गुरुवार, जनवरी 14, 2021

मकरसंक्रांति की शुभकामनाएं | डॉ. वर्षा सिंह

🚩 मकरसंक्रांतिशुभाशयाः 🚩
(मकर संक्रांति की शुभकामनाएं)


🚩तिलवत् स्निग्धं मनोऽस्तु वाण्यां गुडवन्माधुर्यम्।
तिलगुडलड्डुकवत् सम्बन्धेऽस्तु सुवृत्तत्त्वम्।।🚩
(मकर संक्रांति पर यही कामना है कि तिल की भांति हम सभी के मन स्निग्ध अर्थात् स्नेहयुक्त हों, गुड़ की भांति हमारे शब्दों में मधुरता हो और जिस प्रकार लड्डू में तिल और गुड़ की प्रबल घनिष्ठता रहती है वैसे ही हमारे संबंध हों स्नेहपूर्ण हों)

🚩भास्करस्य यथा तेजो मकरस्थस्य वर्धते।
तथैव भवतां तेजो वर्धतामिति कामये।।🚩
(जिस प्रकार मकर राशि में प्रवेश करने के बाद दिन प्रतिदिन सूर्य देव का तेज बढ़ता जाता है उसी प्रकार आप का तेज, यश और कीर्ति भी दिन प्रतिदिन बढ़ती रहे। )

        🕉️ 🙏 🌞 🍪    - डॉ. वर्षा सिंह

मंगलवार, जनवरी 12, 2021

बर्ड फ्लू | एक प्रार्थना | रोगमुक्त हों जीव | दस दोहे | डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

प्रिय ब्लॉग पाठकों,

कोरोना से अभी हम मनुष्यों को निज़ात नहीं मिल पाई है और बर्ड फ्लू यानी पक्षियों में इन्फ्लूएंजा वायरस से होने वाली बीमारी के समाचार लगातार आने लगे हैं। प्रस्तुत हैं इसी संदर्भ में प्रार्थना स्वरूप मेरे दस दोहे -


रोगमुक्त हों जीव

- डॉ. वर्षा सिंह


रोग - संक्रमण से भरा, आया कैसा दौर ।

पक्षी बिन सूना लगे, वन, उपवन, हर ठौर ।।1।।


चिन्तन, सोच-विचार कर, करें इस तरह यत्न।

संकट से हों मुक्त सब, जग के पक्षी- रत्न ।।2।।


हम मानव इस हेतु यदि, मिल-जुल कर हों एक।

कर पाएंगे हम तभी, नवयुग का अभिषेक ।।3।।


काक, गरुड़, शुक, क्रौंच की, कथा सुनाते ग्रंथ।

पक्षी हो कर भी हमें, दिखलाते ये पंथ ।।4।।


कोयल का सुन स्वर मधुर, मन आनंदित होए ।

"पियू" पपीहा जब रटे, विरही मन में रोए।।5।।


मैना, गौरया जहां, बुलबुल गीत सुनाए ।

छांह सुखों की हो वहां, पास नहीं दुख आए ।।6।।


नीलकंठ-दर्शन मिलें, दिवस सार्थक होए ।

मिले स्वाति-जल, तृप्ति से, चातक खुशियां बोए ।।7।।


पिंजरे में रखना नहीं, पक्षी को कर बंद ।

छिन्न- भिन्न हो जाएगा, जीवन का हर छंद ।।8।।


लुप्त न हों संसार से, पक्षी चहकें डाल ।

उड़ें गगन में पंख ले, नीले, पीले, लाल ।।9।।


"वर्षा" की यह प्रार्थना, रोगमुक्त हों जीव ।

मानव के शुभकर्म सब, हों साकार, सजीव ।।10।।

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शुक्रवार, जनवरी 01, 2021

Welcome 2021| सुस्वागतम् नववर्ष 2021| डॉ. वर्षा सिंह




स्वागत है नववर्ष तुम्हारा

फिर इक नया सबेरा हो ।
ख़्वाब अधूरा रहे न कोई
तेरा हो या मेरा हो ।

फूल खिले तो बिखरे ख़ुशबू
बिना किसी भी बंधन के,
रहे न दिल में कभी निराशा
उम्मीदों का डेरा हो ।

