शनिवार, अगस्त 19, 2017

ज़िन्दगी में.....

ज़िन्दगी में
बेवज़ह
कभी कुछ नहीं होता है.

कोई नफ़रतों के बाग में
इश्क़ बोता है.

कोई मुस्कुराहटों के बीच
आंसुओं से दुपट्टा भिगोता है.

ज़िन्दगी में
बेवज़ह
कभी कुछ नहीं होता है.

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (22-08-2017) को "सभ्यता पर ज़ुल्म ढाती है सुरा" (चर्चा अंक 2704) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बेवजह तो कुछ नहीं होता ... पर कई बार वजह पता ही नहीं चलती है ...

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