रविवार, अक्तूबर 09, 2011

प्यार तो बस प्यार है.....

73 टिप्‍पणियां:

  1. छोटी छोटी खुशियाँ समेटना भी जिंदगी में एक नया उत्साह भर देता है. बहुत सुंदर गीत प्रस्तुत किया है वर्षा जी. बधाई और शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत खूबसूरत गीत सुन्दर रचना...शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह! बहुत ही सुन्दर अभिवयक्ति.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. वक्त के सांचे में ढाल कर ज़िंदगी की जीना अच्छा है बहुत सुंदर क्या बात है ......

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह! सुदर शब्द, सुन्दर भाव और पवित्रता निश्छल. समर्पित प्रेम की, एक ही गुलदस्ते में. बहुत ही अच्छा लगा शब्द चयन और भाव दोनों ही. बधाई उत्कृष्ट रचना के लिए.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर रचना है..........

    उत्तर देंहटाएं
  7. सरल शब्दों मे गहन भावभिव्यक्ति दी है।

    उत्तर देंहटाएं
  8. saral shabdon mein behtarin rachna..premi yugal me yadi aapas me aastha ho jaye to wakai dunia ki koi parwah nahi rahti..sadar pranam ke sath

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुंदर प्रस्तुति |
    बधाई |।

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह ...बहुत खूब कहा है आपने
    बधाई उत्कृष्ट रचना के लिए.........

    उत्तर देंहटाएं
  11. रचना दीक्षित जी,
    आपके द्वारा की गई मेरे गीत की इस प्रशंसा के लिए मैं आपकी अत्यन्त आभारी हूं.हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  12. माहेश्वरी कनेरी जी,
    आपकी शुभकामनाओं हेतु हार्दिक आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  13. सुषमा'आहुति'जी,
    आपको बहुत-बहुत धन्यवाद...

    उत्तर देंहटाएं
  14. सुनील कुमार जी,
    मेरे गीत पर प्रतिक्रिया देने के लिये आपको बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  15. सागर जी,
    मेरे गीत को पसंद करने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  16. डा.जे.पी. तिवारी जी,
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!
    कृपया इसी तरह अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराते रहें।

    उत्तर देंहटाएं
  17. मनोज जी,
    यह जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा गीत पसन्द आया....
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें....आपका सदा स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  18. रश्मि प्रभा जी,
    मेरे गीत पर आपके आत्मीय विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया है.... हार्दिक धन्यवाद एवं आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  19. विजय माथुर जी,
    अनुगृहीत हूं आपकी आत्मीय टिप्पणी के लिए...हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  20. डॉ.आशुतोष मिश्रा आशु जी,
    इस उत्साहवर्द्धन के लिए अत्यन्त आभारी हूं।
    आपको बहुत-बहुत धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  21. रविकर जी,
    आप जैसे सुकवि की बहुमूल्य टिप्पणी ने मेरा उत्साह बढ़ाया है.
    आपको हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  22. मदन शर्मा जी,
    यह जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा गीत पसन्द आया....
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें....आपका सदा स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  23. बहुत खूबसूरत अहसास.
    खूबसूरत शब्द रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  24. इस दुनिया में सिर्फ ख्वाब ही तो अपने बचे हैं.... बाकी सब कुछ बांटना पड़ता है.........बाँटना मजबूरी है...... कभी बांटना सुखकर होता है.......कभी दुखकर.......आपने निश्चित रूप से बेहतरीन भाव प्रस्तुत किये हैं.......

    उत्तर देंहटाएं
  25. मनोज जी,
    आपका पुनः आगमन सुखद लगा....मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है. हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  26. विशाल जी,
    मेरे गीत को पसंद करने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  27. ख्वाबों को मुट्ठियों में बाँध लेना कितना अच्छा है। आपकी कविताएँ देखी बहुत अच्छी लगी। जब तक आप कविता करते हैं आपके अंदर का इंसान जिंदा रहता है कविता छूटी और आप भी बेजान। एक बात पर आपत्ति है आपने कुछ कविताओं में तस्वीरों का अच्छा चयन नहीं किया है कुछ तस्वीरें कविता के मूड को सूट नहीं कर रहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  28. प्यार सच में खुदा कि नेमत है ...लेकिन यह हासिल किसी - किसी को होता है .......आपका शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  29. एक चित्ताकर्षक चित्र और उस पर उससे भी एक खूबसूरसत कविता /नज्म -कयामत इसी को तो कहते हैं न !

    उत्तर देंहटाएं
  30. प्यार को परिभाषित करती अच्छी रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  31. sach kaha aapne, chhoti- chhoti khushiyon main hi basa hua hai asli sansaar, har baar kii tarah bahut sundar prastuti

    उत्तर देंहटाएं
  32. मैं और मेरा परिवेश,
    यह जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा गीत पसन्द आया....
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें....