जहां -जहां भी जाये मनवा
अपनी चाहत को पाये,
इर्दगिर्द चौतरफा हरदम
ख़ुशियों वाला घेरा हो ।

आंसू दूर रहें आंखों से
होंठों पर मुस्कान बसे,
दुख ना आये कभी किसी पर
सिर्फ़ सुखों का फेरा हो ।

कुण्ठा का तम घेर न पाये
मुक्त उजाला रहे सदा,
"वर्षा" रोशन रहे हर इक पल
कोसों दूर अंधेरा हो ।


- डॉ. वर्षा सिंह

गुरुवार, दिसंबर 24, 2020

शनिवार, दिसंबर 05, 2020

घर | गीत | डॉ. वर्षा सिंह

प्रिय ब्लॉग पाठकों, सादर प्रस्तुत है मेरा एक गीत ....

घर
   -डॉ. वर्षा सिंह

छत न खिड़की से, नहीं दीवार से 
घर हमेशा घर बना है प्यार से 

घर जहां पर नेह के दीपक जलें 
घर वही सुख के जहां मोती मिलें
घर हमेशा है बड़ा संसार से 
घर हमेशा घर बना है प्यार से 

है थकन मिटती जहां मन-देह की 
बारिशें होती जहां स्नेह की 
घर नहीं कम है किसी उपहार से 
घर हमेशा घर बना है प्यार से 

घर की पुख़्ता नींव रिश्तों से बने 
मिल के रहने से ये होते हैं घने 
हैं सफल जो भी जुड़े घर-बार से 
घर हमेशा घर बना है प्यार से 

बात कोई भी न हो विद्वेष की 
हो अगर तो प्रेम के संदेश की 
टूटते घर आपसी तकरार से 
घर हमेशा घर बना है प्यार से 

जूझते हों जब अकेलेपन से हम 
घेरते हैं जब कई अनजान ग़म 
जोड़ता घर ही हमें परिवार से 
घर हमेशा घर बना है प्यार से
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गुरुवार, दिसंबर 03, 2020

श्रद्धांजलि | स्व. ललित सुरजन | डॉ. वर्षा सिंह

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश की राजधानी दिल्ली में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले देशबन्धु समाचार पत्र के प्रधान समूह संपादक ललित सुरजन जी का कल 03 दिसम्बर को ब्रेन हैमरेज के कारण 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
स्व. ललित सुरजन जी को मेरे द्वारा दी गई श्रद्धांजलि को वेबपोर्टल 'युवाप्रवर्तक' ने प्रकाशित किया है। 'युवाप्रवर्तक' के प्रति हार्दिक आभार 🙏

श्रद्धांजलि
   अलविदा ललित सुरजन
         - डॉ. वर्षा सिंह

अभी कुछ देर पहले आदरणीय ललित सुरजन जी के निधन का समाचार पा कर हतप्रभ हूं।😥
बड़े भाई के रूप में मुझे सदैव मिलने वाली उनकी आत्मीयता हमेशा स्मरणीय रहेगी।
मेरी विनम्र श्रद्धांजलि 🙏😥💐
देशबंधु समाचार समूह के प्रधान संपादक व वरिष्ठ पत्रकार ,कवि ललित सुरजन को ब्रेन हैमरेज होने के कारण  निधन हो गया। 74 वर्षीय श्री सुरजन को कल मंगलवार 01 नवम्बर को  नोयडा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

