शनिवार, फ़रवरी 17, 2018

Lecture & Poetry at Dr HariSingh Gour Central University , Sagar, MP

दिनांक 16.02.2018 को डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर  के हिंदी विभाग के नंददुलारे बाजपेयी सभागार में "समकालीन ग़ज़ल और अशोक मिज़ाज " विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई जिसमें मैंने भी अपना व्यक्तव्य दिया। इस अवसर पर काव्य गोष्ठी भी हुई।
तस्वीरें उसी अवसर की....

Lecture & Poetry at Dr HariSingh Gour Central University , Sagar, MP

मंगलवार, फ़रवरी 13, 2018

महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

आज पूजन के पलों में
स्मरण शिव का करें
मां उमा की छवि नयन में
पूर्ण श्रद्धा से धरें
     होंगे पूरे सब मनोरथ
     होगी पावन भावना
     कर रही "वर्षा" हृदय से
     सर्व जन हित कामना

            🌷 - डॉ. वर्षा सिंह
 

सोमवार, फ़रवरी 12, 2018

मुक्त उजाला रहे सदा

कुण्ठा का तम घेर न पाये
मुक्त उजाला रहे सदा,
"वर्षा" रोशन रहे हर इक पल
कोसों दूर अंधेरा हो ।
     💕- डॉ. वर्षा सिंह

सिर्फ़ सुखों का फेरा हो

जहां -जहां भी जाये मनवा
अपनी चाहत को पाये,
इर्दगिर्द चौतरफा हरदम
ख़ुशियों वाला घेरा हो ।
आंसू दूर रहें आंखों से
होंठों पर मुस्कान बसे,
दुख ना आये कभी किसी पर
सिर्फ़ सुखों का फेरा हो ।
- डॉ वर्षा सिंह

फूल खिले तो

फूल खिले तो बिखरे ख़ुशबू
बिना किसी भी बंधन के,
रहे न दिल में कभी निराशा
उम्मीदों का डेरा हो ।
- डॉ वर्षा सिंह

Khwab adhura rahe na koi

इसीलिये सूरज डूबा है
कल फिर नया सबेरा हो ।
ख़्वाब अधूरा रहे न कोई
तेरा हो या मेरा हो ।
- डॉ. वर्षा सिंह

From My Book " Dil banjara...."