रविवार, अप्रैल 05, 2020

5 अप्रैल 2020 को रात्रि 9 बजे 9 मिनट दीप जलाने संदर्भित अवसर पर विशेष बुंदेली गीत .... दीपक एक जलइयो -डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

           सबई भारतवासियन खों अपने प्रधानमंत्री मोदी जी के संदेस खों पालन करबे के लाने आज 5 तारिख खों रात 9 बजे 9 मिनट तक घर की सबई बत्ती बुझा के दीपक जलाने है सो बुंदेली बोली में हमाई बी जा बिनती सुन ल्यो...

बुंदेली गीत

   दीपक एक जलइयो
        -डॉ. वर्षा सिंह

दीपक एक जलइयो, ओ भैय्या !
दीपक एक जलइयो ।।

अंधियारो डर-भय को फैलो
कर रऔ मन को हुन्ना मैलो
तनकऊ ने घबरइयो, ओ बिन्ना !
दीपक एक जलइयो ।।

आज इतवारे नौ जब बजहें
सबई मिल के जोत जलैहें
एकजुटता दिखलइयो, ओ गुंइयां !
दीपक एक जलइयो ।।

पास न कोनऊ के तुम जइयो
दूरई- दूर से जै-जै करियो
कोरोना खों हरइयो, ओ कक्का !
दीपक एक जलइयो ।।

को का कै रौ, कान ने दइयो
तालाबंदी सफल बनइयो
बाहर कहुं ने जइयो, ओ भौजी !
दीपक एक जलइयो ।।

मोदीजी की बातें ग्यानी
"वर्षा" ने सब दिल से मानी
समझो उर समझइयो, ओ दद्दा !
दीपक एक जलइयो ।।

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लॉकडाउन के इस कठिन समय में हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा आज रात्रि में 9 बजे दीपक, मोमबत्ती आदि का प्रकाश करने हेतु जो आह्वान किया गया है, उस पर केंद्रित मेरा एक बुंदेली गीत आज web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 05.04.2020 में प्रकाशित हुआ है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं 


गुरुवार, अप्रैल 02, 2020

🚩🏹🙏श्री रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏹🚩- डॉ. वर्षा सिंह


Dr. Varsha Singh

🙏श्री रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏹🚩

🚩नमामि भक्त वत्सलं। कृपालु शील कोमलं।।
भजामि ते पदांबुजं। अकामिनां स्वधामदं।।
निकाम श्याम सुंदरं। भवाम्बुनाथ मंदरं।।
प्रफुल्ल कंज लोचनं। मदादि दोष मोचनं।।
प्रलंब बाहु विक्रमं। प्रभोऽप्रमेय वैभवं।।
निषंग चाप सायकं। धरं त्रिलोक नायकं।।
दिनेश वंश मंडनं। महेश चाप खंडनं।।
मुनींद्र संत रंजनं। सुरारि वृंद भंजनं।।
मनोज वैरि वंदितं। अजादि देव सेवितं।।
विशुद्ध बोध विग्रहं। समस्त दूषणापहं।।
नमामि इंदिरा पतिं। सुखाकरं सतां गतिं।।
भजे सशक्ति सानुजं। शची पतिं प्रियानुजं।।
त्वदंघ्रि मूल ये नराः। भजंति हीन मत्सरा।।
पतंति नो भवार्णवे। वितर्क वीचि संकुले।।
विविक्त वासिनः सदा। भजंति मुक्तये मुदा।।
निरस्य इंद्रियादिकं। प्रयांति ते गतिं स्वकं।।
तमेकमभ्दुतं प्रभुं। निरीहमीश्वरं विभुं।।
जगद्गुरुं च शाश्वतं। तुरीयमेव केवलं।।
भजामि भाव वल्लभं। कुयोगिनां सुदुर्लभं।।
स्वभक्त कल्प पादपं। समं सुसेव्यमन्वहं।।
अनूप रूप भूपतिं। नतोऽहमुर्विजा पतिं।।
प्रसीद मे नमामि ते। पदाब्ज भक्ति देहि मे।।
पठंति ये स्तवं इदं। नरादरेण ते पदं।।
व्रजंति नात्र संशयं। त्वदीय भक्ति संयुता।।🚩🏹🙏

