शुक्रवार, नवंबर 10, 2017

दोस्ती

ज़िन्दगी जीना सज़ा है इन दिनों
कुछ नहीं अपना पता है इन दिनों
दोस्ती उनसे हुई तो ये हुआ
पूछते सब क्या हुआ है इन दिनों
         - डॉ. वर्षा सिंह

सूर्य हुआ फिर उदित

सूर्य हुआ फिर उदित
प्रकृति हो गई मुदित
        कि रोशनी फैल गई
             जगी उम्मीद नई
          नहीं रहती कायम हरदम
              अंधेरे की काली छाया
           बदलती रहती है प्रतिपल
         समय की गतिशाली काया
हो कब कैसे क्या - क्या
नहीं किसी को विदित
      ☀- डॉ. वर्षा सिंह

गुरुवार, नवंबर 02, 2017

परछाई

अंधेरों में बसी रहती
है तन्हाई ही तन्हाई
उजालों की कथाओं में
है परछाई ही परछाई
कहां जायें, कहें किससे
समझ में कुछ नहीं आता,
बड़ी मुश्किल हुई 'वर्षा'
नहीं कोई भी सुनवाई
       - डॉ. वर्षा सिंह

बुधवार, नवंबर 01, 2017

HELLO EVERYONE

DR VARSHA SINGH

DR VARSHA SINGH IN PROGRESSIVE WITTERS ASSOCIATION



प्रिय मित्रों,
प्रगतिशील लेखक संघ , मकरोनिया शाखा की चर्चा एवं काव्य गोष्ठी दिनांक 22.10.2017 को सम्पन्न हुई। तस्वीरें उसी अवसर की..... तस्वीरों में मैं डॉ वर्षा सिंह , पी.आर.मलैया आदि.....

GOOD EVENING FRIENDS

DR VARSHA SINGH

Dr varsha Singh at Central University Sagar
























प्रिय मित्रो,
     डॉ हरीसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय , सागर के आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी सभागार में दिनांक 26.10.2017 को पाठक मंच द्वारा आयोजित वरिष्ठ कथाकार डॉ विद्या बिंदु सिंह की किताब " हिरण्यगर्भा" की समीक्षा गोष्ठी/ परिचर्चा में मुझे मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का अवसर मिला।आयोजन की कुछ तस्वीरें आप सब से शेयर कर रही हूं।

Dear Friends, where I was present as Chief Guest ... Pathak Manch Samiksha Goshthi Held at  Dr. Hari Singh Gour Central University , Sagar's Aacharya Nand Dulare Bajpai Sabhagaar, 26.10.2017 ... I am sharing some pictures of the event with all of you.