मंगलवार, अप्रैल 16, 2019

सुधा सावित्री तिवारी स्मृति सम्मान .... डॉ. वर्षा सिंह एवं डॉ. (सुश्री) शरद सिंह सम्मानित



           विगत रविवार दिनांक 14.04.2019 को नौ दिवसीय "श्रीमती सुधा सावित्री तिवारी स्मृति सांस्कृतिक पर्व 2019" के समापन अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में मुझे यानी इस ब्लॉग की लेखिका डॉ. वर्षा सिंह को साहित्य में काव्यात्मक योगदान के लिए "श्रीमती सुधा सावित्री तिवारी स्मृति कवयित्री सम्मान" एवं बहन डॉ. (सुश्री) शरद सिंह को सृजनात्मक गद्य साहित्य सृजन हेतु  "श्रीमती सुधा सावित्री तिवारी स्मृति लेखिका सम्मान" से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर  विधायक सागर नगर माननीय शैलेन्द्र जैन, समाजसेवी श्रीमती अनु शैलेन्द्र जैन, पूर्व विधायक देवरी श्री सुनील जैन, श्रीमती मधु अभय दरे, डॉ. अलका जैन, डॉ. अशोक कुमार तिवारी, डॉ. मुन्ना शुक्ला, डॉ. कविता शुक्ला,भाई उमाकांत मिश्र श्यामलम् सहित नगर के अनेक विद्वतजन उपस्थित थे।



http://yuvapravartak.com/?p=13589

https://www.bhaskar.com/mp/sagar/news/mp-news-all-the-unique-events-organized-in-the-program-focused-on-women-women-working-in-9-different-areas-were-honored-on-the-last-day-090032-4348349.html


शनिवार, अप्रैल 13, 2019

🙏 श्री रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

जय श्री राम - डॉ. वर्षा सिंह

🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺
नमामि भक्त-वत्सलं, कृपालु-शील-कोमलम्।
भजामि ते पदाम्बुजं, अकामिनां स्व-धामदम्।।1।।

निकाम-श्याम-सुन्दरं, भवाम्बु-नाथ मन्दरम्।
प्रफुल्ल-कंज-लोचनं, मदादि-दोष-मोचनम्।।2।।

प्रलम्ब-बाहु-विक्रमं, प्रभो·प्रमेय-वैभवम्।
निषंग-चाप-सायकं, धरं त्रिलोक-नायकम्।।3।।

दिनेश-वंश-मण्डनम्, महेश-चाप-खण्डनम्।
मुनीन्द्र-सन्त-रंजनम्, सुरारि-वृन्द-भंजनम्।।4।।

मनोज-वैरि-वन्दितं, अजादि-देव-सेवितम्।
विशुद्ध-बोध-विग्रहं, समस्त-दूषणापहम्।।5।।

नमामि इन्दिरा-पतिं, सुखाकरं सतां गतिम्।
भजे स-शक्ति सानुजं, शची-पति-प्रियानुजम्।।6।।

त्वदंघ्रि-मूलं ये नरा:, भजन्ति हीन-मत्सरा:।
पतन्ति नो भवार्णवे, वितर्क-वीचि-संकुले।।7।।

विविक्त-वासिन: सदा, भजन्ति मुक्तये मुदा।
निरस्य इन्द्रियादिकं, प्रयान्ति ते गतिं स्वकम्।।8।।

तमेकमद्भुतं प्रभुं, निरीहमीश्वरं विभुम्।
जगद्-गुरूं च शाश्वतं, तुरीयमेव केवलम्।।9।।

भजामि भाव-वल्लभं, कु-योगिनां सु-दुलर्भम्।
स्वभक्त-कल्प-पादपं, समं सु-सेव्यमन्हवम्।।10।।

अनूप-रूप-भूपतिं, नतोऽहमुर्विजा-पतिम्।
प्रसीद मे नमामि ते, पदाब्ज-भक्तिं देहि मे।।11।।

पठन्ति से स्तवं इदं, नराऽऽदरेण ते पदम्।
व्रजन्ति नात्र संशयं, त्वदीय-भक्ति-संयुता:।।12।।
🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻

बुधवार, अप्रैल 10, 2019

बुंदेली गीत ... जिनगी चार दिनन को मेला - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

       मेरे बुंदेली गीत को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 10 अप्रैल 2019 में स्थान मिला है।
बुंदेली गीत....

जे जिनगी चार दिनन को मेला
जे जिनगी चार दिनन को मेला
आज लगत जो चांदी - सोना
माटी को है ढेला, जे जिनगी...

फागुन बीतो रंगरंगीलो
लाल हरीरो, नीलो- पीलो
आ गऔ चैत नवेला, जे जिनगी चार...

मैया को दरबार सजो है
ढोल, नगड़िया, मिरदंग बजो है
आ गई पूजन बेला,  जे जिनगी चार...

अपनी- अपनी देत सबई हैं
औरन की सुध लेतई नईं हैं
माया को सब खेला, जे जिनगी चार…

राम को नाम जपो दोई बिरियां
हो सके जितनो, बांट लो खुशियां
“वर्षा” छोड़ो झमेला , जे जिनगी ....
            --------
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏
मित्रों, यदि आप चाहें तो पत्रिका में मेरी ग़ज़ल इस Link पर भी पढ़ सकते हैं ...