Jai Shri Ram Darbar



बुधवार, अप्रैल 01, 2020

लॉकडाउन के अनुभवों से सीख लें - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

लॉकडाउन के अनुभवों से सीख लें
             - डॉ. वर्षा सिंह

     कुछ दिनों से मेरे घर में गौरैया चिड़िया ने नल की पाईपलाईनों के बीच एक घोंसला बनाया हुआ है। लॉकडाउन से पहले अपने कामों की व्यस्तता के कारण इस ओर मेरा ख़ास ध्यान गया ही नहीं था। अब जबकि लॉकडाउन के चलते लगातार चौबीसों घंटे  पिछले एक सप्ताह से मैं अपने घर पर ही  हूं तो सुन रही हूं गौरैया के नन्हें बच्चों की वे आवाजें जो दिन भर पूरे घर में गूंजती रहती हैं।
  हां बहुत सी ऐसी चीजें है जिनका एहसास हम घर से बाहर रहकर कर ही नहीं पाते हैं। यह जरूर है कि लॉकडाउन की स्थिति में हमें लगातार घर में रहने के लिए विवश होना पड़ा है और यह लॉकडाउन भी कोरोना वायरस के संक्रमण की विभीषिका से बचाने के लिए लागू किया गया है किंतु हर एक लाभप्रद बात के पीछे अनेक पॉजिटिव बातें भी निहित होती हैं। यदि घर से बाहर नहीं जा पाने को माइनस प्वाइंट मानें तो लॉकडाउन का प्लस प्वाइंट यह है कि घर में रहकर हम घर में होने वाली उन चीजों को भी अब जान रहे हैं जिन्हें जानने की फुर्सत हमें पहले कभी नहीं मिल पाई है।     
           जहां तक लॉकडाउन की स्थिति में समय व्यतीत करने का प्रश्न है तो महिलाओं के पास कार्यों की कमी कभी नहीं रहती है । सुबह उठने से लेकर रात को बिस्तर पर जाने के बीच कितने छोटे-बड़े काम महिलाओं के जिम्मे सुपुर्द रहते हैं कि उन्हें करते - याद रखते हुए ही पूरा दिन व्यतीत हो जाता है । अब जबकि बाहरी कार्य जैसे कहीं आना-जाना किसी से मिलना-जुलना, अन्य सामाजिक कार्यों की व्यस्तताएं बिल्कुल भी नहीं हैं, किसी किस्म के साहित्यिक आयोजन भी नहीं हो रहे हैं तो मैं घर में रहकर उन कामों की ओर स्वयं को केंद्रित कर रही हूं जिन्हें करने की इच्छा होने के बावजूद मैं कर नहीं पाई थी। इन कामों की सूची में सबसे पहला काम मम्मी यानी मेरी माता जी के पास बैठकर उनकी बातें सुनना भी शामिल है । घर के बड़े बुजुर्ग कई दफा हमें आवाज़ देते हैं, वे अपनी कोई बात कहना चाहते हैं लेकिन समय के अभाव में ठीक उसी वक्त हम उन पर ध्यान नहीं दे पाते हैं, उनका कहा सुन नहीं पाते हैं । बाद में जब हम फुर्सत में हो कर उनकी बात सुनने जाते हैं तब तक वे भूल चुके होते हैं कि वे क्या कहना चाह रहे थे और यहां-वहां की छोटी-मोटी बात होकर रह जाती है। वे अपने मन की बात जस की तस कर ही नहीं पाते । लॉकडाउन के दौरान मैंने महसूस किया कि माता-पिता के प्रति बच्चे अपना दायित्व तभी अच्छी तरह निभा सकते हैं जब किसी एक दिन वे पूरी तरह माता-पिता की सेवा में व्यतीत करें, उनकी बातें सुनें। अब जबकि लॉकडाउन की स्थिति है तो तत्काल ही उनकी वे सभी बातें सुनकर हम उनके मन को संतुष्ट रहे हैं, जिनका एहसास हम घर से बाहर रहकर कर ही नहीं पाते हैं।
      तो मुझे लगता है कि भविष्य में आने वाले दिनों में जब लॉकडाउन की स्थिति समाप्त हो जाएगी और हम पुनः सामान्य जीवन के दैनिक कार्य करने लगेंगे तब उस वक्त इस लॉकडाउन के अनुभवों से सीख ले कर सप्ताह में कोई एक दिन हम ऐसा चुने जिसमें हम अधिक से अधिक समय अपने घर के बुजुर्गों के साथ पूरी तरह समर्पित भाव से व्यतीत करें। इस तरह घर के बुजुर्गों को भी आत्मसुख का अनुभव करा सकते हैं और स्वयं भी आत्मसंतुष्टि पा सकते हैं।
   जहां तक प्रशासन की बात है तो लॉकडाउन में कम से कम मुझे तो इस बात की पूरी तरह संतुष्टि है कि मेरे शहर सागर का प्रशासन बहुत चुस्त है। पूरी तरह समर्पण भाव के साथ हमारी जिले के अधिकारी, पुलिस विभाग और प्रशासन के साथ समाजसेवी, पत्रकार सभी जागरूकता से सेवा कार्यों में लगे हैं। ज़िला प्रशासन का जिम्मा जिला कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक के पास है जो एक महिला हो कर पूरी तत्परता के साथ मैदानी निरीक्षण -परीक्षण कर जनता को हर प्रकार की हर संभव सुविधाएं, मदद आदि उपलब्ध कराने के लिए तत्परता से कार्य कर रही हैं। इसी प्रकार पुलिस विभाग में कार्यरत समस्त स्टाफ हर समय लॉकडाउन में अपने घरों में बंद नागरिकों की सुरक्षा-सुविधा के प्रति जागरूकता के साथ अपने कर्तव्य का पालन कर रहा है। माननीय प्रधानमंत्री जी ने कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रखने का जो लॉकडाउन का क़दम उठाया है, वह वास्तव में स्तुत्य है। इस तरह का कदम हमारे देश के सुरक्षा के लिए अत्यंत जरुरी है ।
     तो आइए हम सभी मिल जुलकर लॉकडाउन के शेष बचे हुए दिनों में निर्धारित नियमों का पूरी आस्था के साथ पालन करें ताकि हम, हमारा परिवार, समाज, देश और साथ ही संपूर्ण विश्व सुरक्षित रह कोरोना वायरस की इस संक्रमणकारी आपदा से मुक्ति पा सके।
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       "कोरोना लॉकडाउन और हम" के अंतर्गत web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 31 मार्च 2020 में मेरे विचार प्रकाशित किए गए हैं।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=27586




