सोमवार, अगस्त 08, 2016

My Poetry

शुभ संध्या

सोचो शाम अगर न होती
दिन के बाद आ जाती रात
कैसे मिल कर हम कर पाते
जाते हुए समय की  बात
~ डॉ वर्षा सिंह

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (10-08-2016) को "तूफ़ान से कश्ती निकाल के" (चर्चा अंक-2430) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. संधिस्थल कहीं न कहीं तो होता ही -लघु या दीर्घ !

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