गुरुवार, अप्रैल 13, 2017

HAPPY BAISAKHI

#HappyBaisakhi to everyone! May this festival marking a new year&celebrating the hard work of our farmers bring joy& prosperity for all.
- Dr Varsha Singh

गुरुवार, मार्च 16, 2017

‘‘बुंदेलखण्ड की कवयित्रियां’’ ग्रंथ में डॉ वर्षा सिंह का परिचय एवं ग़ज़लें

Bundel Khand Ki Kavyitriyan
अपनी एक ग़ज़ल यहां दे रही हूं जो प्रकाशित हुई है ‘‘बुंदेलखण्ड की कवयित्रियां’’ ग्रंथ में। इस ग्रंथ में मेरी और मेरी बहन डॉ शरद सिंह का परिचय एवं ग़ज़लें भी शामिल हैं। बुंदेली साहित्य परम्परा के संदर्भ में महत्वपूर्ण ग्रंथ है यह।
इसका संपादन किया है वरिष्ठ साहित्यकार हरिविष्णु अवस्थी जी ने और प्रकाशित किया है श्री वीरेन्द्र केशव साहित्य परिषद् टीकमगढ़ की ओर से सरस्वती साहित्य संस्थान, इलाहाबाद ने।


हरिविष्णु अवस्थी जी का आभार एवं उन्हें हार्दिक बधाई!

Bundel Khand Ki Kavyitriyan - Dr Varsha Singh

बुधवार, मार्च 08, 2017

Happy Women's Day 2017

औरत फूल है, खिलती है, सुकूं देती है
ज़िन्दगी में इक नई जान सी भर देती है
औरत  टूटे न, कोशिश ये हमेशा करना
औरत  उम्मीद के सूरज को सहर देती है
- डॉ वर्षा सिंह

मंगलवार, फ़रवरी 14, 2017

HAPPY Valentine Day

सिर्फ अहसास है ये रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो ...
- गुलज़ार

#HappyValentineDay

रविवार, जनवरी 22, 2017

कमल मामा यानी भाई को विदा Late Kamal Singh my Uncle my Brother

प्रिय मित्रो,
         हृदय पर शिला रख कर यह दुखद समाचार आप सबसे शेयर कर रही हूं कि मेरे इकलौते सगे मामा जी कमल सिंह, जिन्हें हम “भाई” कह कर पुकारते रहे हैं, का  स्वर्गवास परसों दिनांक 20.01.2017 को हो गया. कल दिनांक 21.01.2017 को चितौरा घाट, बेबस नदी के प्रवाह में खारी विसर्जन के उपरांत आज दिनांक 22.01.2017 को बरमान घाट, नर्मदा मैया के पवित्र जल में उनकी अस्थि- विसर्जन कर उन्हें महाविदा दी जा रही है. वर्ष 1966 से आदिम जाति कल्याण विभाग, म.प्र. शासन में शहडोल, सीधी, मंडला,डिंडौरी जि़लों के अनेक स्थानों पर यथा- बेनीबारी, कोतमा, बिजुरी, अमझोर, बगदरा, विक्रमपुर , भरवेल आदि में पहले शिक्षक, फिर व्याख्याता, फिर प्राचार्य पदों पर रहते हुए कुशलतापूर्वक अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए वर्ष 2000 में सेवानिवृत्ति के उपरांत से वे हमलोगों के साथ ही सागर में निवासरत रहे. उनका अपना परिवार बस हम ही लोग थे… न मामी.... न बच्चे… सब उनसे पहले ही अंतिम विदा ले चुके थे.
         अपने जीवन के अंतिम दिन 20.01.2017 को रोजाना की तरह कमल मामा… हमारे प्यारे भाई  विगत परसों सुबह 9 बजे मार्निंगवॉक पर स्वयं के पैरों पर चल कर गये…. और लौटे शव वाहन में….इस अवधि में तिली अस्पताल में   “ठीक हूं” कहते हमें आशा बंधाते हुए उन्होंने हम से अंतिम विदा ले ली...उनके “ठीक हूं” के अंतिम शब्द के दो मिनट बाद ही डॉक्टर के शब्द “ एक्सपायर हो गये हैं ”....  एकदम अविश्वसनीय… किन्तु हृदयविदारक कटु सत्य… इस शोक से उबरना सहज नहीं हो पा रहा है… उनका साया हमलोगों पर से हमेशा के लिए उठ गया…बहाना कुछ भी कहें...हार्ट अटैक या…गिरने पर कोई अंदरूनी जानलेवा आघात .... परसों तक बिलकुल स्वस्थ और प्रसन्नचित्त भाई यानी हमारे कमल मामा अब हमारे बीच नहीं हैं….
          उनके सरल स्वभाव से पन्ना नगर, शहडोल, सीधी, मंडला, डिंडौरी…. यहां सागर में सागर, मकरोनिया, रजाखेड़ी के रहवासी परिचित हैं… किसी ने कहा- “आज की दुनिया में मामा जी जैसा इतना सीधा- सच्चा भी नहीं होना चाहिए ..” और हमारे सीधे- साधे बच्चों जैसे सरल स्वभाव वाले “भाई” ने हमसे अंतिम विदा ले ली है…
         मेरे प्रिय मित्रो,  ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें …... ऊं शांति, शांति, शांति….

रविवार, जनवरी 01, 2017