    उत्तर देंहटाएं
  33. केवल राम जी,
    मेरे गीत पर आपके आत्मीय विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया है.... हार्दिक धन्यवाद एवं आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  34. डॉ॰ मोनिका शर्मा जी,
    अनुगृहीत हूं आपकी आत्मीय टिप्पणी के लिए...हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  35. अरविन्द मिश्रा जी,
    मेरे गीत को पसंद करने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  36. कुंवर कुसुमेश जी,
    आप जैसे सुकवि की बहुमूल्य टिप्पणी ने मेरा उत्साह बढ़ाया है.
    आपको हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  37. संजय कुमार चौरसिया जी,
    यह जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा गीत पसन्द आया....
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें....आपका सदा स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  38. वाह! बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  39. जगजीत सिंह आधुनिक गजल गायन की अग्रणी है.एक ऐसा बेहतरीन कलाकार जिसने ग़ज़ल गायकी के सारे अंदाज़ बदल दिए ग़ज़ल को जन जन तक पहुचाया, ऐसा महान गायक आज हमारे बिच नहीं रहा,
    उनके बारे में और अधिक पढ़ें : जगजीत सिंह

    उत्तर देंहटाएं
  40. प्यार तो उस परवरदीगार की एक खूबसूरत दें है | अति सुन्दर |
    आपका Alexa page rank 3,772,690 है |

    उत्तर देंहटाएं
  41. भीनी खुशबू से सराबोर आपकी कविता उत्क्रस्त श्रृंगार रस की बेहतरीन प्रस्तुति है हमेश की तरह अतिसुन्दर काव्यरचना बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  42. वर्षा जी....अति उत्तम रचना !

    अब चलो हम..
    आपकी तारीफों के पुल बाँध लें !

    उत्तर देंहटाएं
  43. वन्दना जी,
    इस उत्साहवर्द्धन के लिए अत्यन्त आभारी हूं।
    आपको बहुत-बहुत धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  44. Unlucky,
    It is really deeply sorrowful that we have lost a great Ghazal Singer...

    उत्तर देंहटाएं
  45. विनीत नागपाल जी,
    मेरे गीत को पसंद करने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  46. कुश्वंश जी,
    अनुगृहीत हूं आपकी आत्मीय टिप्पणी के लिए...हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  47. कमलेश खान सिंह डिसूजा जी,
    मेरे गीत पर काव्यात्मक प्रतिक्रिया देने के लिये आपको बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  48. वन्दना अवस्थी दुबे जी,
    यह जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा गीत पसन्द आया....
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें....

    उत्तर देंहटाएं
  49. बेहद ख़ूबसूरत रचना! हर एक शब्द दिल को छू गई!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  50. बहुत सुन्दर शब्द और अभिव्यक्ति ....
    आभार आपका !

    उत्तर देंहटाएं
  51. प्यार में भक्ति भी है,शक्ति भी है और त्याग भी
    है कहीं शबनम सा शीतल , है कहीं पर आग भी.
    अब चलो हम
    जल स्वयम् को स्वर्ण जैसा ढाल लें.........

    हमेशा की तरह हृदय को तरंगित करने वाला गीत.

    (यदि आशुकवि श्री पीलालाल चिनोरिया व उनकी पुत्री विदूषी श्रीमती विद्यावती मालविका जी के बारे में कुछ जानकारी दे सकती हैं तो कृपया अवश्य ही बतायें ,साभार.... arun.nigam56@gmail.com)

    उत्तर देंहटाएं
  52. खुशियाँ बांटने से बढ़तीं हैं...और जो कोई अपने साथ हो तो बात ही क्या है...

    उत्तर देंहटाएं
  53. बहुत सुन्दर प्रेम-गीत..
    अब चालों हम वक्त को अपने सांचे में ढल लें..कमाल की पंक्तिय लिखी है आपने.

    www.belovedlife-santosh.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  54. एक-एक शब्द मोती जैसे...
    गीत ......सुन्दर माला
    चित्र संयोजन पूर्व की भाँति अपूर्व

    उत्तर देंहटाएं
  55. प्यार में कोई शर्त नहीं होती ...
    आपके शेर और उसका प्रस्तुतीकरण लाजवाब होता है ...

    उत्तर देंहटाएं
  56. बहुत व्यस्त था ! बहुत मिस किया ब्लोगिंग को ! बहुत जल्द सक्रिय हो जाऊंगा !

    बहुत ही अच्छी प्रस्तुति..

    उत्तर देंहटाएं
  57. मनोहारी गीत .बधाई !दिवाली मुबारक .

    उत्तर देंहटाएं
  58. बहुत सुदंर रचना
    आपको पढना वाकई अच्छा लगता है

    उत्तर देंहटाएं
  59. बहुत सुदंर प्रस्तुति ..

    -:SHUBH DEEPAWALI:-

    उत्तर देंहटाएं
  60. सुन्दर.... सुन्दर.... अति सुन्दर.
    आपका जबाब नही जी.

    उत्तर देंहटाएं
  61. सुंदर प्यारा चित्र और प्यार भरी कविता.

    उत्तर देंहटाएं
  62. बेहतरीन प्रस्तुति .प्यार में होती नहीं है शर्त कोई मान लो ....

    उत्तर देंहटाएं
  63. बेस्ट ऑफ़ 2011
    चर्चा-मंच 790
    पर आपकी एक उत्कृष्ट रचना है |
    charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं