शुक्रवार, मार्च 08, 2019

Happy Women's Day 2019

Dr. Varsha Singh

प्रिय मित्रों,
       मेरी ग़ज़ल को web magazine "नवीन क़दम" के अंक दिनांक 07 मार्च 2019 में स्थान मिला है।
"नवीन क़दम" के प्रति हार्दिक आभार 🙏
ग़ज़ल
      - डॉ. वर्षा सिंह
मां, बेटी, बहन, सहेली हूं, बेशक़ मैं तो इक औरत हूं।
पत्नी, भाभी ढेरों रिश्ते, मैं हर इक घर की इज़्ज़त हूं।

अपनी करुणा से मैंने ही, इस दुनिया को सींचा हरदम,
बंट कर भी जो बढ़ती जाती, ऐसी ममता की दौलत हूं।

राधा, मीरा, लैला बन कर, मैं चली प्रेम की राहों पर,
बन कर दुर्गा काली मैं ही,  दुष्टों के लिये क़यामत हूं।

मैं सहनशीलता, धीरज का, पर्याय सदा बनती आई,
संकट का समय रहा जब भी, मैं बनी स्वयं की ताकत हूं।

"वर्षा", सलमा, सिमरन, मरियम, हो नाम भले कोई मेरा,
कह लो औरत, महिला, वूमन, आधी दुनिया की सूरत हूं।
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कृपया पत्रिका में मेरी ग़ज़ल पढ़ने हेतु निम्नलिखित Link पर जायें....
http://navinkadam.com/?p=3697

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सोमवार, मार्च 04, 2019

शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं


शिव शंभू, शिव शंकर
तेरी है जयकार सदा
इस पृथ्वी के जीवजगत पर
तेरा है उपकार सदा
          - डॉ. वर्षा सिंह

रविवार, मार्च 03, 2019

ग़ज़ल .... दरमियां मेरे तुम्हारे.... डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

प्रिय मित्रों,
      आज दिनांक 03 मार्च 2019 को "नवीन क़दम" वेबसाइट पर मेरी ग़ज़ल प्रकाशित हुई है। Please read & share....
   हार्दिक आभार "नवीन क़दम" 🙏

http://navinkadam.com/?p=3562

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#Navinkadam #ग़ज़लवर्षा

शनिवार, मार्च 02, 2019

ग़ज़ल .... कर रहमत की बारिश मौला - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

कर रहमत की बारिश मौला।
हो पूरी हर ख़्वाहिश मौला।

क़ायम शांति रहे दुनिया में,
सबको दे तू दानिश मौला।

कामयाब हो मंज़िल पाये,
मेरी हर इक कोशिश मौला।

हर घर में चूल्हा जल जाये,
इतनी दे तू आतिश मौला।

नाकामी का चेहरा देखे,
दुश्मन की हर साज़िश मौला।

मिथ्या छुपी मुखौटे भीतर,
दुनिया एक नुमाइश मौला।

"वर्षा" पर भी रहम अता कर,
तुझसे यही गुज़ारिश मौला।


ग़ज़ल - डॉ. वर्षा सिंह
ग़ज़ल - डॉ. वर्षा सिंह

शुक्रवार, मार्च 01, 2019

ग़ज़ल... जो मुल्क की सरहद पर रख्खे बुरी नज़र - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

प्रिय मित्रों,
       मेरी ग़ज़ल को web magazine युवा प्रवर्तक के अंक दिनांक 01 मार्च 2019 में स्थान मिला है।
युवा प्रवर्तक के प्रति हार्दिक आभार 🙏

कृपया पत्रिका में मेरी ग़ज़ल पढ़ने हेतु निम्नलिखित Link पर जायें....

http://yuvapravartak.com/?p=11036

अब देख तुझसे कोई शिकायत न करेंगे।
पहले सरीखी लेकिन मुहब्बत न करेंगे ।

माना कि बुतपरस्ती पर है यकीं हमें,
लेकिन तेरे बुत की इबादत न करेंगे।

देना न वास्ता अब बुझते चिराग़ का ,
आंचल की ओट दे के हिफ़ाज़त न करेंगे।

जो मुल्क की सरहद पर रख्खे बुरी नज़र,
हम पेश उसको अपनी शराफ़त न करेंगे।

हो सामने जो तू तो नज़रें न मिलायें ,
ऐसी भी मगर "वर्षा" अदावत न करेंगे।

http://yuvapravartak.com/?p=11036

गुरुवार, फ़रवरी 28, 2019

ग़ज़ल .... वह अक्सर कहता है मुझसे - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

      आज दिनांक 28 फरवरी 2019 को "नवीन क़दम" वेबसाइट पर मेरी ग़ज़ल प्रकाशित हुई है। Please read & share....
   हार्दिक आभार "नवीन क़दम" 🙏
http://navinkadam.com/?p=3505
#Navinkadam #ग़ज़लवर्षा

ग़ज़ल - डॉ. वर्षा सिंह


बुधवार, फ़रवरी 27, 2019

ग़ज़ल ... उसे देखा नहीं कितने दिनों से - डॉ. वर्षा सिंह


Dr. Varsha Singh

उसे देखा  नहीं  कितने दिनों से
सुकूं पाया नहीं  कितने  दिनों से

न पलकों से लगीं पलकें ज़रा भी
दिखा सपना नहीं कितने दिनों से

शज़र  तन्हा, परिन्दे  दूर  जाते
समा बदला नहीं कितने दिनों से

न पूछो दोस्तो अब हाल मेरा
पता अपना नहीं कितने दिनों से

नदी सूखी, हवा भी नम नहीं है
हुई "वर्षा" नहीं कितने दिनों से

ग़ज़ल - डॉ. वर्षा सिंह