शुक्रवार, मार्च 23, 2012

सोचती हूं ....


14 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत उम्दा!! अच्छी लगी रचना!!

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  2. मन के उथल -पुथल को चित्रित करने में सफल हुई है आपकी यह रचना ,मेरे भी ब्लॉग पर आये

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  3. सोचता हूँ टिपण्णी करूँ या ना करूँ
    रचना पढ़ते ही दिल से निकली
    वाह वाह वाह वाह
    खूबसूरत

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  4. सुंदर भाव ...
    शुभकामनायें ...!!

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  5. प्रेम का वार्तालाप ... स्वयं का स्वयं से ... अनुपम ...

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  6. सुन्दर प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।
    http://vangaydinesh.blogspot.in/2012/02/blog-post_25.html
    http://dineshpareek19.blogspot.in/2012/03/blog-post_12.html

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  7. बहुत उम्दा ! प्रेम के भाव मन में न रख अभिव्यक्‍त कर ही देने चाहिए। अपनी असमंजस को बहूबी बयां किया है आपने ! बधाई !

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