगी झड़ी
सरगम की जुड़ी कड़ी
दिल तो है छोटा-सा
मचल रही  चाह बड़ी
राग है मल्हार और प्यार का संगीत
मौसम ने  गाया है वर्षा का गीत
      वर्षा का गीत, वर्षा का गीत।

गांव में निराशा के आशा का डेरा
जागी उम्मीदों ने जी भर कर टेरा
रिमझिम फुहारों से खेलता सवेरा
सबका है सबकुछ ही, क्या तेरा-मेरा
बूंद की  अठखेली में
तृप्ति की   पहेली में
लहरों की चहल-पहल
नदी   अलबेली   में
खुशबू बन चहक रही ओर-छोर प्रीत
मौसम ने  गाया है वर्षा का गीत
      वर्षा का गीत, वर्षा का गीत।

पड़ती हैं  धरती पर पावसी फुहारें
गली-गली बरस  रहीं अमृत की धारें
मेघों से  करती है बिजली  मनुहारें
टूट रहीं जल-थल के बीच की दीवारें
बिखरी हरियाली है
छायी खुशहाली है
फूलों के बंधन में
बंधती हर डाली है
पाया है ‘‘वर्षा’’  ने अपना मनमीत
मौसम ने  गाया है वर्षा का गीत
     वर्षा का गीत, वर्षा का गीत।
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मेरा यह गीत "नारी का सम्बल " पत्रिका (सम्पादक डॉ. शकुंतला तरार) के जुलाई- सितम्बर 2018 अंक में प्रकाशित हुआ है।

"नारी का सम्बल" पत्रिका में प्रकाशित डॉ. वर्षा सिंह का गीत

रविवार, अक्तूबर 28, 2018

गीत .... लुप्त होती जा रही है चेतना - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

शून्य होती जा रही संवेदना
लुप्त सी होने लगी है चेतना

बद से बदतर गांव की हालत हुई
घर से बेघर चैन की चाहत हुई
पड़ रहा अक्सर स्वयं को बेचना
लुप्त सी होने लगी है चेतना

वीडियो बनते रहे वायरल हुए
हादसों से मन नहीं व्याकुल हुए
कौन समझे घायलों की वेदना
लुप्त सी होने लगी है चेतना

बिन चुभोये देह में चुभते हैं पिन
हाथ में पत्थर लिए दिखते हैं दिन
हो रहा मुश्किल बहुत ही झेलना
लुप्त होती जा रही है चेतना

सच की कड़वाहट भली लगती नहीं
झूठ की लेकिन सदा चलती नहीं
फैसला ना हो गलत, यह देखना
लुप्त होती जा रही है चेतना