बुंदेली गीत - डॉ. वर्षा सिंह

मंगलवार, अप्रैल 09, 2019

बुंदेली गीत - बिटिया हमें बचाने - डाॅ. वर्षा सिंह


Dr. Varsha Singh


बिटिया हमें बचाने
               - डाॅ. वर्षा सिंह

आज करो संकल्प सबई जन
बिटिया हमें बचाने
मोड़ा के चक्कर में पड़े के
मोड़ी नईं गंवाने।

मोड़ी भले ब्याव होबे पे
होत पराए घर की
मन में जोत जलाए पर वो
मां-बाबा के दर की

अपना लो बिटिया खों भैया
करो न कोऊ बहाने।

कन्या जनम होय से पूरे
घर उजियारो छाए
लछमी चरन पड़े से मानो
डर अंधियारो जाए

कन्या देवी को सरूप है
चलियो, पांव पुजाने।

बिटिया को पढ़बे दे, भैया
रोक लगइयो नाए
बिटिया पढ़हे, आगे बढ़हे
ऊंचो नाम कमाए

बेटा-बिटिया भेद ने करियो
आए नए जमाने।

बुंदेली गीत - जिनगी चार दिनन को मेला... डॉ. वर्षा सिंह



Dr. Varsha Singh

जे जिनगी चार दिनन को मेला
जे जिनगी चार दिनन को मेला
आज लगत जो चांदी - सोना
माटी को है ढेला, जे जिनगी...

फागुन बीतो रंगरंगीलो
लाल हरीरो, नीलो- पीलो
आ गऔ चैत नवेला, जे जिनगी चार...

मैया को दरबार सजो है
ढोल, नगड़िया, मिरदंग बजो है
आ गई पूजन बेला ,  जे जिनगी चार...

अपनी- अपनी देत सबई हैं
औरन की सुध लेतई नईं हैं
माया को सब खेला, जे जिनगी चार…

राम को नाम जपो दोई बिरियां
हो सके जितनो, बांट लो खुशियां
“वर्षा” छोड़ो झमेला , जे जिनगी ....

कृपया इस लिंक को देखें एवं शेयर करें....
https://youtu.be/K67r2Ak5Xsg

बुंदेली गीत - आज को कर लो आजई काज .... डॉ. वर्षा सिंह

 
Dr. Varsha Singh

रहो नईं सदा काहु को राज
आज को कर लो आजई काज ।।
काज करबे में कैसी लाज
आज को कर लो आजई काज ।।

अपनो हित सोचत हैं सबरे
परहित कोऊ न सोचे
मों के आंगर मीठी- मीठी
पीठ छुरा सब घोंपे
छील रये अपनो- अपनो प्याज।।
आज को कर लो आजई काज ।।

सोचत हैं सब बिना परिश्रम
फल मीठो मिल जैहे
मनयाई चए जितनी कर ल्यौ
को का कैसे कैहे
नाय पहनो जो भरम को ताज
आज को कर लो आजई काज ।।

मार समय की ऐसी परहे
मुस्किल है जो जीतो
जीवन-जल जो भरो दिखा रओ
चार दिनन में रीतो
मूल के संगे जैहे ब्याज
आज को कर लो आजई काज ।।

काल बनी थीं, आज उधड़ रईं
गांव, सहर की सड़कें
पइसा, धेला पचा गए सब
खरी कही सो भड़कें
कैसे मिटहेगी जे खाज
आज को कर लो आजई काज ।।

मिलजुल के सब मन में ठानें
भ्रष्टाचार ने करहें
अपनी गलती पे औरन को
नाम कभऊं ने धरहें
“वर्षा” है जेई सुराज
आज को कर लो आजई काज ।।

     - डॉ वर्षा सिंह

#बुंदेलीबोल #सुराज #वर्षासिंह
बुंदेली

बुंदेली गीत- गरमी की जे मार परी है.... डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

पौधे नए लगा लो

बिन पानी के कूड़ा- माटी
हो गईं सबरी कुइयां
मारे -मारे फिरत ढोर हैं
प्यासी फिर रईं गइयां
गरमी की जे मार परी है
सूखे ताल- तलैया।।

सूरज तप रऔ ऐसोे जैसे
भट्ठी इतई सुलग रई
भीतर- बाहर, सबई तरफ जे
लू की लपटें लग रईं
कौन गैल पकरें अब गुइयाँ
मिलत कहूं ने छइयां ।।

बांध रये सब आशा अपनी
मानसून के लाने
जब से झाड़- पेड़ सब कट गए
बदरा गए रिसाने
पूछ रये अब “वर्षा” से सब
बरसत काये नइयां ।।

ईमें सोई गलती अपनई है
नाम कोन खों धरिये
मनयाई मानुस ने कर लई
को कासे अब कईये
अब ने जे गलती दुहरायें
कसम उठा लो भइया ।।

ताल- तलैया गहरे कर लो
पौधे नए लगा लो
रहबो चइये साफ कुंआ सब
ऐसो नियम बना लो
जे अपनी बुंदेली धरती
बनहे सोनचिरैया ।।

  • डॉ वर्षा सिंह