Varsha Singh
कवयित्री / शायरा डॉ. वर्षा सिंह
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गीत - चर्चा
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फोटो गैलरी -2
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बुधवार, सितंबर 29, 2010
अपनापन मुट्ठी भर
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बुधवार, सितंबर 22, 2010
दुख मेरे आंगन की बेरी
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बुधवार, सितंबर 15, 2010
तुम नहीं तो....
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6 टिप्पणियां:
रविवार, सितंबर 12, 2010
फड़फड़ा कर पंख उड़ते पल
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4 टिप्पणियां:
गुरुवार, सितंबर 09, 2010
दुआएं लाना
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बुधवार, सितंबर 08, 2010
एक आहट सी आ रही है अभी
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- वर्षा सिंह एक आहट सी आ रही है अभी। ज़िन्दगी गुनगुना रही है अभी। होगी ‘वर्षा’ सुखन की, शेरों की शायरी मुस्कुरा रही है अभी ।
शुक्रवार, सितंबर 03, 2010
बूढ़ी आंखें
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-वर्षा सिंह (‘नई धारा’ के वृद्ध अंक में प्रकाशित मेरी ग़ज़लें साभार) एक जाने किसकी राह देखतीं , आस भरी बूढ़ी आंखें । इंतजार की पीड़ा सह...
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