22 जुलाई 1946 को जन्में ललित सुरजन देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक थे। वे 1961 से एक पत्रकार के रूप में कार्यरत रहे थे। वे एक जाने माने कवि व लेखक थे। ललित सुरजन स्वयं को एक सामाजिक कार्यकर्ता मानते थे तथा साहित्य, शिक्षा, पर्यावरण, सांप्रदायिक सदभाव व विश्व शांति से सम्बंधित विविध कार्यों में उनकी गहरी संलग्नता थी ।  वे छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष भी थे। 
          हिन्दी पत्रकारिता जगत में श्रद्धेय स्व. मायाराम सुरजन जी की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले आदरणीय ललित सुरजन ‘‘देशबंधु के साठ साल’’ के रूप में एक ऐसी लेखमाला लिखी जो देशबंधु समाचारपत्र की यात्रा के साथ हिन्दी पत्रकारिता की यात्रा से बखूबी परिचित कराती है। उनकी अनुमति से इसे धारावाहिक रूप से डॉ. (सुश्री) शरद सिंह ने अपने ब्लॉग में शेयर किया था ...
https://samkalinkathayatra.blogspot.com/2019/11/1.html?m=1

ट्विटर पर ललित जी सदैव तत्परता से अपने विचार व्यक्त करते थे। मेरी माता जी डॉ. विद्यावती "मालविका" जी से संबंधित एक पोस्ट पर उनकी टिप्पणी इसका प्रमाण है -
https://twitter.com/LalitSurjan/status/1270901547224846338?s=19

(डॉ. (सुश्री) शरद सिंह के ट्विटर एकाउंट से साभार )

यहां प्रस्तुत है स्व. ललित सुरजन जी की एक कविता -

लखनऊ के पास सुबह-सुबह

अभी-अभी
सरसों के खेत से
डुबकी लगाकर निकला है
आम का एक बिरवा,

अभी-अभी
सरसों के फूलों पर
ओस छिड़क कर गई है
डूबती हुई रात,

अभी-अभी
छोटे भाई के साथ
शरारत करती चुप हुई है
एक नन्हीं बिटिया,

अभी-अभी
बूढ़ी अम्माँ को सहारा दे
बर्थ तक लाई है
एक हँसमुख बहू,

अभी सुबह की धूप में
रेल लाईन के किनारे
उपले थाप रही है
एक कामकाजी औरत,

अभी सुदूर देश में
अपने नवजात शिशु के लिए
किताब लिख रहा है
एक युद्ध संवाददाता,

अभी मोर्चे से लौट रहा है
वीरता का मैडल लेकर
अपने परिवार के पास
एक सकुशल सिपाही,

अभी मैंने
अवध की शाम
नहीं देखी है,
अभी मैं जग रहा हूँ
लखनऊ के पास
अपना पहिला सबेरा, 
और खुद को
तैयार कर रहा हूँ
एक खुशनुमा दिन के लिए।

06.02.1998

(ललित सुरजन की कविताएं)

उनका निधन अपूर्णनीय क्षति है।
श्रद्धानवत - डॉ. वर्षा सिंह,
                 वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक
                 सागर, मध्यप्रदेश




रविवार, नवंबर 29, 2020

जन्मदिन की शुभकामनाएं | डॉ. (सुश्री) शरद सिंह | डॉ. वर्षा सिंह

Dr. (Miss) Sharad Singh & Dr. Varsha Singh

प्रिय ब्लॉग पाठकों,
     आज 29 नवम्बर को मेरी अनुजा डॉ. (सुश्री) शरद सिंह का जन्मदिन है। उन्हें मेरी अनंत हार्दिक शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद 🎂💐🌹💐🔶🌿☘️🌷🥀🌾🌿🌺🌹💐🆚

Happy Birthday To Dr. (Miss) Sharad Singh

 एक वाकया आप सबसे साझा कर रही हूं .... मुझे याद है कि जब मैं कक्षा 06 में पढ़ती थी तब विद्यालय में एक कविता लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इसमें प्रतियोगियों के लिए कक्षावार तीन वर्ग निर्धारित किए गए थे- प्रायमरी, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक। मैंने माध्यमिक वर्ग में अपना नाम लिखा दिया। अब समस्या थी कविता लिखने की। मैंने इस संबंध में नानाजी ठाकुर श्यामचरण सिंह जी से मदद मांगी, तो उन्होंने कहा - तुम प्रतिभागी हो इसलिए स्वयं कविता लिखो। तब मैंने पूछा कि मैं कैसे लिखूं। नानाजी ने कहा अपनी छोटी बहन पर कविता लिख डालो। और फिर क्या था, मैंने फटाफट अपनी छोटी बहन शरद पर कविता लिख डाली। मुझे उस कविता पर प्रथम पुरस्कार भी मिला। मेरी वह कविता थी -
मेरी बहना, मेरी बहना
सदा मानती मेरा कहना
खेल कूद से अधिक सुहाता
हरदम उसको लिखना-पढ़ना ।