शनिवार, मार्च 28, 2020

कोरोना के विरुद्ध ... डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

      दैनिक भास्कर, सागर संस्करण ने आज 28 मार्च 2020 के अंक में प्रश्न उठाया है कि.... "अपने शहर और देश के साथ कलम के सिपाही भी इन दिनों लॉकडाउन में हैं। लेकिन क्या उनकी कलम भी लॉक हो गई है?" और फिर उत्तर के रूप में प्रकाशित किए हैं सागर के प्रमुख साहित्यकारों की अभिव्यक्ति के अंश। जी हां, बहन डॉ. शरद सिंह की ग़ज़ल के शेर और मेरे भी दोहे को शामिल किया गया है इसमें....
हार्दिक आभार दैनिक भास्कर 🙏





#StayHome
#Corona
#Lockdown

शनिवार, मार्च 21, 2020

बारह दोहे कोरोना से जंग पर ..... "जनता कर्फ्यू" - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh
    हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर स्वयं, परिवार, समाज और देश के हित में आज हम सब भारतवासी कोरोना वायरस के विरुद्ध जंग में शामिल हो कर "जनता कर्फ्यू " का स्वेच्छा से पालन कर रहे हैं ... तो पढ़िए मेरे बारह दोहे जिन्हें web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 22 मार्च 2020 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏

बारह दोहे कोरोना से जंग पर

"जनता कर्फ्यू"
                    - डॉ. वर्षा सिंह

कोरोना समझे नहीं, रंग, धरम ना जात।
मिल कर लें संकल्प हम, देनी होगी मात।।1।।

कोरोना की आपदा, मनुज रहा है झेल ।
रहें एकजुट हम अगर, यह भी होगा फेल।।2।।

सार्स, इबोला से नहीं ,घबराया इंसान।
कोरोना के घात का, हमको है संज्ञान।।3।।

शहर, देश, दुनिया सभी पर संकट की छांव।
बच कर स्वयं, बचाइए, अपनी बस्ती-गांव।।4।।

बहुत बुरा यह संक्रमण, इतना लीजे जान।
टीका इसका है नहीं, जा सकती है जान ।।5।।

मानव हैं हम, ये सदा हमें रहेगा भान।
करना हमें सदैव है नए-नए संधान।।6।।

कोरोना का भी कभी निकलेगा कुछ तोड़।
वर्तमान में दीजिए सभी बुराई छोड़।।7।।

"जनता कर्फ्यू" में निहित, सबके हित की बात।
इसी तरह दे पायेंगे, कोरोना को मात ।।8।।

वहां सुरक्षित हैं सभी, जहां सतर्क इंसान।
दूर भ्रमों से रह करें सच्चाई का भान ।।9।।

दूरी रखिए आपसी, नहीं घूमने जाएं ।
पालन वह सब कीजिए, जो पी.एम. समझाएं।।10।।

भय मन में मत पालिए, किन्तु न निर्भय होंए ।
सैनेटाइजर से सदा हाथों को मल धोंए ।।11।।

"वर्षा" भारत भूमि पर दिन यह बाइस मार्च।
जग को पथ दिखला रहा, बन कर जलती टार्च ।।12।।
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मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://yuvapravartak.com/?p=26946



रविवार, मार्च 08, 2020

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की प्रासंगिकता - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

     अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज हिन्दी समाचार पोर्टल हरमुद्दा डॉटकॉम के अंक दिनांक 08 मार्च 2020 में सामाजिक सरोकार के अंतर्गत मेरे विचार शामिल किए गए हैं।
हरमुद्दा डॉटकॉम के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पोर्टल में इसे इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...
http://harmudda.com/?p=15065

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की प्रासंगिकता

संस्कृत में एक श्लोक है- 'यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता:। अर्थात्, जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है।
नारी सम्मान का स्मरण कराने का दिवस है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानी 08 मार्च .... जी हां, विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में समस्त प्रकार की महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के रूप में मनाया जाता है। मां, बहन, बेटी, पत्नी... अनेक रूप हैं महिलाओं के। हर रूप में नारी स्तुत्य है।
महिला दिवस मनाने का उद्देश्य नारी को समाज की कुरीतियों से बाहर निकालकर विकास का अवसर प्रदान करना है। महिला दिवस मनाने का वास्तविक मकसद यह है कि महिलाओं को जीवन में बराबरी का दर्जा मिले। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समाज में महिलाओं के योगदान का जश्न मनाता है, लिंग समानता के लिए लड़ाई के बारे में जागरूकता बढ़ाता है, और उन संगठनों के लिए समर्थन को प्रेरित करता है जो विश्व स्तर पर महिलाओं की मदद करते हैं।
     - डॉ. वर्षा सिंह, सागर (म.प्र.)


गुरुवार, मार्च 05, 2020

क्षत्रिय नव चेतना मंच, सागर : एक यादगार शाम - डॉ. वर्षा सिंह



        अपनों का साथ हमेशा ख़ुशी देता है, नई ऊर्जा देता है... दिनांक 04 मार्च 2020 को एक ऐसा ही अवसर था...क्षत्रिय समाज सागर के अंतर्गत क्षत्रिय नव चेतना मंच, सागर द्वारा डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.जय सिंह के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर में एसोसिएट प्रोफेसर का पदभार ग्रहण करने के अवसर पर उन्हें दी गई विदाई पर आयोजित रात्रिभोज का।
शुक्रिया भाई वीनू राणा जी, शुक्रिया भाई डॉ. शशि कुमार सिंह जी और शुक्रिया भाई लखन ठाकुर जी