Dear Friends,
    Today HAPPY BIRTHDAY of my sister Dr Sharad Singh. Please blessing to her. Thanks.

Dr. (Miss) Sharad Singh

डॉ. (सुश्री) शरद सिंह 


संक्षिप्त परिचय


भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के पं. बालकृष्ण शर्मा "नवीन" पुरस्कार सहित राज्य स्तरीय रामेश्वर गुरू पत्रकारिता सम्मान पुरस्कार,  प्रादेशिक वागीश्वरी सम्मान, नई धारा कथा सम्मान, कस्तूरी देवी चतुर्वेदी लोकभाषा सम्मान, रामानंद तिवारी स्मृति प्रतिष्ठा सम्मान, विजय वर्मा कथा सम्मान आदि अनेक सम्मानों से सम्मानित वरिष्ठ लेखिका डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह द्वारा  लिखित विभिन्न विषयों पर लगभग पचास से अधिक पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने शोषित, पीड़ित स्त्रियों के पक्ष में अपने लेखन के द्वारा हमेशा आवाज़ उठाई है।  बुन्देलखण्ड की महिला बीड़ी श्रमिकों पर केन्द्रित ‘पत्तों में कैद औरतें’ तथा स्त्री विमर्श पुस्तक ‘औरत तीन तस्वीरें’ मनोरमा ईयर बुक में शामिल की जा चुकी हैं। बेड़िया स्त्रियों पर केन्द्रित ‘पिछले पन्ने की औरतें’ तथा लिव इन रिलेशन पर 'कस्बाई सिमोन' नामक उनके उपन्यासों को राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक स्तर के अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनका एक और उपन्यास "पचकौड़ी" राजनैतिक और पत्रकारिता जगत की पर्तों का बारीकी से विश्लेषण करने वाला पठनीय एवं लोकप्रिय उपन्यास है। हाल ही में डॉ. शरद सिंह का नया उपन्यास "शिखण्डी… स्त्री देह से परे" प्रकाशित हुआ है जो महाभारत के एक प्रमुख पात्र शिखण्डी के जीवन को नए नज़रिए से व्याख्यायित करता है।
29 नवम्बर को पन्ना, मध्यप्रदेश में जन्मीं खजुराहो की मूर्तिकला विषय में पीएचडी , सागर की प्रतिष्ठित साहित्यकार, कथालेखिका, उपन्यासकार, स्तम्भकार एवं  कवयित्री और मेरी अनुजा डॉ शरद सिंह वर्तमान में मध्यप्रदेश के सागर नगर में निवास करते हुए स्वतंत्र लेखन के कार्य के साथ नई दिल्ली से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका "सामयिक सरस्वती" में कार्यकारी सम्पादक का दायित्व निभा रहीं हैं एवं पत्र-पत्रिकाओं सहित सोशल मीडिया पर वे लगातार अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं। वे मानती हैं कि अधिकारों का ज्ञान और साहस ही स्त्रियों को शोषण-मुक्त जीवन दे सकता है। सागर से प्रकाशित होने वाले दैनिक समाचार पत्र "सागर दिनकर" में उनका नियमित कॉलम "चर्चा प्लस" अनेक समसामयिक मुद्दों पर विश्लेषणात्मक लेखन के लिए प्रबुद्ध पाठकों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। इससे पूर्व डॉ. शरद सिंह सागर से ही प्रकाशित होने वाले दैनिक समाचार पत्र "आचरण" में अनेक वर्षों तक "बतकाव" शीर्षक का नियमित कॉलम लेखन कर चुकी हैं। 

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